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वैष्णो देवी मेडिकल कॉलेज के 42 मुस्लिम स्टूडेंट्स को नहीं मिलेगा एडमिशन! नई काउंसलिंग से JKBOPEE का इनकार

वैष्णो देवी मेडिकल कॉलेज के 42 मुस्लिम स्टूडेंट्स को नहीं मिलेगा एडमिशन! नई काउंसलिंग से JKBOPEE का इनकार
वैष्णो देवी मेडिकल कॉलेज के 42 मुस्लिम स्टूडेंट्स को नहीं मिलेगा एडमिशन! नई काउंसलिंग से JKBOPEE का इनकार

सांकेतिक फोटोImage Credit source: PTI

श्री माता वैष्णो देवी इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एक्सीलेंस ((SMVDIME) में एमबीबीएस में पढ़ रहे छात्रों का भविष्य इस समय असमंजस में है. कॉलेज की मान्यता रद्द होने के बाद नई काउंसलिंग की उम्मीद कर रहे छात्रों को बड़ा झटका लगा है. जम्मू-कश्मीर बोर्ड ऑफ प्रोफेशनल एंट्रेंस एग्जामिनेशन (JKBOPEE) ने साफ कर दिया है कि वह नई काउंसलिंग आयोजित नहीं करेगा. अब इन छात्रों को अन्य मेडिकल कॉलेजों में समायोजित करने का फैसला सरकार और संबंधित संस्थानों के स्तर पर होना है, जिससे छात्रों की चिंता और बढ़ गई है.

नई काउंसलिंग पर बीओपीईई का साफ इनकार

जम्मू और कश्मीर बीओपीईई ने स्वास्थ्य और चिकित्सा शिक्षा विभाग को लिखे लेटर में स्पष्ट किया है कि वर्ष 2025-26 के लिए एमबीबीएस एडमिशन की कोई नई काउंसलिंग आयोजित करना उसके दायरे में नहीं आता. बोर्ड के अनुसार, चिकित्सा परामर्श समिति (एमसीसी), स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, नई दिल्ली द्वारा जारी काउंसलिंग कार्यक्रम का पालन करना अनिवार्य है और उससे आगे बढ़कर कोई अलग प्रक्रिया नहीं अपनाई जा सकती.

बीओपीईई ने बताया कि एमसीसी के निर्देशों के तहत एसएमवीडीआईएमई के 50 छात्रों सहित कुल 1,410 एमबीबीएस अभ्यर्थियों का डेटा 31 दिसंबर 2025 तक पोर्टल पर अपडेट कर दिया गया था. ऐसे में अब दोबारा काउंसलिंग कराना नियमों के खिलाफ होगा. बोर्ड ने यह भी कहा कि अतिरिक्त सीटों का सृजन और उनका आवंटन बीओपीईई के अधिकार क्षेत्र में नहीं है. यह फैसला केवल सरकार, राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (एनएमसी) और संबंधित मेडिकल कॉलेज मिलकर ही कर सकते हैं.

NMC की कार्रवाई से पैदा हुआ संकट

इस पूरे मामले की जड़ उस समय बनी, जब राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग के मेडिकल असेसमेंट एवं रेटिंग बोर्ड ने न्यूनतम मानकों का पालन न होने के कारण एसएमवीडीआईएमई को दी गई अनुमति वापस ले ली. इसके बाद यह तय किया गया कि यहां एडमिशन पा चुके स्टूडेंट्स को जम्मू-कश्मीर के अन्य मेडिकल कॉलेजों में अतिरिक्त सीटों के रूप में समायोजित किया जाएगा.

छात्रों का भविष्य और बढ़ता राजनीतिक विवाद

एसएमवीडीआईएमई में एडमिशन लेने वाले 50 छात्रों के पहले बैच में 42 मुस्लिम छात्र थे, जिनमें अधिकतर कश्मीर से थे. इसके अलावा जम्मू के सात हिंदू छात्र और एक सिख छात्र भी शामिल था. इसी स्ट्रकचर को लेकर कुछ संगठनों ने कॉलेज में एडमिशन को रद्द करने और सभी सीटें विशेष समुदाय के छात्रों के लिए आरक्षित करने की मांग शुरू कर दी. भाजपा समर्थित दक्षिणपंथी संगठनों द्वारा गठित संघर्ष समिति नवंबर से जम्मू में आंदोलन कर रही है.

सरकार का आश्वासन

इस बीच छात्रों और उनके पेरेंट्स में गहरी चिंता बनी हुई है. हालांकि, जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला पहले ही भरोसा दिला चुके हैं कि इन 50 छात्रों की पढ़ाई किसी भी हालत में प्रभावित नहीं होने दी जाएगी, उन्होंने कहा है कि सरकार की यह कानूनी जिम्मेदारी है कि छात्रों को अन्य मेडिकल कॉलेजों में अतिरिक्त सीटें बनाकर समायोजित किया जाए, वह भी उनके घरों के नजदीक, ताकि पढ़ाई में बाधा न आए.

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