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बजट 2026 का ‘सिल्वर प्लान’: चांदी की कीमत और मांग को लेकर क्या हैं उम्मीदें?

बजट 2026 का ‘सिल्वर प्लान’: चांदी की कीमत और मांग को लेकर क्या हैं उम्मीदें?
बजट 2026 का 'सिल्वर प्लान': चांदी की कीमत और मांग को लेकर क्या हैं उम्मीदें?

बजट के ऐलान सिल्वर की कीमतों को कैसे प्रभावित कर सकते हैं?

भारत केंद्रीय बजट 2026 की तैयारी कर रहा है, ऐसे में निवेशक और उद्योग जगत के भागीदार इस बात पर बारीकी से नजर रख रहे हैं कि यह बजट कीमती धातुओं, विशेष रूप से चांदी की डिमांड को किस प्रकार प्रभावित कर सकता है. चांदी अन्य कमोडिटीज में काफी अलग है. यह एक इंवेस्टमेंट असेट्स होने के साथ-साथ एक महत्वपूर्ण इंडस्ट्रीयल मेटल भी है. कीमतों के कई वर्षों के उच्चतम स्तर पर पहुंचने और डिमांड में संरचनात्मक बदलावों के चलते, बजट 2026 के नीतिगत संकेत चांदी के बाजार की गतिशीलता पर दीर्घकालिक प्रभाव डाल सकते हैं. आइए आपको भी बताते हैं कि आखिर इस मामले में जानकारों का क्या कहना है?

बाजार में पहले से ही हलचल शुरू हो चुकी है

2026 की शुरुआत में ही चांदी की कीमतों में नाटकीय उछाल आया है. भारतीय कमोडिटी एक्सचेंज (एमसीएक्स) पर, 30 जनवरी को चांदी के दाम 4.20 लाख रुपए के साथ लाइफ टाइम हाई पर पहुंच गए थे. उसके बाद 31 जनवरी को चांदी के दाम में बड़ी गिरावट देखने को मिली और दाम 2.91 लाख रुपए के लेवल पर आ गए. उससे पहले चांदी के दाम में उछाल की वजह सुरक्षित निवेश की मांग, कमजोर होते रुपये और मजबूत निवेश रुचि के कारण हुआ. इस तेजी का एक बड़ा कारण व्यापक आर्थिक अनिश्चितता है, जिसमें भू-राजनीतिक तनाव और महंगाई का दबाव शामिल है, जिसने निवेशकों को जोखिम से बचाव के रूप में कीमती धातुओं की ओर धकेल दिया है.

इंपोर्ट ड्यूटी और प्राइस सिग्नल इफेक्ट

बजट का चांदी की कीमतों और मांग पर सीधा प्रभाव इंपोर्ट ड्यूटी में एडजस्टमेंट के माध्यम से पड़ सकता है. भारत अपनी चांदी की 80 फीसदी से अधिक आवश्यकता आयात करता है, जिसका अर्थ है कि किसी भी शुल्क परिवर्तन का घरेलू कीमतों और मांग पर तुरंत प्रभाव पड़ता है. वर्तमान में, भारत में चांदी पर लगभग 7.5 प्रतिशत सीमा शुल्क और 3 प्रतिशत जीएसटी लगता है, जिसकी कीमतें अक्सर वैश्विक रुझानों के आधार पर घटती-बढ़ती रहती हैं.

बजट से पहले, विश्लेषकों का मानना ​​है कि यदि सरकार आयात शुल्क कम करती है, तो घरेलू कीमतें नरम पड़ सकती हैं, जिससे आभूषण खरीदारों और निवेशकों के लिए फिजिकल चांदी अधिक आकर्षक हो जाएगी. हालांकि, यदि शुल्क बढ़ाए जाते हैं, तो इसका विपरीत प्रभाव पड़ सकता है, जिससे घरेलू कीमतें और भी बढ़ सकती हैं और लागत के प्रति संवेदनशील उपभोक्ताओं के बीच मांग सीमित हो सकती है.

रत्न और आभूषण क्षेत्र इंपोर्ट ड्यूटी के रिफॉर्म और जीएसटी में राहत की मांग को मुखर रूप से उठा रहा है ताकि मांग को बढ़ाया जा सके और भारतीय उत्पादों को वैश्विक स्तर पर अधिक प्रतिस्पर्धी बनाया जा सके. यदि बजट में ऐसे उपाय लागू किए जाते हैं, तो वे अप्रत्यक्ष रूप से चांदी की खपत को भी बढ़ावा दे सकते हैं.

इंडस्ट्रीयल डिमांड और ग्रीन एनर्जी को बढ़ावा

करों के अलावा, बजट 2026 में भारत की नवीकरणीय ऊर्जा संबंधी महत्वाकांक्षाओं के अनुरूप प्रोत्साहन दिए जाने की उम्मीद है. सोलर पैनलों के निर्माण और दूसरे ग्रीन टेक में चांदी की महत्वपूर्ण भूमिका होती है, जहां इसकी हाई कंडक्टीविटी को महत्व दिया जाता है. प्री बजट आउटलुक से पता चलता है कि सोलर इंफ्रा को बढ़ावा देने वाली नीतियां, जिनमें विस्तारित प्रोडक्शन इंसेंटिव और सब्सिडी शामिल हैं, समय के साथ चांदी की औद्योगिक मांग को 15-20 प्रतिशत तक बढ़ा सकती हैं, हालांकि ये प्रभाव तुरंत नहीं बल्कि धीरे-धीरे दिखाई देंगे.

इलेक्ट्रिक वाहनों में भी चांदी एक महत्वपूर्ण घटक है, जिसका व्यापक रूप से पावर इलेक्ट्रॉनिक्स, बैटरी प्रबंधन प्रणालियों और चार्जिंग अवसंरचना में उपयोग किया जाता है. इलेक्ट्रिक वाहनों को अपनाने, घरेलू घटक निर्माण या चार्जिंग नेटवर्क के लिए बजट में दिया गया कोई भी समर्थन चांदी की औद्योगिक मांग को बढ़ा सकता है.

इंडस्ट्रीयल डिमांड में इजाफा

पिछले कुछ वर्षों में, औद्योगिक उपयोग में वृद्धि हुई है, जिसमें इलेक्ट्रिक वाहनों, इलेक्ट्रॉनिक्स और सोलर एनर्जी प्रोडक्शन प्रमुख हैं. आनंद राठी वेल्थ लिमिटेड के कार्यकारी निदेशक चिराग मुनि ने मनी कंट्रोल से कहा कि वास्तव में, इलेक्ट्रॉनिक्स और विद्युत अनुप्रयोग अब कुल औद्योगिक चांदी की मांग का लगभग 68 प्रतिशत हिस्सा हैं. इससे कीमतों को समर्थन मिला है, लेकिन यह सवाल भी उठता है कि क्या मौजूदा रिकॉर्ड-उच्च कीमतों पर औद्योगिक मांग इसी गति से बढ़ती रहेगी, क्योंकि निर्माता कम लागत वाले विकल्पों की तलाश शुरू कर रहे हैं.

यहां भी दिख सकता है असर

इन सबके बीच, निवेशकों की रुचि भी बढ़ी है. 2025 में सिल्वर ईटीएफ में भारी निवेश हुआ, जिससे कुल मांग और आयात पर दबाव बढ़ा. हालांकि बजट के कर उपायों से रातोंरात व्यापक आर्थिक कारकों में बदलाव नहीं आएगा, लेकिन राजकोषीय संकेत, विशेष रूप से आयात शुल्क और औद्योगिक नीति से संबंधित, निकट भविष्य में चांदी की मांग पर पड़ने वाली प्रतिक्रिया को प्रभावित करेंगे. निवेशकों और उद्योग जगत दोनों के लिए, बजट 2026 आने वाले वर्ष में चांदी के बाजारों के विकास को आकार देने में एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हो सकता है.

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