
हिंदू धर्म में शनि जयंती का विशेष महत्व माना जाता है। ज्येष्ठ माह की अमावस्या तिथि को न्याय के देवता शनि देव का जन्मोत्सव मनाया जाता है। इस साल यह तिथि 16 मई को पड़ रही है। सबसे मुख्य बात इस बार शनिवार के दिन ही अमावस्या तिथि पड़ रही है, जिससे ‘शनिश्चरी अमावस्या’ दुर्लभ एवं शक्तिशाली संयोग बन रहा है। शनि जयंती के दिन कुछ विशेष उपाय करके कर्मफलदाता शनिदेव को प्रसन्न कर सकते हैं।
क्यों खास हें शनि जयंती?
धार्मिक शास्त्रों में शनि देव को ‘कर्मफल दाता’ माना जाता है, जो व्यक्ति के उसके अच्छे-बुरे कर्मों अनुसार ही फल देते हैं। शनिदेव को निष्पक्ष न्याय के लिए जाना जाता है, उनकी दृष्टि से कोई नहीं बच सकता है। शनि जयंती पर जातक सच्चे मन से उनकी आराधना करते हैं, उन्हें सौभाग्य, सुख-समृद्धि और मानसिक शांति प्राप्त होती है।
अगर आप भी शनि की साढ़ेसाती या ढैय्या के कष्टों से परेशान हैं, तो यह दिन आपके लिए किसी चमत्कार से कम नहीं है। इस दिन आप अपने कष्टों को कम करने के लिए, इस तरह के उपाय कर सकते हैं।
जानिए शनि जंयती के महा-उपाय
मान्यता है कि शनि जयंती पर किए गए विशेष उपाय आपके जीवन के संघर्षों को कम करके उन्नति के नए मार्ग खुल जाते हैं। शनि देव की कृपा पाना और कुंडली के दोषों को शांत करने के लिए शनि जयंती पर ये विशेष उपाय जरुर करें-
– शनिवार के दिन न्याय देवता शनि देव की लोहे या पत्थर की प्रतिमा पर सरसों या तिल का तेल अर्पित करें। इसको तैलाभिषेक कहा जाता है, जो कि शनि देव को अति प्रिय है।
– इस खास दिन पर काले वस्त्र, जूते-चप्पल, कंबल, काली उड़द की दाल और काले तिल का दान करें।
– धार्मिक मान्यता के अनुसार, पीपल में शनि देव का वास होता है। इस दिन सूर्यास्त के बाद किसी पीपल के पेड़ के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाएं।
– मन को एकाग्र करके रुद्राक्ष की माला से 108 बार ‘ॐ शं शनैश्चराय नमः’ मंत्र का जप करें।
– जरुरतमंदों की मदद करना है या इस दान करने से शनि देव अति प्रसन्न होते हैं।
इन बातों न भूलें
शास्त्रों में कहा गया है कि, जो व्यक्ति दूसरों का अपमान नहीं करता और ईमानदारी से सदैव अपना काम करता है, शनिदेव उसे कभी कष्ट नहीं देते हैं। यदि आप चाहते हैं कि शनि देव की विशेष कृपा आपके ऊपर बनीं रहे, तो इस बार शनि जयंती पर शनि देव की कृपा पाने के लिए तामसिक भोजन (जैसे कि मांस-मदिरा) का परहेज करें और अपने से बड़ों का सम्मान करें।





