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18 लाख का पैकेज, जेब में आए सिर्फ 6 लाख… नौकरी ज्वाइन करने से पहले जान लें कंपनियां कैसे करती हैं खेल

18 लाख का पैकेज, जेब में आए सिर्फ 6 लाख… नौकरी ज्वाइन करने से पहले जान लें कंपनियां कैसे करती हैं खेल
18 लाख का पैकेज, जेब में आए सिर्फ 6 लाख... नौकरी ज्वाइन करने से पहले जान लें कंपनियां कैसे करती हैं खेल

ऑफर लेटर साइन करने से पहले ये बात जान लेंImage Credit source: ai generated

नौकरी की तलाश कर रहे युवाओं के लिए एक बड़ा सैलरी पैकेज किसी सपने के सच होने जैसा होता है. ऑफर लेटर पर छपा लाखों का आंकड़ा अक्सर आंखों को सुकून देता है, लेकिन क्या वह पूरी रकम बैंक खाते में पहुंचती है? यह एक ऐसा सवाल है जो अक्सर नजरअंदाज कर दिया जाता है. हाल ही में एक स्टार्टअप फाउंडर ने लिंक्डइन पर इस कड़वी सच्चाई से पर्दा उठाया है कि कैसे कंपनियां भारी-भरकम ‘Cost to Company’ (CTC) दिखाकर उम्मीदवारों को लुभाती हैं, जबकि हकीकत में हाथ आने वाली सैलरी बेहद कम होती है.

18 लाख के ऑफर का हैरान करने वाला सच

‘ब्लॉकसेब्लॉक’ (BlockseBlock) के फाउंडर साहिल ठाकुर ने हाल ही में सोशल मीडिया पर एक वाकया साझा किया, जिसने कॉरपोरेट जगत में सैलरी स्ट्रक्चर पर नई बहस छेड़ दी है. उन्होंने अपने एक छात्र की कहानी बताई जिसे एक स्टार्टअप से 18 लाख रुपये सालाना (LPA) का जॉब ऑफर मिला. सुनने में यह आंकड़ा किसी फ्रेशर के लिए बहुत शानदार लग सकता है.

साहिल ठाकुर ने जब इस ऑफर की गहराई से जांच की, तो सामने आया कि 18 लाख का यह गुब्बारा दरअसल शर्तों की हवा से भरा हुआ था. ऑफर का बारीक विश्लेषण करने पर पता चला कि उस कर्मचारी की फिक्स्ड बेस सैलरी (Fixed Salary) केवल 6 लाख रुपये सालाना थी. यानी महीने के हिसाब से देखें तो खाते में सिर्फ 50,000 रुपये ही आने थे. बाकी के 12 लाख रुपये ऐसे थे, जो शायद कर्मचारी को कभी मिलें ही नहीं.

परफॉर्मेंस बोनस का मायाजाल

साहिल ठाकुर ने इस ऑफर के ‘ब्रेकअप’ को समझाते हुए बताया कि कंपनियों ने सैलरी को बढ़ा-चढ़ाकर दिखाने के लिए कैसे-कैसे पेंच जोड़े थे. 18 लाख में से 4 लाख रुपये ‘परफॉर्मेंस बोनस’ के तौर पर रखे गए थे. पेंच यह था कि यह बोनस तभी मिलता जब कर्मचारी अपने टारगेट का 120 प्रतिशत हासिल कर ले.

साहिल ने लिखा कि हकीकत यह है कि ये टारगेट मैनेजर द्वारा तय किए जाते हैं और अक्सर इतने कठिन होते हैं कि केवल 10 फीसदी लोग ही इन्हें पूरा कर पाते हैं. यानी यह 4 लाख रुपये मिलना लगभग नामुमकिन जैसा ही होता है. इसके अलावा, ऑफर में 3 लाख रुपये का ‘रिटेंशन बोनस’ भी शामिल था. शर्त यह थी कि यह पैसा तभी मिलेगा जब कर्मचारी कंपनी में दो साल पूरे कर लेगा. विडंबना यह है कि स्टार्टअप्स में ज्यादातर लोग 18 महीने के भीतर ही नौकरी छोड़ देते हैं, जिससे यह राशि भी कंपनी के पास ही रह जाती है.

शेयर के नाम पर दिया जाता है लालच

सैलरी पैकेज को भारी-भरकम बनाने के लिए इसमें 5 लाख रुपये के ESOPs (Employee Stock Options) भी जोड़े गए थे. यह कंपनी के शेयर होते हैं, जिनकी वैल्यू कंपनी की मौजूदा वैल्यूएशन पर आधारित होती है. ये शेयर कर्मचारी को चार साल की अवधि में किस्तों में मिलते हैं.

सबसे बड़ा जोखिम यह है कि इन शेयरों का कोई मतलब तभी है जब कंपनी शेयर बाजार में लिस्ट (IPO) हो जाए या कोई बड़ी कंपनी उसे खरीद ले. अगर ऐसा नहीं हुआ, तो उन 5 लाख रुपये की वैल्यू शून्य हो सकती है. साहिल ठाकुर ने तंज कसते हुए कहा, “तो असल में उम्मीदवार को महीने के 50,000 रुपये मिल रहे हैं, यानी 6 लाख का पैकेज. बाकी 12 लाख रुपये पूरी तरह काल्पनिक हैं.” उन्होंने अपने छात्र को स्पष्ट सलाह दी कि तुम 18 लाख नहीं कमा रहे हो, बल्कि 6 लाख रुपये और एक ‘लॉटरी का टिकट’ पा रहे हो.

फ्रेशर्स अक्सर खाते हैं धोखा

साहिल ठाकुर की इस पोस्ट ने कई प्रोफेशनल्स की दुखती रग पर हाथ रख दिया. उन्होंने बताया कि कंपनियां 6 लाख के बजाय 18 लाख का आंकड़ा इसलिए दिखाती हैं क्योंकि यह दिखने में आकर्षक लगता है. नए ग्रेजुएट्स (Freshers) अक्सर सैलरी का डिटेल ब्रेकअप नहीं मांगते और बड़े नंबर को देखकर तुरंत हां कर देते हैं. सोशल मीडिया पर इस खुलासे के बाद कई लोगों ने अपने अनुभव साझा किए. एक यूजर ने बताया कि कैसे पुरानी कंपनी में फाउंडर ने सबको ESOP देने का वादा किया था, लेकिन अंत में किसी को कुछ नहीं मिला. वहीं, कुछ जानकारों का कहना है कि सिर्फ फ्रेशर्स ही नहीं, बल्कि अनुभवी लोग भी कई बार CTC के इस खेल को समझ नहीं पाते और हाथ में आने वाली कम सैलरी से बाद में निराश होते हैं.

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