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Mahashivratri 2026: त्रिशूल से नंदी तक… जानें भगवान शिव के प्रतीकों का अर्थ और रहस्य

Mahashivratri 2026: त्रिशूल से नंदी तक… जानें भगवान शिव के प्रतीकों का अर्थ और रहस्य
Mahashivratri 2026: त्रिशूल से नंदी तक... जानें भगवान शिव के प्रतीकों का अर्थ और रहस्य

भगवान शिव के प्रतीक

Lord Shiv Symbols: महाशिवरात्रि सनातन धर्म के प्रमुख और विशेष त्योहारों में शामिल है. ये दिन और महान रात भगवान शिव और माता पार्वती की मानी जाती है. ये पर्व फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि के दिन मनाया जाता है. शिव पुराण में बताया गया है कि महाशिवरात्रि पर शिव जी अपने ज्योतिर्लिंग रूप में प्रकट हुए थे. मान्यताओं के अनुसार, इस दिन शिव और शक्ति का मिलन भी हुआ था.

इस साल महाशिवरात्रि 15 फरवरी को मनाई जाएगी. भगवान शिव एक देवता होने के साथ-साथ ध्यान, योग और गहन आध्यात्मिक चेतना के प्रतीक भी माने जाते हैं. उनके अनेक प्रतीक हैं, जिनके अद्भुत अर्थ और रहस्य हैं. भगवान शिव के प्रतीक जीवन का गहरा संदेश देते हैं. आइए इस शुभ अवसर पर जानते हैं त्रिशूल, डमरू तीसरी आंख, नाग, चांद और नंदी जैसे शिव प्रतीकों के आध्यात्मिक अर्थ और रहस्य.

त्रिशूल

त्रिशूल शिव का प्रमुख अस्त्र माना जाता है. इस त्रिशूल के तीन तिनके सत, रज और तम गुणों के संतुलन के बारे में बताते हैं. त्रिशूल जीवन के तीन पहलू-भूत, वर्तमान और भविष्य की ओर भी संकेत करते हैं. ये शरीर की तीन नाड़ियों—इडा, पिंगला और सुषुम्ना के बारे में भी दर्शाता है. त्रिशूल जीवन नियंत्रण और सतुंतन के बारे में सिखाता है.

तीसरी आंख

शिव की माथे पर स्थित तीसरी आंख ज्ञान का सर्वोच्च प्रतीक बताई जाती है. यह आंख अज्ञानता, बुराई और भ्रम का नाश करती है. व्यक्ति के अंतर्ध्यान में लीन होने के बाद ये आंख खुलती है. इससे विवेक की शक्ति का संदेश मिलता है.

नाग

शिव जी के गले में लिपटा नाग कुण्डलिनी शक्ति का प्रतीक बताया जाता है. शिव जी का ये प्रतीक संकेत देता है कि व्यक्ति को अहंकार से ऊपर उठकर सांसारिक बंधनों से मुक्त होना चाहिए. ये चेतना की जागृति का भी संकेत देता है.

अर्धचंद्र और नंदी

शिव के जटाओं पर विराजमान अर्धचंद्र समय का सूचक माना जाता है. ये समय पर नियंत्रण, मन की एकाग्रता और भावनात्मक संतुलन जीवन का संकेत देता है. नंदी शिव के वाहन होने के साथ-साथ उनके परम भक्त भी हैं. नंदीसे समर्पण, धैर्य, शक्ति और अडिग भक्ति का संदेश मिलता है.

डमरू और भस्म

डमरू शिव जी की सृष्टि की ध्वनि का प्रतीक माना गया है. यह नाद ब्रह्म और जीवन की शुरुआथ का संकेत देता है. वही शिव जी द्वारा लपेटा गया भस्म भस्म जीवन के क्षणभंगुरता और वैराग्य की याद दिलाता है.

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Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं और पौराणिक कथाओं की जानकारियों पर आधारित है. टीवी9 भारतवर्ष इसकी पुष्टि नहीं करता है.

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