
एक फरवरी को पेश होने वाले बजट के बाद सोना-चांदी खरीदना सस्ता हो सकता है। सरकार इस पर लगने वाली कस्टम ड्यूटी को 6% से घटाकर 4% कर सकती है। अगर ऐसा होता है तो सोना प्रति 10 ग्राम करीब 3 हजार और चांदी 6 हजार रुपए सस्ती हो सकती है।
2025 में सोना 75% और चांदी 167% बढ़ी है। अभी यानी जनवरी 2026 में 10 ग्राम 24 कैरेट सोना 1.50 लाख और एक किलो चांदी 3.50 लाख रुपए में मिल रही है।
सोना-चांदी के बढ़ने की 5 वजहें
जंग और अनिश्चितता: दुनिया में बढ़ते तनाव (ट्रेड वॉर और जियो-पॉलिटिकल रिस्क) के कारण निवेशकों ने जोखिम कम करने के लिए सोने को ‘सेफ एसेट’ माना। फाइनेंशियल सर्विसेज फर्म जेपी मॉर्गन के मुताबिक, अनिश्चितता ही कीमतों का सबसे बड़ा ड्राइवर रही।
कमजोर डॉलर: अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरें घटाने से डॉलर कमजोर हुआ। चूंकि सोना-चांदी डॉलर में ट्रेड होते हैं, इसलिए डॉलर गिरते ही इनकी कीमतें उछल गईं।
केंद्रीय बैंकों की खरीदारी: दिसंबर 2025 तक दुनिया भर के केंद्रीय बैंकों के पास अब कुल 32,140 टन सोना था। वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के अनुसार, 2022 में केंद्रीय बैंकों ने 1,082 टन सोना खरीदा, 2023 में 1,037 टन और 2024 में रिकॉर्ड 1,180 टन सोना खरीदा। साल 2025 में भी सेंट्रल बैंकों की खरीदारी 1 हजार टन के पार होने की उम्मीद है।
चांदी की इंडस्ट्रियल डिमांड: चांदी का 50% से ज्यादा इस्तेमाल सोलर पैनल, EV बैटरी और चिप्स बनाने में होता है। डिमांड बढ़ने की वजह से चांदी ने सोने से भी ज्यादा रिटर्न दिया।
सप्लाई में कमी: माइनिंग से सोने-चांदी की सप्लाई सीमित रही, जबकि मांग बढ़ती गई। सप्लाई की इस कमी से सोने-चांदी के दामों में उछाल आया है।
सोना-चांदी में अभी निवेश करें या बजट के बाद
फाइनेंशियल एक्सपर्ट्स के मुताबिक 1 फरवरी 2026 के बजट से पहले एक साथ बड़ी खरीदारी करने से बचना ही सही रणनीति है। इसकी जगह किस्तों में निवेश का तरीका अपनाना चाहिए, ताकि कीमतों में होने वाले भारी उतार-चढ़ाव के जोखिम को कम किया जा सके।
आनंद राठी शेयर्स एंड स्टॉक ब्रोकर्स में कमोडिटीज के डायरेक्टर नवीन माथुर का सुझाव है कि बाजार की अनिश्चितता और ऊंचे स्तरों को देखते हुए निवेशकों को “तेजी के पीछे भागने के बजाय गिरावट पर खरीदारी” करनी चाहिए। बजट के पहले और बाद, दोनों समय छोटी-छोटी किस्तों में “बाय-ऑन-डिप्स” की रणनीति अपनाना सही रहेगा।
मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज में रिसर्च (कमोडिटीज) के हेड नवनीत दमानी ने कहा- 2026 की पहली तिमाही में भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है, लेकिन लंबी अवधि का ट्रेंड पॉजिटिव है। एक बार में पैसा लगाने की कोशिश करने के बजाय, जब भी कीमतों में ‘ठीक-ठाक गिरावट’ आए, तो उसे निवेश बढ़ाने के मौके के तौर पर इस्तेमाल करें।
सोने-चांदी में निवेश के 2 तरीके
फिजिकल गोल्ड-सिल्वर: भरोसेमंद ज्वेलर्स या बैंक से सोने-चांदी के सिक्के या बार खरीद सकते हैं। निवेश के लिहाज से 24 कैरेट सोने को सबसे अच्छा माना जाता है। हालांकि, इसे घर में रखने पर चोरी का डर रहता है। बैंक लॉकर में रखने पर अलग से किराया देना पड़ता है।
गोल्ड-सिल्वर ETF: इसके लिए आपके पास एक डीमैट अकाउंट होना जरूरी है। जैसे आप कंपनियों के शेयर खरीदते हैं, वैसे ही आप स्टॉक मार्केट से गोल्ड या सिल्वर ETF की यूनिट्स खरीद सकते हैं। यहां चोरी का कोई डर नहीं और शुद्धता की 100% गारंटी होती है।
सवाल 1: बजट में सोना-चांदी पर ड्यूटी क्यों घटा सकती है सरकार?
जवाब: सरकार सोने की स्मगलिंग रोकने के लिए ड्यूटी घटा सकती है। फिलहाल 6% इंपोर्ट ड्यूटी और 3% GST को मिलाकर कुल 9% टैक्स बैठता है। ग्रे मार्केट में काम करने वाले लोग इस 9% टैक्स को बचाकर प्रति किलो सोने पर करीब 11.5 लाख रुपए का मुनाफा कमा रहे हैं।
सरकार टैक्स और कम करती है, तो अंतरराष्ट्रीय और घरेलू कीमतों का अंतर कम होगा और तस्करी कम होगी।
सरकार ने जुलाई 2024 के बजट में सोने पर इम्पोर्ट ड्यूटी को 15% से घटाकर 6% कर दिया था। इससे डिमांड करीब 10% बढ़ गई थी।
ड्यूटी कम होने से मैन्युफैक्चरिंग कॉस्ट घटेगी और भारतीय ज्वेलरी एक्सपोर्टर्स को ग्लोबल मार्केट में मुकाबला करने में मदद मिलेगी।
EV और सोलर पैनल मैन्युफैक्चरिंग में चांदी का ज्यादा इस्तेमाल होता है। ड्यूटी कम होने से मैन्युफैक्चरिंग बढ़ेगी, जो ग्रीन एनर्जी ट्रांजिशन में मदद करेगा।
सवाल 2: अगर ड्यूटी घटी तो इंडस्ट्री पर असर क्या होगा?
जवाब:
केडिया एडवाइजरी के डायरेक्टर अजय केडिया ने कहा कि बजट को बड़ा इवेंट मानकर चांदी या सोने में अभी बड़ा निवेश करना सही नहीं है। अगर आपको निवेश करना है तो हर महीने थोड़ा-थोड़ा इनवेस्टमेंट सही रहेगा। इससे रिस्क कम हो जाएगी और लॉन्ग टर्म में फायदे की संभावना बड़ जाती है।
इनवेस्टमेंट इंफॉर्मेशन एंड क्रेडिट रेटिंग एजेंसी ICRA की को-ग्रुप हेड किंजल शाह ने कहा- अगर ड्यूटी और घटती भी है, तो उसका असर थोड़े समय के लिए ही होगा। ऐसा इसलिए क्योंकि सोना-चांदी की कीमतें अंतरराष्ट्रीय ट्रेंड से ज्यादा प्रभावित होती हैं।
जुलाई 2024 में 9% ड्यूटी कटौती से घरेलू कीमतों में 5% की गिरावट आई थी। इससे ज्वेलरी की बिक्री 10% बढ़ गई थी, लेकिन अंतरराष्ट्रीय कीमतों में आई तेजी ने इस राहत को जल्द ही खत्म कर दिया था। ज्वेलरी की बिक्री में भी करीब 10% की गिरावट आई थी।






