
महाभारत कथाImage Credit source: AI ChatGpt
Mahabharat Katha: महाभारत का महायुद्ध सिर्फ पाांडवों की जीत की कहानी भर नहीं है. ये युद्ध धर्म और अधर्म के बीच हुए युद्ध की वो गाथा है, जिसके कई किरदार आज पांच हजार साल बाद भी जीवंत हैं. महाभारत के युद्ध में एक से बढ़कर एक योद्धा थे, लेकिन अर्जुन और कर्ण बहुत विशेष और महत्वपूर्ण थे. महाभारत का युद्ध पांडवों ने इसलिए जीता क्योंकि धर्म उनके पक्ष में था.
हालांकि, महाभारत की कहानी कुछ और भी हो सकती थी अगर भगवान श्रीकृष्ण उस समय समाने नहीं आते जब कर्ण से युद्ध के दौरान अर्जुन की जान पर बन आई थी. महाभारत के युद्धदौरान ऐसे तो कई बार अर्जुन की जान पर संकट आया और हर बार श्रीकृष्ण ने उनकी जान बचाई, लेकिन एक बार कर्ण से युद्ध के दौरान रथ पर बैठे हुए भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन की जान बचाई थी. आइए उस कहानी के बारे में जानते हैं.
महाभारत की कथा के अनुसार…
महाभारत के युद्ध से पहले कर्ण से उनका कवच-कुंडल इंद्र देव मांगकर ले जा चुके थे, लेकिन सूर्य देव के बताए अनुसार, कर्ण ने देवराज इंद्र से उनका अमोघ शक्ति अस्त्र मांग लिया था, लेकिन महाभारत के युद्ध के दौरान एक सांप कर्ण के तरकश में घुस रहा था. जब कर्ण ने सांप से पूछा कि वो कौन है? तब सांप ने बताया कि वो अश्वसेन है और नागराज तक्षक का पुत्र है.
उसने कर्ण से कहा कि वो उनका बाण बनकर अर्जुन को मारना चाहता है, क्योंकि खाण्डव वन में अर्जुन ने आग लगा दी थी, जिसमें उसकी मां की मृत्यु हो गई थी. अश्वसेन ने कर्ण से बताया कि वो अर्जुन से अपनी मां की मृत्यु का प्रतिशोध लेना चाहता है. इसके बाद युद्ध के दौरान कर्ण ने अर्जुन वध करने के लिए बाण चलाया तो अश्वसेन कर्ण के बाण से लिपट गया.
श्रीकृष्ण ने ऐसे बचाई अर्जुन की जान
कर्ण के इस अस्त्र का नाम था सर्पमखास्त्र. कर्ण ने सर्पमखास्त्र का प्रयोग किया और वह सीधा अर्जुन के प्राण लेने के लिए चल पड़ा, लेकिन उसी समय श्री कृष्ण ने पलक झपकते ही अंगूठे से रथ को पांच इंच नीचे दबा दिया, जिससे सर्पमखास्त्र अर्जुन के मुकुट को काटता हुआ चला गया और अर्जुन की जान बच गई.
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Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं और सामान्य जानकारियों पर आधारित है. टीवी9 भारतवर्ष इसकी पुष्टि नहीं करता है.






