Politics

DAC से भारतीय सेनाओं को बड़ी ताकत मिलने की तैयारी, अहम फैसलों पर जल्द लगेगी मुहर

DAC से भारतीय सेनाओं को बड़ी ताकत मिलने की तैयारी, अहम फैसलों पर जल्द लगेगी मुहर
DAC से भारतीय सेनाओं को बड़ी ताकत मिलने की तैयारी, अहम फैसलों पर जल्द लगेगी मुहर

प्रतीकात्मक फोटो.

भारतीय सशस्त्र बलों की परिचालन क्षमता को नई ऊंचाई देने की दिशा में एक बड़ा कदम उठने वाला है. डिफेंस एक्विजिशन काउंसिल (DAC) भारतीय सशस्त्र बलों की ताकत बढ़ाने के लिए जल्द ही बड़े फैसलों को मंजूरी देने वाली है. आने वाली मंजूरियां थलसेना, वायुसेना और नौसेना तीनों के लिए मल्टी-डोमेन अपग्रेड मानी जा रही है.

सूत्रों के अनुसार, इन प्रस्तावों का फोकस आधुनिक युद्ध की जरूरतों, क्षेत्रीय सुरक्षा चुनौतियों और मेक इन इंडिया व आत्मनिर्भर भारत पहल को मजबूत करने पर है. रक्षा मंत्रालय के मुताबिक, DAC से जल्द मंजूरी मिलने के बाद इन परियोजनाओं को तेजी से आगे बढ़ाया जाएगा. इन तीनों फैसलों से भारत की हवाई, समुद्री और तकनीकी सैन्य ताकत को एक साथ बड़ा बढ़ावा मिलेगा.

114 अतिरिक्त राफेल लड़ाकू विमान

सूत्रों के मुताबिक, DAC जिन प्रमुख प्रस्तावों को हरी झंडी दे सकता है, उनमें भारतीय वायुसेना के लिए 114 अतिरिक्त राफेल लड़ाकू विमान मिलना शामिल है. इससे वायुसेना की लड़ाकू क्षमता मजबूत होगी और घटती स्क्वाड्रन संख्या को संभालने में मदद मिलेगी. वर्तमान में वायुसेना की स्क्वाड्रन संख्या स्वीकृत स्तर से कम है और पुराने विमानों के चरणबद्ध रिटायरमेंट के कारण यह चुनौती और बढ़ रही है. राफेल जैसे अत्याधुनिक मल्टी-रोल फाइटर जेट के शामिल होने से वायुसेना की स्ट्राइक क्षमता में इजाफा होगा. एयर डिफेंस और डीप स्ट्राइक मिशनों में मजबूती आएगी. पूर्वी और पश्चिमी दोनों मोर्चों पर रणनीतिक संतुलन बेहतर होगा. विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला वायुसेना की ऑपरेशनल रेडीनेस के लिए बेहद अहम साबित होगा.

नौसेना के लिए 6 और P-8I समुद्री निगरानी विमान

भारतीय नौसेना की समुद्री निगरानी और पनडुब्बी रोधी युद्ध (ASW) क्षमता को मजबूत करने के लिए 6 अतिरिक्त P-8I विमान खरीदने का प्रस्ताव भी DAC के एजेंडे में शामिल है. इन विमानों की मदद से हिंद महासागर क्षेत्र (IOR) में निगरानी और खुफिया क्षमताएं बढ़ेंगी. दुश्मन पनडुब्बियों की पहचान और ट्रैकिंग अधिक प्रभावी होगी. समुद्री मार्गों और रणनीतिक चोक-पॉइंट्स की सुरक्षा मजबूत होगी. बढ़ती क्षेत्रीय गतिविधियों और समुद्री चुनौतियों के बीच यह कदम नौसेना की समुद्री प्रभुत्व नीति को और मजबूती देगा. इससे हिंद महासागर क्षेत्र में निगरानी, पनडुब्बी रोधी युद्ध और समुद्री सुरक्षा क्षमता और मजबूत होगी.

स्वदेशी मरीन गैस टरबाइन इंजन पर बड़ा जोर

24 से 48 मेगावाट क्षमता वाले इन इंजनों को भविष्य के अत्याधुनिक युद्धपोतों के लिए भारत में ही विकसित किया जाएगा. DAC स्वदेशी मरीन गैस टरबाइन इंजन विकास कार्यक्रम को भी मंजूरी दे सकता है. युद्धपोतों के लिए पूरी तरह स्वदेशी इंजन तकनीक पर काम होगा. विदेशी आपूर्तिकर्ताओं पर निर्भरता में कमी आएगी. रक्षा विनिर्माण क्षेत्र में तकनीकी आत्मनिर्भरता को बल मिलेगा.

Khabar Monkey
the authorKhabar Monkey

Leave a Reply