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रसातल में भारतीय करेंसी, डॉलर के आगे पस्त हुआ रुपया! अब इतनी हो गई कीमत

रसातल में भारतीय करेंसी, डॉलर के आगे पस्त हुआ रुपया! अब इतनी हो गई कीमत
रसातल में भारतीय करेंसी, डॉलर के आगे पस्त हुआ रुपया! अब इतनी हो गई कीमत

औंधे मुंह गिरा रुपया

गुरुवार की सुबह भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले अपने अब तक के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया है. कारोबारी सत्र की शुरुआत में ही रुपये में भारी गिरावट देखी गई और एक डॉलर की कीमत लगभग 92.00 रुपये तक जा पहुंची. बाजार खुलते ही रुपया 91.99 के स्तर पर लुढ़क गया, जबकि पिछले सत्र में यह 91.78 पर बंद हुआ था.

रुपये की इस अचानक गिरावट के पीछे मुख्य कारण सात समंदर पार अमेरिका में हो रहे बदलाव हैं. दरअसल, अमेरिकी फेडरल रिजर्व ने संकेत दिया है कि वहां महंगाई अभी भी ऊंचे स्तर पर बनी हुई है और उनका लेबर मार्केट (रोजगार बाजार) स्थिर हो रहा है. इस खबर के बाद अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में उछाल आया और डॉलर इंडेक्स मजबूत हो गया.

जब अमेरिका में ब्याज दरें या बॉन्ड यील्ड बढ़ती हैं, तो दुनियाभर के निवेशक सुरक्षित निवेश के लिए अपना पैसा भारत जैसे उभरते बाजारों से निकालकर अमेरिका ले जाने लगते हैं. बाजार के जानकारों का कहना है कि पूंजी का यह बढ़ा हुआ बहिर्वाह (Capital Outflow) और बाजार में छाई अनिश्चितता रुपये को कमजोर कर रही है. सिंगापुर के फंड मैनेजर्स के मुताबिक, बाजार में घबराहट का माहौल है और स्टॉप-लॉस ट्रिगर होने से गिरावट और तेज हुई है.

पेट्रोल, मोबाइल और विदेश यात्रा सब होगा महंगा

एक आम भारतीय के लिए रुपये की कमजोरी का मतलब सीधा महंगाई से जुड़ा है. भारत अपनी जरूरत का बहुत बड़ा हिस्सा आयात करता है. जब रुपया कमजोर होता है, तो हमें विदेशों से सामान खरीदने के लिए ज्यादा डॉलर खर्च करने पड़ते हैं.

  1. पेट्रोल-डीजल और गैजेट्स: भारत कच्चा तेल, इलेक्ट्रॉनिक्स, मशीनरी और मोबाइल पार्ट्स का बड़ा आयातक है. रुपये की गिरावट से आयात महंगा होगा, जिससे पेट्रोल-डीजल की कीमतें बढ़ सकती हैं. इसका असर माल ढुलाई पर पड़ेगा और अंततः सब्जियों व राशन के दाम बढ़ सकते हैं. इसके अलावा मोबाइल, कार और घरेलू उपकरणों (Appliances) की कीमतें भी बढ़ सकती हैं.
  2. विदेश में पढ़ाई और यात्रा: अगर आपका बच्चा विदेश में पढ़ रहा है, तो यह खबर आपके बजट को बिगाड़ सकती है. डॉलर महंगा होने से कॉलेज की ट्यूशन फीस और रहने का खर्च भारतीय रुपये में काफी बढ़ जाएगा. साथ ही, अगर आप छुट्टियों में विदेश घूमने का प्लान बना रहे हैं, तो अब आपको होटल और फ्लाइट्स के लिए अपनी जेब ज्यादा ढीली करनी होगी.

क्या सुधरेंगे हालात या और गिरेगा रुपया?

दिसंबर 2025 के आंकड़े बताते हैं कि देश का आयात बिल 8.7% बढ़कर 63.55 अरब डॉलर हो गया है, जिससे व्यापार घाटा बढ़ा है. हालांकि, रुपये की कमजोरी का एक दूसरा पहलू भी है. जो लोग विदेशों से भारत पैसा भेजते हैं (Remittance) या जो निर्यातक (Exporters) हैं, उन्हें डॉलर के बदले ज्यादा रुपये मिलने से फायदा होगा. लेकिन, इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे सेक्टर जो आयातित पुर्जों पर निर्भर हैं, उन्हें नुकसान उठाना पड़ सकता है.

सीआर फॉरेक्स एडवाइजर्स के एमडी अमित पाबारी का मानना है कि ईरान और अमेरिका के बीच तनाव और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों ने आग में घी का काम किया है. अगर रुपया 92.00 के स्तर के ऊपर बना रहता है, तो यह 92.20 से 92.50 तक भी गिर सकता है. अब बाजार की नजरें भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) पर टिकी हैं कि क्या वह इस गिरावट को रोकने के लिए अपने विदेशी मुद्रा भंडार का उपयोग करेगा या रुपये को और नीचे जाने देगा.

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