
अजित पवार का विमान हादसे का शिकार
महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम अजित पवार के विमान हादसे की जांच तेजी से चल रही है. प्लेन के ब्लैक बॉक्स से रिकॉर्डिंग निकाली जा रही है. प्लेन के FDR, CVR से भी रिकॉर्डिंग निकाली जाएगी. इसके बाद ही इस हादसे की असली वजह सामने आएगी. जांच से शुरुआती जानकारी सामने आई है कि एक्सीडेंट से कुछ मिनट पहले पायलट जोर से चिल्लाया था.
सूत्रों ने बताया है कि पायलट को एक्सीडेंट से कुछ सेकंड पहले ही अंदाजा हो गया था कि वह गलत जगह पर लैंड कर रहा है. यह भी पता चला है कि प्लेन के पायलट ने ATC को मेडे कॉल नहीं किया था. अजित पवार 28 जनवरी की सुबह मुंबई से एक प्राइवेट प्लेन से बारामती के लिए निकले थे. बारामती एयरपोर्ट पर लैंड करते समय उनका प्लेन क्रैश हो गया. इसमें अजित पवार समेत 5 लोगों की मौत हो गई. यह पूरी घटना सुबह 8.45 बजे के बीच हुई.
क्या होता है मेडे कॉल?
मेडे कॉल को इमरजेंसी कॉल भी कहा जाता है. मुश्किल में फंसते पर पायलट ATC से मेडे, मेडे, मेडे कहता है. जब किसी विमान या जहाज पर सवार लोगों की जान को गंभीर खतरा होता है, तब पायलट या कैप्टन रेडियो पर MAYDAY कॉल करता है. यह एक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्य इमरजेंसी सिग्नल है. ‘मेडे’ शब्द फ्रांसीसी भाषा के शब्द ‘M’aider’ से बना है, जिसका अर्थ होता है, मेरी मदद करो.
कैसे काम करती है यह कॉल?
पायलट एयर ट्रैफिक कंट्रोल (ATC) को रेडियो पर तीन बार ‘मे डे’ बोलता है और विमान का नाम, समस्या, लोकेशन और उसमें सवार लोगों की जानकारी देता है. यह कॉल सुनते ही एयर ट्रैफिक कंट्रोल अलर्ट हो जाता है. उस समय के लिए बाकी सभी रेडियो बातचीत रोक दी जाती है. संकट में फंसे विमान को लैंडिंग के लिए पहली प्राथमिकता दी जाती है. आसपास के दूसरे विमानों को रास्ता बदलने का निर्देश दिया जाता है ताकि रनवे तुरंत खाली हो सके. रनवे पर एम्बुलेंस, फायर ब्रिगेड और बचाव दल को तुरंत तैनात कर दिया जाता है ताकि लैंडिंग होते ही सहायता मिल सके.






