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अब IAS, IPS को जोन सिस्टम पर नहीं ग्रुपिंग मॉडल पर मिलेगा कैडर; अल्फाबेटिकल स्ट्रक्चर तैयार

अब IAS, IPS को जोन सिस्टम पर नहीं ग्रुपिंग मॉडल पर मिलेगा कैडर; अल्फाबेटिकल स्ट्रक्चर तैयार
अब IAS, IPS को जोन सिस्टम पर नहीं ग्रुपिंग मॉडल पर मिलेगा कैडर; अल्फाबेटिकल स्ट्रक्चर तैयार

सांकेतिक तस्वीर

सिविल सेवा परीक्षा पास करने वाले अफसरों के लिए केंद्र सरकार ने कैडर अलॉटमेंट के सिस्टम में बड़ा बदलाव किया है. अब IAS, IPS और IFoS अधिकारियों को कैडर देने की प्रक्रिया पुराने ज़ोन सिस्टम पर नहीं, बल्कि नए ग्रुपिंग मॉडल पर आधारित होगी. यह नया ढांचा अल्फाबेटिकल क्रम में तैयार किया गया है ताकि पूरी प्रक्रिया ज्यादा साफ, संतुलित और पारदर्शी बन सके.

डिपार्टमेंट ऑफ पर्सनल एंड ट्रेनिंग (DoPT) ने राज्यों से बातचीत के बाद यह नया कैडर अलॉटमेंट फ्रेमवर्क नोटिफाई किया है. यह वही विभाग है जो IAS कैडर को कंट्रोल करता है. नए नियम 2017 से लागू पुराने सिस्टम की जगह लेंगे.

इंडियन एक्सप्रेस की खबर के मुताबिक नए सिस्टम के तहत देश के सभी स्टेट कैडर और जॉइंट कैडर को चार ग्रुप में बांटा गया है. DoPT के मुताबिक यह व्यवस्था इसलिए लाई गई है ताकि किसी एक जोन या राज्य को ज़्यादा या कम सीट मिलने की शिकायत न रहे और ऑल इंडिया सर्विस का मूल मकसद बना रहे.

ग्रुप-1 में AGMUT (अरुणाचल प्रदेश, गोवा, मिजोरम और यूनियन टेरिटरी), आंध्र प्रदेश, असम-मेघालय, बिहार और छत्तीसगढ़ शामिल हैं.

ग्रुप-2 में गुजरात, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, झारखंड, कर्नाटक, केरल और मध्य प्रदेश रखे गए हैं.

ग्रुप-3 में महाराष्ट्र, मणिपुर, नागालैंड, ओडिशा, पंजाब, राजस्थान, सिक्किम और तमिलनाडु शामिल किए गए हैं.

ग्रुप-4 में तेलंगाना, त्रिपुरा, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल को जगह मिली है.

पहले यह व्यवस्था पांच ज़ोन में बंटी हुई थी, जिसे लेकर कई राज्यों ने असंतुलन और असमान वैकेंसी डिस्ट्रीब्यूशन की शिकायत की थी.

हर साल तय होंगी वैकेंसी

नए नियमों के मुताबिक IAS के लिए DoPT, IPS के लिए गृह मंत्रालय और IFoS के लिए पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय हर साल यह तय करेंगे कि किस कैडर में कितनी वैकेंसी हैं? इन सीटों को अनरिजर्व्ड, एससी, एसटी, ओबीसी जैसी कैटेगरी में बांटा जाएगा.

DoPT के डायरेक्टर यशु रुस्तगी के मुताबिक यह पूरी प्रक्रिया टाइम-बाउंड होगी. राज्यों को 31 जनवरी तक अपनी वैकेंसी की डिमांड भेजनी होगी. तय तारीख के बाद भेजी गई डिमांड को उस साल की गणना में शामिल नहीं किया जाएगा. सभी वैकेंसी की जानकारी मंत्रालयों की वेबसाइट पर भी पब्लिश की जाएगी.

इनसाइडर-आउटसाइडर सिस्टम रहेगा

नई पॉलिसी में साफ किया गया है कि होम स्टेट यानी इनसाइडर कैडर का अलॉटमेंट पूरी तरह मैरिट और उपलब्ध सीटों पर निर्भर करेगा. अब यह भी जरूरी होगा कि कैंडिडेट लिखित रूप से यह इच्छा जताए कि वह अपने होम स्टेट में सेवा देना चाहता है तभी उसे इनसाइडर सीट पर विचार किया जाए. ईडब्ल्यूएस कैटेगरी की सीटों को यूआर यानी अनरिज़र्व्ड कैटेगरी का हिस्सा माना जाएगा और रोस्टर में उसी तरह गिना जाएगा.

रोटेशन सिस्टम से होगा कैडर अलॉटमेंट

नए सिस्टम में कैडर अलॉटमेंट अब रोटेशनल साइकल के जरिए किया जाएगा. हर साइकल में मैरिट के हिसाब से 25 कैंडिडेट्स को शामिल किया जाएगा. अगर एक ही साइकल में एक से ज्यादा कैंडिडेट आते हैं तो ऊंची रैंक वाले को पहले कैडर मिलेगा और बाकी को अगले साइकल में भेज दिया जाएगा. इनसाइडर अलॉटमेंट के बाद आउटसाइडर कैंडिडेट्स का चयन दो चरणों में होगा जिनमें पहले PwBD कैटेगरी और फिर बाकी कैंडिडेट्स.

क्या है सरकार का मकसद

DoPT से जुड़े अफसरों का कहना है कि यह बदलाव ऑल इंडिया सर्विस की मूल भावना के मुताबिक है. जिससे अफसरों को अलग-अलग राज्यों में काम करने का अनुभव मिलेगा. साथ ही यह सिस्टम लंबे समय से चले आ रहे विवादों और असंतोष को भी कम करेगा. कुल मिलाकर गवर्नमेंट का मानना है कि नया कैडर अलॉटमेंट मॉडल प्रशासनिक मैनेजमेंट को बेहतर बनाएगा और सिविल सर्विस सिस्टम में भरोसा बढ़ाएगा.

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