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देश की सीमाएं होंगी और सुरक्षित, EU से डील के बाद डिफेंस सेक्टर होगा मजबूत

देश की सीमाएं होंगी और सुरक्षित, EU से डील के बाद डिफेंस सेक्टर होगा मजबूत
देश की सीमाएं होंगी और सुरक्षित, EU से डील के बाद डिफेंस सेक्टर होगा मजबूत

डिफेंस डीलImage Credit source: AI

भारत और यूरोपीय यूनियन के बीच सुरक्षा और रक्षा क्षेत्र में एक अहम समझौता अगले हफ्ते साइन होने जा रहा है. इस डील का सीधा फायदा भारत की सुरक्षा व्यवस्था और डिफेंस सेक्टर को मिलेगा. सरकार का फोकस अब सिर्फ हथियार खरीदने तक सीमित नहीं है, बल्कि भारत को रक्षा क्षेत्र में मजबूत मैन्युफैक्चरिंग हब बनाने की दिशा में यह एक बड़ा कदम माना जा रहा है.

इस समझौते के तहत EU-India डिफेंस इंडस्ट्री फोरम की शुरुआत की जा रही है. इसका मकसद भारत और यूरोप की रक्षा कंपनियों को एक साझा मंच देना है, जहां दोनों देशों की इंडस्ट्री मिलकर नए मौके तलाशेंगी. इसमें रक्षा उपकरणों के निर्माण, तकनीक साझा करने और निवेश के नए रास्ते खुलेंगे. सरकारी अधिकारी इस फोरम की गतिविधियों पर नजर रखेंगे, जिससे पारदर्शिता बनी रहे.

भारत बन रहा यूरोप का अहम डिफेंस पार्टनर

फिलहाल फ्रांस, जर्मनी, इटली और स्पेन जैसे यूरोपीय देश भारत को बड़े पैमाने पर रक्षा उपकरण सप्लाई करते हैं. लेकिन हाल के वर्षों में तस्वीर बदली है. भारत अब सिर्फ खरीदार नहीं, बल्कि निर्यातक भी बन रहा है. बीते दो सालों में भारत से यूरोप को गोला-बारूद और विस्फोटक सामग्री का निर्यात तेजी से बढ़ा है, क्योंकि कई देशों को अपने सैन्य भंडार फिर से भरने की जरूरत पड़ी.

टेक्नोलॉजी और मैन्युफैक्चरिंग दोनों में फायदा

इस नई डील के जरिए EU अपनी एडवांस्ड डिफेंस रिसर्च और टेक्नोलॉजी भारत के साथ साझा करेगा, जिससे देश की रक्षा इंडस्ट्री और मजबूत होगी. वहीं भारत की बढ़ती मैन्युफैक्चरिंग क्षमता यूरोप के लिए भी फायदेमंद साबित होगी. इससे सप्लाई चेन मजबूत होगी और दोनों पक्षों की सैन्य तैयारियां बढ़ेंगी.

समुद्री सुरक्षा और साइबर डिफेंस पर भी जोर

EU की विदेश नीति प्रमुख काजा कालेस के मुताबिक, यह साझेदारी सिर्फ हथियारों तक सीमित नहीं रहेगी. समुद्री सुरक्षा, आतंकवाद विरोधी अभियान और साइबर डिफेंस जैसे क्षेत्रों में भी सहयोग बढ़ेगा. भारतीय नौसेना और EU की नौसेनाओं के बीच संयुक्त अभ्यास की संभावनाएं भी बन रही हैं. इसके साथ ही हिंद महासागर और गिनी की खाड़ी जैसे इलाकों में साझा समुद्री गतिविधियां भी हो सकती हैं. यह डील भारत की सीमाओं को और सुरक्षित बनाने की दिशा में बड़ा कदम है. डिफेंस सेक्टर में आत्मनिर्भरता बढ़ेगी, नौकरियों के नए अवसर बनेंगे और भारत वैश्विक सुरक्षा साझेदार के रूप में और मजबूत होकर उभरेगा.

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