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48 घंटे में तीसरी बार पाकिस्तान पहुंचे अरागची, क्या अमेरिका से होने वाली है डील?

ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची एक बार फिर पाकिस्तान पहुंचे हैं. उन्होंने 48 घंटे के अंदर तीसरी बार पाकिस्तान का दौरा किया है. मंगलवार को इस्लामाबाद पहुंचने से पहले वह रूस और ओमान भी गए थे. उनका यह दौरा अमेरिका के साथ चल रहे तनाव को खत्म करने और शांति का रास्ता खोजने की कोशिश का हिस्सा है.

48 घंटे में तीसरी बार पाकिस्तान पहुंचे अरागची, क्या अमेरिका से होने वाली है डील?
48 घंटे में तीसरी बार पाकिस्तान पहुंचे अरागची, क्या अमेरिका से होने वाली है डील?

अरागची का बार-बार पाकिस्तान आना दिखाता है कि ईरान जल्दी समाधान चाहता है और अलग-अलग देशों से बात करके कोई रास्ता निकालने की कोशिश कर रहा है. रिपोर्ट के मुताबिक, अरागची ने पिछले पाकिस्तान दौरे पर एक रेड लाइन दस्तावेज सौंपा था, जिसमें ईरान की साफ शर्तें बताई गईं. इसमें परमाणु मुद्दे और होर्मुज स्ट्रेट को लेकर को लेकर प्रस्ताव था.

अरागची ने पुतिन से मुलाकात की

इससे पहले अरागची ने रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से सेंट पीटर्सबर्ग में मुलाकात की. यह बैठक करीब डेढ़ घंटे चली. इसमें दोनों देशों के रिश्तों, क्षेत्रीय हालात और अमेरिका-इजराइल से जुड़े संघर्ष पर विस्तार से चर्चा हुई. अरागची ने कहा कि यह बैठक बहुत अच्छी रही और सभी अहम मुद्दों पर खुलकर बात हुई.

उन्होंने यह भी कहा कि और रूस के बीच मजबूत रणनीतिक साझेदारी है. हालिया संघर्ष के दौरान रूस ने ईरान का समर्थन किया है. वहीं पुतिन ने कहा कि रूस पश्चिम एशिया में शांति बहाल करने की कोशिशों का समर्थन करेगा और ईरान के साथ खड़ा रहेगा.

ट्रंप ने ईरान के प्रस्ताव पर चर्चा की

इसी बीच व्हाइट हाउस ने बताया कि ईरान की ओर से एक प्रस्ताव दिया गया था, जिस पर चर्चा हो रही है. इस प्रस्ताव में होर्मुज स्ट्रेट को फिर से खोलने और युद्ध खत्म करने की बात कही गई है. लेकिन इसमें परमाणु मुद्दे पर बातचीत को बाद में करने की बात रखी गई है.

व्हाइट हाउस की प्रेस सेक्रेटरी कैरोलिना लेविट के बताया कि ट्रंप ने इस प्रस्ताव पर अपनी नेशनल सिक्योरिटी टीम के साथ चर्चा की है. हालांकि रायटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, एक अमेरिकी अधिकारी ने कहा कि ट्रंप इस प्रस्ताव से पूरी तरह खुश नहीं हैं, क्योंकि इसमें ईरान के परमाणु कार्यक्रम का जिक्र नहीं है.

क्यों नहीं हो पा रहा समझौता?

ईरान का कहना है कि पहले युद्ध खत्म हो और खाड़ी क्षेत्र में जहाजों की आवाजाही से जुड़े विवाद सुलझाए जाएं, उसके बाद परमाणु मुद्दे पर बात हो. वहीं अमेरिका चाहता है कि परमाणु मुद्दे पर शुरुआत से ही चर्चा हो. पाकिस्तान की तरफ से कोशिशें जारी हैं कि दोनों देशों के बीच बातचीत आगे बढ़े. लेकिन फिलहाल स्थिति रुकी हुई है और कोई बड़ा समझौता नहीं हो पाया है.

khabarmonkey@gmail.com

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