Thursday, April 16, 2026
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दुनिया के सबसे बड़े ईसाई धर्मगुरु पोप शाही मस्जिद में पहुंचे, कहा- शांति दोनों धर्मों की जिम्मेदारी

पोप लियो XIV ने अल्जीयर्स की ग्रैंड मस्जिद का दौरा किया और यहां पर आपसी सम्मान और शांति स्थापना का आह्वान किया.यहां पर उन्होंने गोल्डन बुक पर साइन किया और बड़ी मस्जिद में खुले तौर पर वेटिकन-इस्लाम का महा-गठबंधन बनाया. यानी दोनों धर्मों (मुस्लिम और ईसाई) के लोग पोप आपस में मिलजुलकर रहें. साथ ही शांति और सहयोग पर जोर दें. लियो ने अफ्रीका के अल्जीयर्स की ग्रैंड मस्जिद के दौरे से अपनी धर्म-यात्रा की शुरुआत की. यहां पर उन्होंने इस स्थल के आध्यात्मिक महत्व को दुनिया के समाने लाया. पोप ने कुछ देर मौन रहकर ध्यान में भी समय बिताया.

दुनिया के सबसे बड़े ईसाई धर्मगुरु पोप शाही मस्जिद में पहुंचे, कहा- शांति दोनों धर्मों की जिम्मेदारी
दुनिया के सबसे बड़े ईसाई धर्मगुरु पोप शाही मस्जिद में पहुंचे, कहा- शांति दोनों धर्मों की जिम्मेदारी

मस्जिद के रेक्टर, मोहम्मद मामून अल कासिम ने उनका स्वागत किया और भाईचारे से भरे शब्द कहे. इस पर पोप ने कहा कि मैं इस दौरे के दौरान आपके इन विचारों और इन महत्वपूर्ण शब्दों के लिए आपका धन्यवाद करता हूं. उन्होंने कहा कि ये एक ऐसा स्थान है, जो ईश्वर के स्थान का प्रतिनिधित्व करता है. एक दिव्य और पवित्र स्थान है. यहां अनेक लोग आकर प्रार्थना करते हैं. साथ ही वो अपने जीवन में ‘परमेश्वर’ की उपस्थिति का अनुभव करने आते हैं.

‘हर मनुष्य की गरिमा को पहचानना जरूरी है’

पोप लियो ने हिप्पो के ऑगस्टीन के माध्यम से इस देश के साथ अपने व्यक्तिगत जुड़ाव को भी याद किया. पोप ने अल्जीरिया को कहा कि ये मेरे आध्यात्मिक पिता की भूमि है. उन्होंने अपने संबोधन के मुख्य विषयों पर भी बात की. उन्होंने सत्य की खोज, हर मनुष्य की गरिमा को पहचानना और शांति स्थापित करने की साझा जिम्मेदारी बताया. उन्होंने कहा कि ईश्वर की खोज का अर्थ यह भी है कि हम प्रत्येक पुरुष और महिला में ईश्वर के स्वरूप को पहचानें. उन्होंने कहा कि ऐसी पहचान के लिए आपसी सम्मान और सह-अस्तित्व की आवश्यकता होती है.

पोप ने मस्जिद परिसर के दोहरे उद्देश्य की ओर भी संकेत किया. उन्होंने धार्मिक और बौद्धिक स्तर पर इस बदलाव की बात की. उन्होंने इस बात के महत्व पर जोर दिया कि सृष्टि और मानव-गरिमा को बेहतर ढंग से समझने के लिए मानवीय ज्ञान का विकास आवश्यक है.

अपने संबोधन में उन्होंने अल्जीरिया के लोगों और समस्त राष्ट्रों के लिए प्रार्थना करने का आश्वासन दिया. उन्होंने जाहिर की है कि विभिन्न लोगों के बीच शांति, न्याय, मेल-मिलाप और क्षमा की भावना का विकास आने वाले समय में होगा.

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