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Elli AvrRam ने खोली फिल्म इंडस्ट्री की हकीकत, वर्क कल्चर से लेकर रोल्स तक उठाए बड़े सवाल

Elli AvrRam Revelation: बॉलीवुड और साउथ फिल्म इंडस्ट्री के बीच काम करने के माहौल को लेकर अक्सर तुलना होती रही है, लेकिन इस बार अभिनेत्री एली अवराम ने अपने अनुभव साझा करते हुए कई चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। उन्होंने इंटरव्यू में बताया कि कैसे कुछ बॉलीवुड सेट्स पर कलाकारों की बुनियादी जरूरतों तक को नजरअंदाज किया जाता है।

Elli AvrRam ने खोली फिल्म इंडस्ट्री की हकीकत, वर्क कल्चर से लेकर रोल्स तक उठाए बड़े सवाल
Elli AvrRam ने खोली फिल्म इंडस्ट्री की हकीकत, वर्क कल्चर से लेकर रोल्स तक उठाए बड़े सवाल

एली अवराम ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि कई बार शूटिंग के दौरान कलाकारों पर इतना दबाव होता है कि उनकी सेहत तक को प्राथमिकता नहीं दी जाती। उन्होंने कहा कि अगर आप खाना खा रहे हैं और अचानक शॉट के लिए बुला लिया जाए, तो आपको तुरंत जाना पड़ता है। कई बार हालात ऐसे होते हैं कि अगर कोई बेहोश भी हो जाए, तब भी शॉट को ज्यादा अहमियत दी जाती है।

साउथ इंडस्ट्री को बताया ज्यादा बेहतर

हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि हर प्रोजेक्ट ऐसा नहीं होता और कुछ टीम्स कलाकारों का पूरा ख्याल रखती हैं। एली ने साउथ फिल्म इंडस्ट्री के कामकाज की तारीफ करते हुए कहा कि वहां का माहौल ज्यादा शांत और सहयोगी होता है। उनके अनुसार, वहां के सेट्स पर लोग एक-दूसरे की जरूरतों को समझते हैं और काम के दौरान संतुलन बनाए रखते हैं।

टाइपकास्टिंग पर भी उठाए सवाल

ने बॉलीवुड में टाइपकास्टिंग की समस्या पर भी खुलकर बात की। उन्होंने कहा कि अगर किसी कलाकार को एक बार ग्लैमरस रोल में देखा जाता है, तो उसे बार-बार उसी तरह के किरदार ऑफर किए जाते हैं। इसके विपरीत, साउथ इंडस्ट्री में महिलाओं को ज्यादा कंटेंट-ड्रिवन और मजबूत भूमिकाएं मिलती हैं। फिल्म मलंग में अपने किरदार को लेकर एली ने बताया कि इंडस्ट्री के कई लोग उन्हें उस रूप में देखकर हैरान रह गए थे।

बड़े सितारों के साथ अनुभव

एली अवराम को एहसास हुआ कि इंडस्ट्री में बनी धारणाएं किसी कलाकार के करियर को सीमित कर सकती हैं। एली ने आमिर खान के साथ काम करने का अनुभव भी साझा किया और उन्हें बेहद विनम्र और जमीन से जुड़ा इंसान बताया। वहीं, से मुलाकात को उन्होंने खास बताया। एली अवराम के इन बयानों ने एक बार फिर फिल्म इंडस्ट्री के कामकाजी माहौल पर सवाल खड़े कर दिए हैं। जहां एक ओर बॉलीवुड पर दबाव और टाइपकास्टिंग के आरोप लगते हैं, वहीं साउथ इंडस्ट्री को बेहतर और संतुलित कार्यसंस्कृति के रूप में देखा जा रहा है।

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