
नई दिल्ली. भारत ने तो अपने डेयरी और कृषि सेक्टर की सीमित पहुंच ही अमेरिका को दी है, लेकिन बांग्लादेश ने अपने सारे दरवाजे खोल दिए हैं. बांग्लादेश के कृषि सेक्टर के लिए यह बड़ा खतरा साबित हो सकता है. हाल ही में जारी एक संयुक्त बयान में अमेरिका और बांग्लादेश ने पारस्परिक व्यापार समझौते (Reciprocal Trade Agreement) पर सहमति जताई है, जिसके तहत बांग्लादेश अमेरिकी कृषि उत्पादों को बड़े स्तर पर बाजार पहुंच प्रदान करेगा. इसमें डेयरी उत्पाद, बीफ, पोल्ट्री, सोया उत्पाद, ट्री नट्स और फलों जैसे आइटम शामिल हैं. यह समझौता न केवल बांग्लादेश के स्थानीय किसानों को चुनौती देगा, बल्कि देश की खाद्य सुरक्षा और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी प्रभावित कर सकता है. व्हाइट हाउस की ओर से जारी इस बयान में कहा गया है कि यह समझौता दोनों देशों के बीच आर्थिक संबंधों को मजबूत करेगा, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि यह बांग्लादेश के लिए एकतरफा साबित हो सकता है.
इस समझौते में कहा गया है कि बांग्लादेश अमेरिकी औद्योगिक और कृषि उत्पादों को आसान पहुंच देगा, जिसमें रसायन, चिकित्सा उपकरण, मशीनरी, ऑटोमोबाइल पार्ट्स, आईसीटी उपकरण, ऊर्जा उत्पादों के अलावा कृषि क्षेत्र से जुड़े सोया, डेयरी, बीफ, पोल्ट्री और फल-नट्स शामिल हैं. बदले में, अमेरिका ने बांग्लादेशी उत्पादों पर लगाए गए पारस्परिक टैरिफ को 37% से घटाकर 19% कर दिया है, और कुछ उत्पादों पर इसे शून्य प्रतिशत तक करने का वादा किया है.
बांग्लादेश की इकोनॉमी में कृषि बहुत अहम भूमिका निभाती है. साल 2023-24 में देश की कुल जीडीपी का लगभग 11.19% हिस्सा खेती से आया. यानी देश की कमाई का अच्छा खासा भाग कृषि से जुड़ा है. करीब 38% लोग अपनी रोज़ी-रोटी के लिए इसी सेक्टर पर निर्भर हैं. लाइवस्टॉक सेक्टर, जिसमें डेयरी, मीट और पोल्ट्री शामिल हैं, भी काफी महत्वपूर्ण है. यह जीडीपी में 1.9% योगदान देता है. लगभग 20% लोगों को सीधे इसी सेक्टर से रोजगार मिलता है, जबकि करीब 50% लोग किसी न किसी रूप में इससे जुड़े हुए हैं.
2021-22 में बांग्लादेश में कुल 43 करोड़ से ज्यादा पशुधन था. इसमें 5.67 करोड़ गाय-भैंस और भेड़-बकरी तथा 37.56 करोड़ मुर्गियां शामिल थीं. उत्पादन की बात करें तो दूध 13 करोड़ मीट्रिक टन, मीट 9.3 करोड़ मीट्रिक टन और अंडे 233.5 करोड़ से ज्यादा रहे. डेयरी मार्केट का साइज लगभग 3 अरब डॉलर है. स्थानीय दूध उत्पादन 1.4 करोड़ मीट्रिक टन है, जबकि 3.11 लाख मीट्रिक टन डेयरी उत्पाद बाहर से आयात होते हैं.
क्या बांग्लादेश ने अपने पैर पर कुल्हाड़ी मारी
अमेरिका के साथ यह डील बांग्लादेश के लिए जोखिम भरी हो सकती है, क्योंकि अमेरिकी कृषि प्रोडक्ट्स पर भारी सब्सिडी मिलती है. इसका मतलब है कि वहां का डेयरी, बीफ और पोल्ट्री बहुत कम कीमत पर तैयार होता है. अगर ये सस्ते प्रोडक्ट्स बड़ी मात्रा में बांग्लादेश आएंगे, तो यहां के छोटे किसान और लाइवस्टॉक से जुड़े लोग कड़ी प्रतिस्पर्धा में फंस जाएंगे. अमेरिकी उत्पादन बड़े पैमाने पर और सरकारी मदद से होता है, इसलिए लोकल प्रोड्यूसर्स कीमत में मुकाबला नहीं कर पाएंगे.
2024 में ही बांग्लादेश ने 51.9 करोड़ डॉलर के डेयरी उत्पाद आयात किए थे, जिससे लोकल बाजार पहले से दबाव में है. विशेषज्ञ मानते हैं कि मीट और डेयरी सेक्टर में उत्पादन 4% तक गिर सकता है. साथ ही, जीएमओ और बायोटेक फूड्स को अमेरिकी सर्टिफिकेट के आधार पर बिना स्थानीय जांच के अनुमति देने से पर्यावरण और हेल्थ रिस्क बढ़ सकते हैं.
कैसे दोधारी तलवार है ये समझौता?
यह समझौता बांग्लादेश के लिए एक दोधारी तलवार जैसा है. एक ओर, यह अमेरिका से सस्ते कृषि उत्पादों की उपलब्धता बढ़ाएगा, जो बढ़ती मध्य वर्ग की मांग को पूरा कर सकता है. बांग्लादेश की आबादी में मध्य वर्ग 3 करोड़ से अधिक है, जो हाई क्वालिटी वाले उत्पादों की मांग कर रहा है. लेकिन दूसरी ओर, यह स्थानीय उत्पादकों को हाशिए पर धकेल सकता है.
बांग्लादेश अभी LDC (Least Developed Country) कैटेगरी में है. इस स्टेटस की वजह से उसे कई देशों में एक्सपोर्ट पर खास छूट मिलती है, जैसे कम या जीरो टैरिफ, आसान ट्रेड नियम और स्पेशल मार्केट एक्सेस. इसी कारण उसका रेडीमेड गारमेंट्स सेक्टर बहुत तेजी से बढ़ा, और यही सेक्टर उसके कुल निर्यात का सबसे बड़ा हिस्सा है.
लेकिन 2026 में जब बांग्लादेश LDC स्टेटस से बाहर हो जाएगा, तो उसे ये खास सुविधाएं धीरे-धीरे खत्म हो जाएंगी. इसका मतलब है कि उसके कपड़ों और अन्य प्रोडक्ट्स पर ज्यादा टैरिफ लग सकते हैं, जिससे वे ग्लोबल मार्केट में महंगे हो जाएंगे और कॉम्पिटिशन बढ़ जाएगा.
ऐसे समय में अगर वह अमेरिका जैसे बड़े देश के साथ ऐसी डील करता है, जिसमें ज्यादा आयात हो और घरेलू सेक्टर पर दबाव बढ़े, तो उसकी इकोनॉमी पर डबल असर पड़ सकता है. एक तरफ एक्सपोर्ट पर मिलने वाली छूट कम होगी, दूसरी तरफ लोकल इंडस्ट्री पर सस्ते आयात का दबाव बढ़ेगा. खासकर रेडीमेड गारमेंट्स सेक्टर, जो लाखों लोगों को रोजगार देता है.
इस समझौते में और क्या-क्या?
इस समझौते में सिर्फ कृषि या टैरिफ की बात नहीं है, बल्कि कई और शर्तें भी शामिल हैं. जैसे डेटा का फ्री ट्रांसफर यानी दोनों देशों के बीच डिजिटल जानकारी का आसानी से आदान-प्रदान हो सकेगा. डिजिटल कस्टम्स का मतलब है कि सीमा शुल्क से जुड़ी प्रक्रियाएं ज्यादा ऑनलाइन और तेज होंगी. इसके अलावा बीमा बाजार में जो रुकावटें थीं, उन्हें भी कम या खत्म करने की बात कही गई है, ताकि विदेशी कंपनियां आसानी से काम कर सकें. कुल मिलाकर यह डील अमेरिकी निर्यात को बढ़ावा देगी. लेकिन अगर बांग्लादेश ज्यादा विदेशी कृषि उत्पादों पर निर्भर हो गया, तो उसकी कृषि आत्मनिर्भरता और पॉलिसी बनाने की आजादी पर असर पड़ सकता है.






