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Kansa Birth Mystery: जब पिता ने त्याग दिया नवजात कंस, यमुना से कैसे लौटा जीवन? पढ़ें अद्भुत कथा

Kansa Birth Mystery: जब पिता ने त्याग दिया नवजात कंस, यमुना से कैसे लौटा जीवन? पढ़ें अद्भुत कथा
Kansa Birth Mystery: जब पिता ने त्याग दिया नवजात कंस, यमुना से कैसे लौटा जीवन? पढ़ें अद्भुत कथा

कंस के जन्म की कथाImage Credit source: AI-Gemini

भगवान कृष्ण और कंस की शत्रुता की कहानी जगत प्रसिद्ध है. हम सभी जानते हैं कि कैसे देवकी के आठवें पुत्र कृष्ण को वासुदेव जी ने उफनती यमुना पार कराकर कंस से बचाया था. लेकिन क्या आप जानते हैं कि कंस के जन्म को लेकर भी यमुना जी से जुड़ी एक बेहद रोचक कथा प्रचलित है? सोशल मीडिया और कुछ धार्मिक चर्चाओं में अक्सर यह सवाल उठता है कि क्या कंस के पिता ने उसे पैदा होते ही यमुना में बहा दिया था? और अगर ऐसा था, तो उसे किसने बचाया? आइए जानते हैं इस रहस्य का पूरा सच.

कंस के जन्म की रहस्यमयी कथा

पौराणिक ग्रंथों और पद्म पुराण के अनुसार, कंस का जन्म एक सामान्य बालक की तरह नहीं हुआ था. कंस के पिता महाराज उग्रसेन थे, जो मथुरा के न्यायप्रिय राजा थे. लेकिन कथाओं के अनुसार, कंस वास्तव में उग्रसेन का जैविक पुत्र नहीं था. कहा जाता है कि द्रुमिल नामक एक गंधर्व ने छल से रानी पद्मावती के साथ संबंध बनाए थे, जिसके फलस्वरूप कंस का जन्म हुआ.

क्या सच में यमुना में बहाया गया था कंस?

लोक कथाओं और कुछ ग्रंथों के संदर्भों के अनुसार, जब कंस का जन्म हुआ, तो उसके राक्षस प्रवृत्तियों के लक्षण दिखने लगे थे. भविष्यवाणियों और उसके क्रूर स्वभाव को देखकर राजा उग्रसेन अत्यंत चिंतित हो गए थे. कुछ मान्यताओं के अनुसार, कंस के जन्म के समय आकाशवाणी हुई थी कि यह बालक कुल का विनाश करेगा. इसी डर से और उसके राक्षस अंश होने के कारण, उसे एक टोकरी में रखकर यमुना जी में प्रवाहित कर दिया गया था.

कथाओं के अनुसार, यमुना में बहते हुए उस बालक को मथुरा के ही कुछ असुर प्रवृत्ति के लोगों या फिर द्रुमिल के अनुयायियों ने सुरक्षित बाहर निकाला और वापस महल तक पहुंचाने में मदद की. हालांकि, सबसे प्रचलित मत यह है कि वह महल में ही पला-बढ़ा, लेकिन उसने आगे चलकर अपने ही पिता उग्रसेन को जेल में डाल दिया और सिंहासन पर कब्जा कर लिया.

कृष्ण और कंस की कहानी में समानता

  • कथाओं के अनुसार, कंस को उसके पिता ने मृत्यु के भय से यमुना में बहाया.
  • कृष्ण को उनके पिता वासुदेव ने कंस के भय से बचाने के लिए यमुना पार कराया.

जहां कंस को बचाने वाली शक्तियां उसे एक क्रूर राजा बनाने की ओर ले गईं, वहीं कृष्ण को यमुना पार ले जाने की घटना ने कंस के अंत का मार्ग प्रशस्त किया.

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Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं और सामान्य जानकारियों पर आधारित है. टीवी9 भारतवर्ष इसकी पुष्टि नहीं करता है.

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