
दरभंगा: बिहार में ट्रेन को डिरेल करने की बड़ी साजिश रचे जाने की आशंका है। झंझारपुर-निर्मली रेलखंड के तमुरिया रेलवे स्टेशन के पास शनिवार रात दरभंगा-फारबिसगंज मेमू ट्रेन को पलटाने की खतरनाक साजिश रची गई थी। पटरी पर साढ़े तीन मीटर लंबा लोहे का अवरोधक (रेल पटरी का टुकड़ा) मिलने से रेल अधिकारी सकते में हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए डीआरएम द्वारा नियुक्त विशेष टीम, इंटेलिजेंस डिपार्टमेंट और क्राइम ब्रांच के अधिकारियों ने रविवार को घटनास्थल का बारीकी से मुआयना किया। बताया जा रहा है कि साजिश की तह तक जाने के लिए आधा दर्जन टीमें गठित की गई हैं। मामले में पुलिस ने सोमवार शाम तमुरिया के लालू कुमार और पवन कुमार को हिरासत में लिया है।
दोनों से तमुरिया स्टेशन के बंद कमरे में पूछताछ की जा रही है। रविवार को आरपीएफ के समस्तीपुर मंडल के सहायक सुरक्षा आयुक्त राकेश कुमार सिंह ने घटनास्थल का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने स्टेशन अधीक्षक, मेमू ट्रेन के ड्राइवर, गार्ड और लाइनमैन के बयान दर्ज किए। जांच टीम ने पटरी पर रखे गए लोहे के टुकड़े का वजन, उसकी बनावट और उसे वहां तक लाने के संभावित रास्तों की पड़ताल की है। सहायक सुरक्षा आयुक्त ने आरपीएफ पोस्ट पर उपलब्ध मानव बल, संसाधनों और जवानों को होने वाली व्यावहारिक परेशानियों की जानकारी ली।
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उन्होंने स्पष्ट किया कि सुरक्षा के हर पहलू पर चर्चा की गई है। जल्द इस दिशा में ठोस कदम उठाए जाएंगे। वहीं, आरपीएफ प्रभारी अरविंद कुमार ने बताया कि जांच सही दिशा में है। जल्द मामले का खुलासा कर लिया जाएगा। जीआरपी और आरपीएफ की संयुक्त टीमें आसपास के गांवों में उपद्रवियों की तलाश कर रही हैं। पुलिस की नजर विशेष रूप से स्थानीय ताड़ीखानों, गलियों और चौक-चौराहों पर जमने वाले असामाजिक तत्वों पर है। आशंका जताई जा रही है कि किसी स्थानीय गिरोह ने जानबूझकर बड़ी घटना को अंजाम देने के लिए यह अवरोधक रखा था।
समस्तीपुर मंडल के आरपीएफ कमांडेंट आशीष कुमार ने कहा कि दरभंगा रेल थाने में अज्ञात उपद्रवियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है। समस्तीपुर मंडल के निर्देश पर मामले की गहन जांच जारी है। यात्रियों की सुरक्षा से खिलवाड़ करने वालों पर कठोर कार्रवाई की जाएगी।
तमुरिया स्टेशन के पास रेल पटरी पर लोहे का अवरोधक मिलने की घटना में समय का गणित बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। स्टेशन अधीक्षक से मिली जानकारी के अनुसार, शनिवार की रात 8:20 बजे एक मालगाड़ी उस ट्रैक से पूरी तरह सुरक्षित गुजरी थी।
इसका सीधा मतलब है कि उपद्रवियों ने मालगाड़ी के जाने के बाद और मेमू ट्रेन के आने के बीच के महज एक घंटे के भीतर ट्रैक पर लोहे का अवरोधक रखा। रात के 9:17 बजे जब दरभंगा-फारबिसगंज मेमू ट्रेन घटनास्थल पर पहुंची थी, तब तक पटरी पर साढ़े तीन मीटर लंबा लोहे का अवरोधक रख दिया गया था। रेल प्रशासन अब इस एक घंटे के ‘टाइम गैप’ को आधार बनाकर जांच कर रहा है कि उस दौरान इलाके में किन संदिग्धों की गतिविधि देखी गई थी।
शनिवार रात जब ट्रेन तमुरिया स्टेशन की ओर बढ़ रही थी, तभी लोको पायलट की नजर अचानक पटरी के बीच रखे अवरोधक पर पड़ी। चालक ने सूझबूझ का परिचय देते हुए इमरजेंसी ब्रेक लगायी। इससे ट्रेन टकराने से चंद कदम पहले रुक गई और इस तरह बड़ा हादसा टल गया। सूचना के बाद पहुंचे रेलकर्मियों ने काफी मशक्कत के बाद अवरोधक को ट्रैक से हटाया।





