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अरब में आग लगाकर अफ्रीका की ओर चले दुनिया के दो सुपरपावर, क्या है स्ट्रैटजी?

मिडिल ईस्ट में ईरान-इजराइल युद्ध की वजह से हालात नाजुक हैं. अरब में युद्ध की आग लगाकर दुनिया के दो सुपरपावर चीन और अमेरिका अब अपनी नजदीकी अफ्रीका से बनाने में लगे हुए हैं. जैसा कि पहले की घटनाओं और फैसलों से दुनिया को ये बहुत अच्छी तरह से पता है कि अमेरिका खुद के फायदे के लिए कभी भी किसी भी ओर मुड़ सकता है. अब इस बार अमेरिका ने अफ्रीकी देश इरीट्रिया को चुना है, जिस पर लगे प्रतिबंधों को हटाकर उसका इस्तेमाल करना चाहता है. वहीं चीन, अफ्रीका के साथ अपनी आर्थिक साझेदारी को मजबूत करना चाहता है. आइए जानते हैं दोनों देशों की स्ट्रैटेजी क्या है, अखिर वो अफ्रीका की ओर अपना रुख क्यों मोड़ रहे हैं.

अरब में आग लगाकर अफ्रीका की ओर चले दुनिया के दो सुपरपावर, क्या है स्ट्रैटजी?
अरब में आग लगाकर अफ्रीका की ओर चले दुनिया के दो सुपरपावर, क्या है स्ट्रैटजी?

अमेरिका की स्ट्रैटेजी क्या?

दरअसल, ईरान-इजराइल और अमेरिका से युद्ध की वजह से होर्मुज स्ट्रेट बंद है ऐसे में अमेरिका ने अफ्रीकी देश इरीट्रिया से अपने रिश्ते सुधारने पर फोकस कर रहा है. ऐसा इसलिए क्योंकि इरीट्रिया की सीमा रेड सी 700 मील से ज्यादा है. ये जगह जियोग्राफिकल रूप से काफी अहम है. मौजूदा समय में ईरान के साथ अमेरिका का तनाव चल रहा है. ईरान स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज (तेल का बड़ा रास्ता) को बंद करने की धमकी दे रहा है. इसके अलावा ईरान समर्थित हूती विद्रोही (Yemen में) भी Red Sea और Bab al-Mandeb स्ट्रेट को बंद करने की धमकी दे रहे हैं. ऐसे में अमेरिका चाहता है कि इरिट्रिया जैसे देश के साथ अच्छे रिश्ते बनाकर रेड सी में अपना प्रभाव बढ़ाए और ईरान के खिलाफ अपनी बैकअप स्ट्रैटेजी को मजबूत करे.

चीन की स्ट्रैटेजी क्या?

चीन अपने रणनीति में आर्थिक मजबूती को बढ़ाना चाहता है ऐसे में अफ्रीका की तरफ रुख कर रहा है. चीन अफ्रीका को अपना सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार बनाने की ओर जुटा हुआ है. आंकड़ों पर भी गौर करें तो 2025 में चीन-अफ्रीका व्यापार रिकॉर्ड $348 बिलियन पहुंच गया, जिसमें 17 प्रतिशत से ज्यादा की बढ़त देखी गई है. चीन ने अफ्रीका को सहूलियत देते हुए मई 2026 से 53 अफ्रीकी देशों के सभी उत्पादों पर जीरो टैरिफ लागू करने का फैसला किया है. ये मौका अफ्रीका के लिए भी काफी अहम है क्योंकि इस फैसले के बाद उसका सामान चीनी बाजार में सस्ता होगा, जिससे उसकी डिमांड बढ़ सकती है.

हाल ही में संयुक्त राष्ट्र के अफ्रीका आर्थिक आयोग (UNECA) के अधिकारी मेलाकु गेबोये ने कहा कि दुनिया की पुरानी आर्थिक व्यवस्था (जो लगभग 80 साल से चल रही थी) अब काफी दबाव में आ गई है. पुराने नियम टूट रहे हैं, देश एक-दूसरे के साथ नए सिरे से सोच रहे हैं. ऐसे समय में चीन की खुली नीति अफ्रीका के लिए बहुत जरूरी और सही समय पर आई है.

चीन अपनी सॉफ्ट पावर के लिए दुनिया में जाना जाता है. बड़ी आबादी वाला चीन अपने बाजार जिसमें वो कच्चे माल (तेल, खनिज, कोबाल्ट आदि) की सप्लाई सुरक्षित रखना चाहता है और अपना सामान (मशीनरी, ग्रीन टेक, सोलर) बेचना चाहता है. ऐसे में अफ्रीका से करीबी उसके लिए काफी फायदेमंद बन सकती है.

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