AI के बढ़ते चलन ने दुनिया भर में लाखों लोगों को नौकरियां खत्म कर दी हैं और ये चलन तेजी से बढ़ रहा है. दुनिया की बड़ी-बड़ी कंपनियां कोस्ट कटिंग और एडवांस तकनीक के नाम पर लोगों के काम को AI से बदल रही हैं. जिसके वजह से भविष्य में लोगों को अपनी नौकरी को लेकर चिंताएं बढ़ने लगी है. चीन की एक अदालत ने इस पर अहम फैसला सुनाया है. चीन की अदालत ने फैसला सुनाया कि चीनी कंपनियां कानूनी तौर पर कर्मचारियों को सिर्फ इसलिए नौकरी से नहीं निकाल सकतीं ताकि उनकी जगह पैसे बचाने वाली आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का इस्तेमाल किया जा सके.

टेक सेक्टर में ऑटोमेशन के बढ़ते चलन के बीच यह फैसला मज़दूरों के अधिकारों के लिए एक अहम मिसाल बन गया है. हांगझोऊ की अदालत ने एक टेक कंपनी के उस कदम को ‘गैर-कानूनी तरीके से नौकरी से निकालना’ करार दिया, जिसमें कंपनी ने एक कर्मचारी को इसलिए कोई दूसरा काम सौंप दिया और उसकी सैलरी में भारी कटौती कर दी, क्योंकि उसका काम AI से कराया जा सकता था और जिसका नतीजा आखिरकार उस कर्मचारी को नौकरी से निकाले जाने के रूप में सामने आया.
यह फैसला हांग्जो इंटरमीडिएट पीपल्स कोर्ट ने सुनाया. कोर्ट ने मंगलवार को इस मामले को 1 मई को मनाए जाने वाले ‘अंतरराष्ट्रीय श्रमिक दिवस’ से पहले, AI कंपनियों और कर्मचारियों के अधिकारों की सुरक्षा के कुछ खास उदाहरणों के एक सेट के हिस्से के तौर पर सार्वजनिक किया है.
किस केस में सुनाया गया ये फैसला
यह सब तब शुरू हुआ, जब झोउ नाम के एक कर्मचारी ने कथित तौर पर 2022 में AI से जुड़ी एक कंपनी में क्वालिटी एश्योरेंस सुपरवाइजर के तौर पर काम शुरू किया और उसे हर महीने 25 हजार युआन मिलते थे. उसके काम में बड़े लैंग्वेज मॉडल्स के साथ मिलकर काम करना, उनके आउटपुट की समीक्षा करना, यूजर के सवालों का मिलान करना और सटीकता सुनिश्चित करने के लिए गैर-कानूनी या समस्याग्रस्त सामग्री को फ़िल्टर करना शामिल था.
लेकिन समय के साथ कंपनी ने उसके काम के कुछ हिस्सों को संभालने के लिए AI का इस्तेमाल करना शुरू कर दिया और सैलरी घटाकर 15 हजार युआन कर दी गई थी. साथ ही उसको किसी और निचले स्तर के काम में भेजना चाहा, लेकिन झोउ ने इस बदलाव से इनकार कर दिया, यह तर्क देते हुए कि नई भूमिका और सैलरी में कटौती अनुचित थी. इसके बाद कंपनी ने संगठनात्मक पुनर्गठन और कर्मचारियों की कम ज़रूरत का हवाला देते हुए उसका कॉन्ट्रैक्ट खत्म कर दिया और उसे मुआवजे की पेशकश की.
अपने हक की झोउ ने लड़ी लड़ाई
झोउ ने नौकरी से निकाले जाने और मुआवज़े, दोनों को चुनौती दी और इस विवाद को कमेटी में ले गया. मध्यस्थता पैनल ने उसके पक्ष में फैसला सुनाया, नौकरी से निकाले जाने को गैर-कानूनी बताया और अतिरिक्त मुआवजे के उसके दावे का समर्थन किया. इसके बाद कंपनी इस मामले को अदालत में ले गई और बाद में हांग्जो इंटरमीडिएट पीपुल्स कोर्ट में अपील की. जिसके बाद कोर्ट ने ये फैसला सुनाया
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