Thursday, February 26, 2026
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पीएम मोदी का इजरायल दौरा और नेतन्याहू का एक बयान, इस्लामिक देशों में मची खलबली

पीएम मोदी का इजरायल दौरा और नेतन्याहू का एक बयान, इस्लामिक देशों में मची खलबली

नई दिल्ली। भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बुधवार को दो दिवसीय दौरे पर इजरायल पहुंच चुके हैं. उनके स्वागत के लिए एयरपोर्ट पर इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू अपनी पत्नी सारा के साथ मौजूद थे. इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य भारत के एक अहम ट्रेड और डिफेंस पार्टनर इजरायल के साथ रणनीतिक रिश्तों को और अधिक मजबूती देना है. पीएम मोदी ने इजरायल रवाना होने से पहले एक बयान में कहा था, ‘हमारे देशों के बीच एक मजबूत और कई तरह की स्ट्रेटेजिक पार्टनरशिप है.’ उन्होंने कहा कि वह अपने समकक्ष बेंजामिन नेतन्याहू से मिलेंगे और इजरायल की पार्लियामेंट कनेस्सेट को संबोधित करेंगे.

पीएम मोदी का इजरायल दौरा ऐसे वक्त में हो रहा है, जब वेस्ट बैंक में इजरायल की गतिविधियों की इस्लामिक देश कड़ी आलोचना कर रहे हैं और मिडिल-ईस्ट में तनाव कायम है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई की धमकी दी है और अगर ऐसा होता है तो मिडिल ईस्ट में एक बड़ा संघर्ष छिड़ने की आशंका है.

प्रधानमंत्री मोदी के इस दौरे की वर्ल्ड मीडिया में खूब चर्चा हो रही है, खासकर इस्लामिक देशों की मीडिया में. पड़ोसी देश पाकिस्तान का मीडिया तो पीएम मोदी के इजरायली दौरे को अपने लिए खतरे की घंटी बता रहा है.

मोदी के इजरायल दौरे से पाकिस्तान को ‘घबराहट’

पाकिस्तान के प्रमुख अखबार ‘Dawn’ ने अपनी वेबसाइट पर एक आर्टिकल में लिखा, भारत और इजरायल के बीच पूर्ण कूटनीतिक संबंध साल 1992 में बने थे. हालांकि 2014 में मोदी के सत्ता संभालने के बाद इस रिश्ते में और गर्मजोशी आई है.

मोदी ने 2017 में प्रधानमंत्री के तौर पर इजरायल का पहला दौरा किया था जिसके अगले साल नेतन्याहू ने भी भारत का दौरा किया. दोनों नेताओं ने एक-दूसरे को दोस्त कहा था.

डॉन ने लिखा है, ‘मई 2025 में जब भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव की स्थिति बनी तो इजरायल की मिलिट्री ड्रोन टेक्नोलॉजी का उपयोग पाकिस्तान के खिलाफ डिफेंस स्ट्रैटजी के रूप में किया गया था.

पाकिस्तानी वेबसाइट ने लिखा, यह व्यापार और तकनीक के क्षेत्र में भारत-इजरायल की साझेदारी को दर्शाता है. लेकिन इजरायल के साथ ही भारत खाड़ी देशों और ईरान के साथ भी मजबूत रिश्ते बनाए हुए है. उदाहरण के लिए भारत ने ईरान का चाबहार पोर्ट डेवलप किया है जो अफगानिस्तान के लिए एक ट्रेड गेटवे है. अफगानिस्तान के तालिबानी अधिकारियों के साथ भी भारत ने रिश्ते कायम किए हैं.’

डॉन ने कांग्रेस पार्टी की सीनियर नेता प्रियंका गांधी के बयान का भी जिक्र किया है. प्रियंका गांधी ने PM मोदी के दौरे को लेकर बुधवार को सोशल मीडिया पर पोस्ट किया था कि उन्हें उम्मीद है कि मोदी इजरायल की संसद को संबोधित करते समय गाजा में हजारों बेगुनाह पुरुषों, महिलाओं और बच्चों की हत्या का जिक्र करेंगे.

नेतन्याहू के बयान को लेकर खूब चर्चा

पाकिस्तानी टीवी चैनल जियो न्यूज के ‘कैपिटल टॉक’ शो में पीएम मोदी के इजरायल दौरे को लेकर हेडलाइन दी गई है- पीएम मोदी का इजरायल दौरा पाकिस्तान के लिए खतरे की घंटी. वहां के मीडिया में सबसे ज्यादा चिंता जताई जा रही है इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के उस बयान को लेकर जिसमें उन्होंने कट्टर शिया और सुन्नी एक्सिस को खतरा बताते हुए भारत, ग्रीस, साइप्रस और कुछ अरब, एशियाई और अफ्रीकी देशों के साथ एक गठजोड़ बनाने की बात कही. पाकिस्तानी संसद में भी इस बयान का विरोध करते हुए मंगलवार शाम को एक प्रस्ताव पारित किया गया है.

क्या है नेतन्याहू का हेक्सागन गठबंधन और उन्होंने क्या कहा था ?

इजरायली पीएम नेतन्याहू ने 22 फरवरी को कैबिनेट बैठक में इस अलायंस का खाका पेश किया. उन्होंने कहा कि हम मिडिल ईस्ट के आसपास या उसके भीतर गठबंधनों की एक पूरी व्यवस्था बनाएंगे. इसमें भारत, अरब देश, अफ्रीकी देश, भूमध्यसागरीय देश (ग्रीस और साइप्रस) और एशिया के कुछ देश शामिल होंगे, जिनका अभी मैं विस्तार से उल्लेख नहीं करूंगा. मैं इसे व्यवस्थित तरीके से पेश करूंगा.

नेतन्याहू ने कहा कि मकसद उन देशों को एक साथ लाना है, जो वास्तविकता, चुनौतियों और लक्ष्यों को लेकर एक समान सोच रखते हों ताकि कट्टरपंथी ताकतों का मुकाबला किया जा सके, फिर चाहे वह कट्टर शिया हो, जिन पर हमने कड़ा हमला किया है या सुन्नी. इन सभी देशों का अलग-अलग दृष्टिकोण है और हमारा सहयोग बड़े परिणाम दे सकता है. इसके साथ ही हमारी स्थिरता और भविष्य को सुरक्षित कर सकता है. यह फ्रेमवर्क सुरक्षा, खुफिया जानकारी के आदान-प्रदान और रक्षा सहयोग को गहरा करने के उद्देश्य से तैयार किया गया है.

पाकिस्तानी एंकर हामिद मीर ने कहा कि ये मामला बहुत नाजुक है क्योंकि चंद दिनों पहले अमेरिका के राजदूत ने एक इंटरव्यू में ‘ग्रेटर इजरायल’ की बात कही थी. इसकी सऊदी अरब, मिस्र और जॉर्डन समेत कई अरब देशों ने कड़ी आलोचना की थी. एक तरफ नेतन्याहू पीएम मोदी का स्वागत कर रहे हैं, दूसरी तरफ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान पर हमले का मंसूबा बनाए हुए हैं. बहुत सारे मामलों पर ये सारे इकट्ठे हो गए हैं. पाकिस्तान के लिए बहुत चिंता वाली स्थिति बन गई है. अफगानिस्तान से पाकिस्तान पर हमले हो रहे हैं और अगर ईरान और अमेरिका की जंग शुरू हो गई तो पाकिस्तान के लिए तो बड़े मुश्किल भरे हालात हो जाएंगे.

इस कैपिटल टॉक शो में शामिल हुईं संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तान की स्थायी प्रतिनिधि रहीं मलीहा लोधी ने कहा कि पाकिस्तान की सीनेट ने पीएम मोदी के इजरायल दौरे से ठीक पहले जो रिजॉल्यूशन पास किया है, वो बहुत जरूरी था. ये गठजोड़ एंटी-मुस्लिम है. नेतन्याहू ने सुन्नी और शिया एक्सिस को लेकर जो बयान दिया, उससे उनके मंसूबे खुलकर सामने आ गए हैं.

पाकिस्तानी एंकर ने ये भी कहा कि पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने गाजा में शांति कायम करने को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नेतृत्व वाले ‘बोर्ड ऑफ पीस’ में जो शिरकत की, पीएम मोदी का इजरायल दौरा उसका जवाब हो सकता है.

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