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Vidhan Sabha Chunav Result 2026: मतगणना से विजेता की घोषणा तक, कैसे होती है एक-एक वोटों की गिनती? यहां समझें

पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, असम, केरलम और पुडुचेरी विधान सभा चुनावों की मतगणना खत्म होते ही परिणाम आज शाम तक आ जाएंगे. भारत निर्वाचन आयोग ने अपनी तैयारियों को अंतिम रूप दे दिया है. राजनीतिक दलों ने भी कमर कस ली है. लड्डू से लेकर पटाखों के इंतजाम पूरे कर लिए गए हैं. सुरक्षा बलों ने ईवीएम की सुरक्षा दिन-रात की तो राजनीतिक दलों ने भी कोई कसर नहीं रखी. वे भी सील-बंद ईवीएम और स्ट्रॉंग रूम की निगरानी में लगातार डटे हुए हैं.आइए, इसी बहाने जानते हैं कि मतगणना से विजेता की घोषणा तक का पूरा प्रॉसेस क्या है? कैसे तय होती हैं सभी चीजें?

Vidhan Sabha Chunav Result 2026: मतगणना से विजेता की घोषणा तक, कैसे होती है एक-एक वोटों की गिनती? यहां समझें
Vidhan Sabha Chunav Result 2026: मतगणना से विजेता की घोषणा तक, कैसे होती है एक-एक वोटों की गिनती? यहां समझें

भारत निर्वाचन आयोग ने चुनाव प्रक्रिया बहुत सुव्यवस्थित बनाकर रखा है. मतगणना से लेकर विजेता की घोषणा तक हर कदम नियमों से बंधा होता है. भारत निर्वाचन आयोग इस पूरी प्रक्रिया की निगरानी करता है. यह प्रक्रिया पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित करती है. अपने देश में कई बार हारने वाली पार्टियां या कैंडिडेट्स सिस्टम पर सवाल उठाते हैं, दोबारा मतगणना की मांग करते हैं, कई बार जिला निर्वाचन अधिकारी मांग के अनुरूप दोबारा गणना के आदेश भी देते हैं. यह सब कुछ इसलिए जिससे चुनाव की शुचिता बनी रहे. लोकतंत्र में यह बेहद महत्वपूर्ण है.

कैसे होती है मतगणना की तैयारी?

मतगणना से एक दिन पहले ही जिला निर्वाचन अधिकारी, चुनाव पर्यवेक्षकों की देखरेख में सब कुछ तय कर देते हैं. किस अफसर, किस कर्मचारी की ड्यूटी किस काम में लगेगी, वे कितने बजे मतगणना केंद्र पर पहुंचेंगे? सब कुछ पहले से ही तय है. ऐसा ही राजनीतिक दल करते हैं. वे भी मतगणना केंद्रों पर अपने प्रतिनिधि तैनात करते हैं. चुनाव आयोग यह सब इसलिए सुनिश्चित करता है ताकि पारदर्शिता बनी रहे.

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मतदान के बाद सभी ईवीएम और वीवीपैट मशीनें सुरक्षित स्ट्रॉन्ग रूम में रखी जाती हैं. इन कमरों की सुरक्षा केंद्रीय बल करते हैं. उम्मीदवारों के प्रतिनिधि भी निगरानी कर सकते हैं. मतगणना के दिन स्ट्रॉंग रूम पर लगी सील की जांच की जाती है. यह जांच निर्वाचन आयोग के दिशा-निर्देशों के अनुसार राजनीतिक दलों की देखरेख में करने की परंपरा है.

ऐसी होती है मतगणना केंद्र की व्यवस्था

लगभग हर जिले में एक जगह पर मतगणना केंद्र बनाने की व्यवस्था है. हर केंद्र पर कई टेबल होती हैं.प्रत्येक टेबल पर एक काउंटिंग सुपरवाइजर और सहायक तैनात होते हैं. हर टेबल पर माइक्रो ऑब्जर्वर तैनात होते हैं. यहाँ भी सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए जाते हैं. केवल अधिकृत लोगों को ही काउंटर तक प्रवेश मिलता है. निर्वाचन आयोग की गाइड-लाइन के अनुसार सबके लिए पहचान पत्र अनिवार्य होता है, चाहे सरकारी कर्मचारी-अधिकारी हों या राजनीतिक दलों के प्रतिनिधि.

सुबह आठ बजे से शुरू होती है मतगणना

मतगणना आमतौर पर सुबह आठ बजे शुरू होती है. नियमानुसार सबसे पहले पोस्टल बैलेट की गिनती होती है. इसके बाद ईवीएम की गिनती शुरू होती है. हर राउंड में अलग-अलग मशीनों के वोट गिने जाते हैं. हर राउंड के बाद परिणाम दर्ज किए जाते हैं. उम्मीदवारों के एजेंट इस प्रक्रिया को देख सकते हैं.

पश्चिम बंगाल के एक मतगणना केंद्र के बाहर सुरक्षा का पहरा.

पोस्टल बैलेट का है बड़ा महत्व

पोस्टल बैलेट में सेना, सरकारी कर्मचारी और सेवा मतदाता शामिल होते हैं. इनकी गिनती पहले होती है. यदि पोस्टल बैलेट की संख्या अधिक हो, तो इसका असर नतीजों पर पड़ सकता है. निर्वाचन आयोग के नियमों के अनुसार हर बैलेट की जांच जरूरी होती है. पोस्टल बैलेट के परिणाम सबसे पहले घोषित किये जाते हैं. यहीं लीड बननी शुरू हो जाती है.

ईवीएम से मतगणना का क्या है गणित?

ईवीएम में दर्ज वोट को कंट्रोल यूनिट से निकाला जाता है. हर मशीन एक निश्चित संख्या के वोट दिखाती है. कई राउंड में यह प्रक्रिया पूरी होती है. हर राउंड के बाद कुल वोट जोड़े जाते हैं. जिस उम्मीदवार के वोट सबसे ज्यादा होते हैं, वह आगे रहता है.

वीवीपैट का मिलान क्यों है जरूरी?

निर्वाचन आयोग के निर्देश के अनुसार वीवीपैट का मिलान जरूरी है. हर विधानसभा क्षेत्र में कम से कम पांच वीवीपैट पर्चियों की गिनती होती है. यह मिलान पारदर्शिता बढ़ाने के लिए किया जाता है. यदि किसी तरह का अंतर मिलता है, तो नियमों के अनुसार कार्रवाई होती है. यह प्रॉसेस पोस्टल बैलेट एवं ईवीएम की गिनती पूरी होने के बाद की जाती है.

पश्चिम बंगाल में गश्त करते जवान.

शुरुआती रुझान और अंतिम नतीजे

शुरुआती राउंड के बाद रुझान आने लगते हैं. मीडिया इन्हें दिखाता है, लेकिन ये अंतिम नतीजे नहीं होते. हर राउंड के साथ तस्वीर साफ होती जाती है. अंतिम नतीजे सभी राउंड पूरे होने के बाद ही घोषित होते हैं. जिस उम्मीदवार को सबसे अधिक वैध वोट मिलते हैं, वही विजेता होता है. यह नियम भारत निर्वाचन आयोग द्वारा लागू है.

बराबरी की स्थिति में क्या होता है?

यदि दो उम्मीदवारों के वोट बराबर हों, तो इसके लिए भी चुनाव आयोग के नियमों के एक प्रक्रिया तय है. निर्वाचन आयोग के नियमों के अनुसार लॉटरी या ड्रॉ किया जा सकता है. यह प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी बनाई गई है.

पुनर्गणना के क्या हैं प्रावधान?

उम्मीदवार पुनर्गणना की मांग कर सकते हैं, करते भी हैं. लेकिन जरूरी नहीं है कि निर्वाचन अधिकारी हर मांग को मान लें. यदि आयोग को मांग उचित लगती है तो दोबारा गिनती कराई जाती है. अनेक दृष्टांत इसके लिए मिलते हैं. यह नियम भी निर्वाचन आयोग के दिशा-निर्देशों में शामिल है.

विजेता की अंतिम घोषणा कब और कैसे?

जब सभी राउंड की मतगणना पूरी होने के बाद ही अंतिम रूप से विजेता की घोषणा की जाती है. रिटर्निंग ऑफिसर किसी कैंडीडेट के विजय की आधिकारिक घोषणा करते हैं और विजयी प्रत्याशी को तुरंत प्रमाण पत्र भी दिया जाता है.

आयोग कैसे तय करता है पारदर्शिता?

पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखी जाती है. सीसीटीवी कैमरे और ऑब्जर्वर मौजूद रहते हैं. निर्वाचन आयोग के अधिकारी हर चरण पर नजर रखते हैं. उम्मीदवारों के एजेंट भी प्रक्रिया की निगरानी करते हैं. मतगणना से विजेता की घोषणा तक प्रक्रिया बेहद स्पष्ट है. हर चरण में नियमों का पालन होता है. भारत निर्वाचन आयोग इस प्रक्रिया को निष्पक्ष बनाता है. इससे लोकतंत्र की मजबूती बनी रहती है.

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