
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता.
दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने मंगलवार को दिल्ली सचिवालय में कैबिनेट बैठक के बाद बड़ा फैसला लिया है. दिल्ली सरकार ने बेटियों से जुड़ी एक बड़ी योजना में बड़ा बदलाव करने का एलान किया है. मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने घोषणा की है कि 31 मार्च तक लाडली योजना को बंद कर दिया जाएगा. अब 1 अप्रैल से दिल्ली लखपति बिटिया योजना शुरू की जाएगी, जिसके तहत सरकार की ओर से बेटियों को पहले से अधिक आर्थिक सहायता दी जा सकेगी.
दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने बताया कि लाडली योजना 2008 में लाडली योजना शुरू की गई थी. इस योजना के तहत अलग-अलग चरणों में कुल 36 हजार रुपये बैंक में जमा किए जाते थे और यह राशि मेच्योरिटी पर मिलती थी। हालांकि, इस योजना के तहत 1 लाख 86 हजार खाते अनक्लेम्ड रह गए थे. मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने बताया कि सरकार ने जब इस गड़बड़ी की तह तक जाना शुरू किया तो महिला एवं बाल विकास विभाग ने लगभग 30 हजार बच्चियों को खोजकर 90 करोड़ रुपये उनके खातों में ट्रांसफर किए.
अब 12वीं तक नहीं, बल्कि ग्रेजुएशन तक मिलेगा लाभ
सीएम ने बताया कि इसके अलावा अब 41 हजार और बच्चियों की पहचान की गई है, जिनके हक का करीब 100 करोड़ रुपये का फंड एक साल पूरा होने पर जारी किया जाएगा. इस तरह कुल मिलाकर सरकार करीब 190 करोड़ रुपये लाभार्थियों को दे रही है. मुख्यमंत्री ने बताया कि अब नई दिल्ली लखपति बिटिया योजना के तहत कई बड़े बदलाव किए गए हैं.
2008 में दिल्ली की बेटियों के लिए लाडली योजना शुरू हुई थी, लेकिन इस योजना के अंतर्गत हजारों बेटियों की करोड़ों रुपये की मैच्योरिटी राशि वर्षों तक बैंकों में अनक्लेम्ड पड़ी रही।
हमारी सरकार ने इसे एक चुनौती के रूप में लिया, घर-घर जाकर बेटियों की जानकारी जुटाई और उन तक योजना की pic.twitter.com/th5hRr0Swe
— Rekha Gupta (@gupta_rekha) February 10, 2026
इस योजना की राशि 36 हजार से बढ़ाकर 56 हजार रुपये की जाएगी. लाभ अब 12वीं तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि ग्रेजुएशन तक मिलेगा. मॅच्योरिटी पर 1 लाख रुपये दिए जाएंगे.
इन शर्तों को करना होगा पूरा
हालांकि योजना में कुछ शर्तें भी लागू होंगी. मुख्यमंत्री के अनुसार, बच्ची का टीकाकरण अनिवार्य होना चाहिए. स्कूल में पढ़ाई जरूरी होगी,और 18 साल से पहले शादी होने पर योजना का लाभ नहीं मिलेगा. मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि सरकार का उद्देश्य सिर्फ योजना चलाना नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि हर बेटी तक उसका हक सही समय पर पहुंचे और वह आत्मनिर्भर बन सके.






