Best Utensil for Boiling Milk: दूध में मौजूद कैल्शियम, प्रोटीन और विटामिन जैसे पोषक तत्व हमारी हड्डियों और मांसपेशियों को मजबूती देता है। दूध को उबालने के लिए अक्सर लोग स्टील या एल्यूमीनियम के बर्तनों का इस्तेमाल करते हैं। दूध के ब्रांड और शुद्धता पर हजारों खर्च कर दिए जाते हैं लेकिन उसे उबालने के लिए इस्तेमाल होने वाले बर्तनों पर बहुत ही कम लोग ध्यान देते हैं।

विज्ञान के अनुसार अगर हम दूध को गलत बर्तन में उबालते हैं तो उसके पोषक तत्व जहरीले रसायनों में बदल सकते हैं जो हड्डियों और किडनी पर सीधा असर करते हैं। ऐसे में यह जानना जरूरी है कि किस बर्तन में दूध उबालना सेहत को फायदा पहुंचा सकता है।
स्टेनलेस स्टील
आजकल लगभग हर घर में स्टेनलेस स्टील के बर्तनों का उपयोग किया जाता है। विशेषज्ञों के अनुसार के लिए यह सबसे सुरक्षित और सेहतमंद विकल्प है। इसकी सबसे बड़ी खूबी यह है कि स्टील एक नॉन-रिएक्टिव धातु है। इसका मतलब है कि तेज आंच पर गर्म होने के बाद भी यह दूध के पोषक तत्वों के साथ कोई रासायनिक प्रतिक्रिया नहीं करता। इससे दूध का प्राकृतिक स्वाद और उसके गुण बरकरार रहते हैं। साथ ही अच्छी क्वालिटी के स्टील के बर्तन को साफ करना आसान होता है जिससे बैक्टीरिया पनपने का खतरा कम रहता है।
मिट्टी के बर्तन
अगर आप दूध का असली सोंधा स्वाद और अधिकतम पोषण चाहते हैं तो मिट्टी के बर्तन (कुल्हड़ या हांडी) से बेहतर कुछ नहीं है। पुराने समय में गांवों में दूध को धीमी आंच पर मिट्टी के बर्तनों में ही पकाया जाता था। मिट्टी के बर्तन क्षारीय प्रकृति के होते हैं जो दूध की एसिडिटी को संतुलित करने में मदद करते हैं। इसमें दूध धीरे-धीरे गर्म होता है जिससे उसके एंजाइम्स सुरक्षित रहते हैं और पाचन में आसानी होती है। हालांकि मॉर्डन लाइफस्टाइल में इनकी देखभाल थोड़ी कठिन हो सकती है लेकिन सेहत के लिहाज से यह ज्यादा फायदेमंद माने जाते हैं।
दूध उबलाते हुए तस्वीर (सौ. फ्रीपिक)
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पीतल और कांसा
आयुर्वेद में पीतल और कांसे के बर्तनों में भोजन पकाना शुभ और सेहत के लिए फायदेमंद माना गया है। माना जाता है कि ये धातुएं खाने में सकारात्मक गुण जोड़ती हैं। हालांकि दूध उबालने के लिए इनका इस्तेमाल करते समय बहुत सावधानी की जरूरत होती है। यदि इन बर्तनों पर कलई न हो तो दूध इनके साथ रिएक्ट कर सकता है जिससे स्वाद बिगड़ सकता है और पेट से जुड़ी समस्याएं हो सकती हैं।
एल्युमिनियम और नॉन-स्टिक
जानकारी के अनुसार आपको से दूरी बनानी चाहिए। रिसर्च बताते हैं कि एल्युमिनियम एक लीचिंग धातु है। जब इसमें दूध उबाला जाता है तो इसके सूक्ष्म कण दूध में घुल जाते हैं जो लंबे समय में किडनी, याददाश्त की कमी और हड्डियों की कमजोरी का कारण बन सकते हैं। इसी तरह नॉन-स्टिक बर्तनों में लगी टेफ्लॉन कोटिंग भी तेज गर्मी पर जहरीली गैसें और रसायन छोड़ सकती है जो दूध की गुणवत्ता को पूरी तरह नष्ट कर देते हैं।
अच्छी सेहत के लिए सिर्फ महंगा दूध खरीदना काफी नहीं है। अपनी रसोई में बदलाव लाएं और एल्युमिनियम को हटाकर स्टेनलेस स्टील या मिट्टी के बर्तनों को प्राथमिकता दें। एक छोटा सा बदलाव आपके परिवार को भविष्य की बड़ी बीमारियों से बचा सकता है।





