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पाकिस्तान ने दी ईरान तक व्यापारिक कॉरिडोर खोलने की परमिशन, जानें इसके मायने

पाकिस्तान ने अप्रैल 2026 में “माल के पारगमन आदेश 2026” (Transit of Goods Order 2026) के तहत ग्वादर, कराची और ताफ्तान के रास्ते ईरान के रास्ते से माल भेजने की औपचारिक अनुमति दे दी है. जिसके तहत तीसरे देशों से आने वाला माल पाकिस्तान से होकर ईरान तक पहुंच सकेगा. इस कदम को दक्षिण एशिया और पश्चिम एशिया के बीच व्यापारिक संपर्क को मजबूत करने की दिशा में अहम माना जा रहा है.

पाकिस्तान ने दी ईरान तक व्यापारिक कॉरिडोर खोलने की परमिशन, जानें इसके मायने
पाकिस्तान ने दी ईरान तक व्यापारिक कॉरिडोर खोलने की परमिशन, जानें इसके मायने

अधिसूचना के अनुसार, ग्वादर, कराची और ताफ्तान को प्रमुख पारगमन मार्गों के रूप में चिन्हित किया गया है. विशेष रूप से ग्वादर बंदरगाह की भूमिका को इस आदेश से नई गति मिलने की उम्मीद है. विश्लेषकों का मानना है कि यह पहल पाकिस्तान को एक महत्वपूर्ण ट्रांजिट हब के रूप में स्थापित करने की रणनीति का हिस्सा है. अब देखना ये होगा कि पाक का ये कदम कितना कामयाब होता है. वहीं पाकिस्तान के इस कदम पर अभी तक अमेरिका की तरफ से किसी भी तरह की प्रतिक्रिया नहीं आई है. माना जा रहा है कि अमेरिकी से हरी झंडी मिलने के बाद पाकिस्तान ने “माल के पारगमन आदेश 2026” लागू किया है.

ईरान और अमेरिका के अलावा अन्य देश भी होंगे शामिल

इसी बीच, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक संभावित मेगा डील को लेकर कूटनीतिक हलचल तेज हो गई है. सूत्रों के अनुसार, यह प्रस्तावित समझौता केवल ईरान और अमेरिका के बीच सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसमें रूस, चीन, सऊदी अरब और तुर्की जैसे प्रमुख वैश्विक और क्षेत्रीय खिलाड़ी भी शामिल हो सकते हैं.

पिछले 48 घंटों के दौरान हुई गहन कूटनीतिक वार्ताओं ने संकेत दिया है कि ईरान और अमेरिका के बीच लंबे समय से जारी तनाव को समाप्त करने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं. इसमें पाकिस्तान की संभावित मध्यस्थता की भूमिका अदा कर रहा है.

आधिकारिक तौर पर किसी समझौते की पुष्टि नहीं

विशेषज्ञों के मुताबिक, अगर यह मेगा डील साकार होती है, तो न केवल क्षेत्रीय स्थिरता को मजबूती मिलेगी, बल्कि ऊर्जा, व्यापार और सुरक्षा के क्षेत्र में भी व्यापक प्रभाव देखने को मिल सकता है.

हालांकि, आधिकारिक तौर पर किसी समझौते की पुष्टि अभी नहीं हुई है, लेकिन जिस तरह से कूटनीतिक गतिविधियां तेज हुई हैं, उससे संकेत मिलते हैं कि आने वाले समय में वैश्विक शक्ति संतुलन में महत्वपूर्ण बदलाव संभव हैं.

(इनपुट आशीष शर्मा)

khabarmonkey@gmail.com

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