
USD Latest News: अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया गिरकर नए रिकॉर्ड लो पर पहुंच गया है. शुक्रवार को खबर लिखे जाने तक कारोबारी सत्र के दौरान रुपया 41 पैसे गिरकर 91.97 पर ट्रेड कर रहा था. यह डॉलर के मुकाबले रुपये का अब तक का सबसे कमजोर लेवल है. यह गिरावट ग्लोबल संकेतों और डॉलर की मजबूती से आई है. रुपये पर दबाव बढ़ने की वजह विदेशी फंड्स का निकलना, मजबूत डॉलर और ग्लोबल ट्रेड टेंशन है.
इनवेस्टर सुरक्षित एसेट्स की तरफ से भाग रहे
जनवरी में एफआईआई (FII) ने भारी बिकवाली की है. साथ ही ट्रंप प्रशासन के टैरिफ थ्रेट्स और ग्लोबल रिस्क से इनवेस्टर सुरक्षित एसेट्स की तरफ से भाग रहे हैं. इससे इमर्जिंग मार्केट करेंसीज जैसे रुपया कमजोर हो रहा है. आरबीआई की तरफ से रुपये को सपोर्ट करने के लिए इंटरवेंशन किया जा रहा है. जानकारों का कहना है कि रुपया 92 के लेवल पर मजबूत रेजिस्टेंस दिखा सकता है. यदि रिस्क सेंटीमेंट सुधरा तो 90.50-90.70 तक रिकवरी संभव है. रुपया 91.97 के करीब है. यह गिरावट पिछले कुछ दिनों से जारी है. निवेशकों को वैश्विक घटनाओं पर नजर रखनी होगी.
जानकारों का कहना है कि रुपया 92 के लेवल पर मजबूत रेजिस्टेंस दिखा सकता है. यदि रिस्क सेंटीमेंट सुधरा तो 90.50-90.70 तक रिकवरी संभव है. रुपया 91.97 के करीब है. यह गिरावट पिछले कुछ दिनों से जारी है. निवेशकों को वैश्विक घटनाओं पर नजर रखनी होगी. आइए जानते हैं रुपये में गिरावट का कारण-
अमेरिकी डॉलर की मजबूती
अमेरिकी फेडरल रिजर्व ने ब्याज दर को काफी हाई रखा है और टैरिफ पॉलिसी की वजह से डॉलर इंडेक्स मजबूत हुआ है. जब डॉलर मजबूत होता है तो इमर्जिंग मार्केट करेंसी जैसे रुपया कमजोर पड़ती है.
विदेशी निवेशकों का भारी निकासी
जनवरी 2026 में विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) ने भारतीय शेयर बाजार से हजारों करोड़ रुपये निकाले हैं. भारतीय शेयर बाजार से विदेशी निवेशकों की बिकवाली से रुपये पर सीधा दबाव पड़ता है. बाजार में बिकवाली से डॉलर में पैसा बाहर जा रहा है.
ट्रंप प्रशासन के टैरिफ थ्रेट्स और ट्रेड वॉर
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नए टैरिफ प्रपोजल और ट्रेड पॉलिसी अनिश्चितता से ग्लोबल इनवेस्टर रिस्क से बच रहे हैं. इससे सुरक्षित एसेट्स जैसे डॉलर में इनवेस्टर बढ़ा और रुपया गिर रहा है.
ग्लोबल रिस्क और सुरक्षित निवेश की तरफ रुझान
जियो-पॉलिटिकल टेंशन (मिडिल ईस्ट, यूक्रेन) और ग्लोबल इकोनॉमिक अनिश्चितता से निवेशक डॉलर, यूएस ट्रेजरी जैसे सुरक्षित एसेट्स की तरफ भाग रहे हैं. इसका असर यह हो रहा है कि लोगों के बीच सोने की खरीदारी जमकर हो रही है और सोने के दाम तेजी से बढ़ रहे हैं. इसका असर यह हो रहा है कि रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले नीचे आ रहा है.






