आईडीबीआई बैंक के निजीकरण (Privatization) की प्रक्रिया लंबे समय से चर्चा में है. ग्राहकों से लेकर शेयर बाजार के निवेशकों तक, हर किसी की नजर इस बात पर है कि इस सरकारी बैंक की कमान अब किसके हाथों में जाएगी. इस रेस में कोटक महिंद्रा बैंक (Kotak Mahindra Bank) का नाम सबसे आगे चल रहा था, लेकिन अब तस्वीर बदल गई है. कोटक बैंक ने इस बड़ी डील से अपने कदम पीछे खींच लिए हैं. बैंक के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) अशोक वासवानी ने हाल ही में बताया कि आखिर क्यों उन्होंने बोली लगाने से इनकार कर दिया. उनका सीधा जवाब था,आईडीबीआई बैंक की कीमत बहुत ज्यादा मांगी जा रही है.

डील से किनारा, आखिर कहां फंसा पेंच?
कोटक महिंद्रा बैंक शुरुआत से ही आईडीबीआई बैंक के अधिग्रहण को लेकर गंभीर नजर आ रहा था. बैंक ने इसके लिए बाकायदा ‘एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट’ (EoI) भी जमा किया था. यहां तक कि देश के केंद्रीय बैंक RBI से ‘फिट-एंड-प्रॉपर’ के कड़े मानक भी पूरे कर लिए गए थे. यानी कागजी तौर पर कोटक बैंक इस खरीदारी के लिए पूरी तरह योग्य था. इसके बावजूद, जब फाइनल बोली लगाने का वक्त आया, तो बैंक ने अपने हाथ खींच लिए.
अशोक वासवानी ने बैंक के मार्च 2026 तिमाही के शानदार नतीजों के बाद मीडिया से बातचीत में इस रहस्य से पर्दा उठाया. उन्होंने स्पष्ट किया कि खरीदारों के बीच दिलचस्पी इसलिए सीमित है क्योंकि सरकार द्वारा तय किया गया वैल्यूएशन (मूल्यांकन) हकीकत से कहीं अधिक है. एक आम ग्राहक या निवेशक के नजरिए से समझें, तो अगर किसी संपत्ति की कीमत उसकी असल हैसियत और मुनाफे की गुंजाइश से ज्यादा मांगी जाएगी, तो खरीदार का हिचकिचाना लाजमी है.
सरकार आईडीबीआई बैंक का रेट कम करेगी?
अब सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि जब बड़े खरीदार इतनी ज्यादा कीमत देने को तैयार नहीं हैं, तो क्या सरकार आईडीबीआई बैंक का रेट कम करेगी? फिलहाल ऐसा होता नहीं दिख रहा है. वित्त मंत्रालय से जुड़े एक अधिकारी ने हाल ही में संकेत दिया है कि निजीकरण की योजना अपने ट्रैक पर है और सरकार सभी विकल्पों को टटोल रही है.
सरकार का साफ तर्क है कि आईडीबीआई बैंक मुनाफे में है और अन्य बैंकिंग पैमानों पर भी इसका प्रदर्शन बेहतर है. इसलिए, इसके वैल्यूएशन में कटौती करने की कोई खास संभावना नहीं है. हालांकि, एक सच्चाई यह भी है कि शुरुआत में जो बोलियां आईं, वे सरकार द्वारा तय ‘रिजर्व प्राइस’ से काफी कम थीं. इससे यह साफ हो गया है कि सरकार जो कीमत चाह रही है और बाजार जो कीमत देना चाहता है, उसके बीच एक बहुत बड़ी खाई है.
नतीजों ने बढ़ाई निवेशकों की उलझन
आईडीबीआई बैंक की बिक्री प्रक्रिया में देरी का एक और बड़ा कारण इसके हालिया कारोबारी नतीजे भी हैं. गुरुवार को आए आईडीबीआई बैंक के मार्च 2026 तिमाही के नतीजे बाजार की उम्मीदों से कमजोर रहे हैं. बैंक का स्टैंडअलोन शुद्ध मुनाफा सालाना आधार पर 5% से अधिक गिरकर ₹1943.17 करोड़ पर आ गया है. हालांकि, बैंक की कुल आय 4% बढ़कर ₹9409.45 करोड़ जरूर हुई है, लेकिन मुनाफे में इस गिरावट ने बैंक के विनिवेश की टाइमिंग और इसकी सही कीमत को लेकर अनिश्चितता और बढ़ा दी है.
दूसरी तरफ, जिस कोटक महिंद्रा बैंक ने इस डील से किनारा किया है, उसके नतीजे बेहद दमदार रहे हैं. कोटक बैंक का शुद्ध मुनाफा 13.4% के शानदार उछाल के साथ ₹4,026.55 करोड़ पर पहुंच गया है, और उनकी नेट इंटरेस्ट इनकम (NII) भी 8.1% बढ़कर ₹7,876 करोड़ हो गई है.





