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मंजूरी फूड कोर्ट की, खुदाई कर दी मॉल की… नोएडा के युवराज मेहता डेथ केस में खुली बिल्डर की एक और पोल – Khabar Monkey

मंजूरी फूड कोर्ट की, खुदाई कर दी मॉल की… नोएडा के युवराज मेहता डेथ केस में खुली बिल्डर की एक और पोल – Khabar Monkey
मंजूरी फूड कोर्ट की, खुदाई कर दी मॉल की... नोएडा के युवराज मेहता डेथ केस में खुली बिल्डर की एक और पोल

युवराज मेहता केस.

नोएडा के सेक्टर-150 में सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की मौत जिस गहरी खाई में डूबने से हुई, वह महज एक हादसा नहीं बल्कि बिल्डर की अवैध प्लानिंग और लापरवाही का नतीजा है. जांच में सामने आया है कि बिल्डर ने स्पोर्ट्स सिटी की इस जमीन का उपयोग बदलने के लिए नोएडा प्राधिकरण को गुमराह किया था.

यह विवादित स्थल स्पोर्ट्स सिटी के प्लॉट नंबर-2 का उप-विभाजन (Sub-division) कर बनाया गया प्लॉट नंबर A-3 है. करीब 27,125 वर्ग मीटर की इस जमीन को नोएडा प्राधिकरण के अधिकारियों ने मंजूरी दी थी. स्पोर्ट्स सिटी के मूल लेआउट में इस जगह का उपयोग मुख्य रूप से ‘वाणिज्यिक’ (Commercial) और खेल सुविधाओं के लिए तय था.

‘फूड कोर्ट के नाम पर शॉपिंग मॉल की तैयारी’

साल 2017 में, स्पोर्ट्स सिटी के लीड डेवलपर ‘लोटस ग्रीन’ से ‘विज टाउन प्लानर्स’ नामक कंपनी ने इस प्लॉट का उप-विभाजन करवाया. प्राधिकरण ने इस जमीन पर ‘फूड एंड बेवरेज’ (खाने-पीने की दुकानें) और ‘प्रो-शॉप्स’ (खेल सामग्री की दुकानें) बनाने का नक्शा पास किया था. बिल्डर ने नियमों को ताक पर रखकर यहां एक विशाल ‘शॉपिंग कॉम्प्लेक्स’ (मॉल) बनाने की तैयारी शुरू कर दी और इसके लिए बेसमेंट की गहरी खुदाई करवा दी.

प्राधिकरण ने 2022 में निरस्त किया था नक्शा

बिल्डर ने जब इस निर्माण को मॉल के रूप में वैध कराने के लिए संशोधित नक्शा प्राधिकरण को सौंपा, तो जुलाई 2022 में इसे निरस्त कर दिया गया. प्राधिकरण ने स्पष्ट किया कि इस जमीन पर केवल प्रो-शॉप्स और फूड कोर्ट की अनुमति है, शॉपिंग कॉम्प्लेक्स की नहीं. नक्शा खारिज होने के बाद बिल्डर ने काम तो रोक दिया, लेकिन गहरी खुदाई को वैसे ही असुरक्षित छोड़ दिया, जिसमें आज बारिश का पानी भरने से युवराज की जान चली गई.

नियमों का उल्लंघन और FAR का खेल

नोएडा प्राधिकरण के दस्तावेजों के अनुसार, इस प्लॉट का कुल FAR (Floor Area Ratio) 5,136 वर्ग मीटर वाणिज्यिक और 26,189 वर्ग मीटर प्रो-शॉप्स/फूड कोर्ट के लिए निर्धारित है. स्वीकृत लेआउट में कमर्शियल ब्लॉक और प्रो-शॉप्स को अलग-अलग दिखाया गया है. इसके विपरीत, बिल्डर पूरे प्लॉट पर एक ही बड़ा कमर्शियल निर्माण (मॉल) करना चाहता था, जिसे प्राधिकरण ने अवैध माना. हालांकि, देखा जाए तो नोएडा अथॉरिटी को भी इस पर समय रहते संज्ञान लेना चाहिए था. और गड्ढे को भरवा देना चाहिए था.

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