Thursday, April 16, 2026
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हाफिज के साथ लश्कर-ए-तैयबा बनाने वाले हमजा पर हमला, जिंदगी और मौत के बीच लटका

हाफिज सईद के करीबी और आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा के संस्थापक सदस्यों में से एक आतंकी अमीर हमजा को में गोली मार दी गई है. लाहौर में एक निजी न्यूज़ चैनल के बाहर अज्ञात हमलावर ने हमजा को निशाना बनाया. हमजा को बेहद गंभीर हालत में लाहौर के एक अस्पताल में भर्ती कराया गया है. उसकी हालत नाजुक बनी हुई है. हमजा जिंदगी और मौत के बीच झूल रहा है.

हाफिज के साथ लश्कर-ए-तैयबा बनाने वाले हमजा पर हमला, जिंदगी और मौत के बीच लटका
हाफिज के साथ लश्कर-ए-तैयबा बनाने वाले हमजा पर हमला, जिंदगी और मौत के बीच लटका

अमीर हमजा ने आतंकी हाफिज सईद के साथ मिलकर 1987 में लश्कर-ए-तैयबा नामक आतंकी संगठन की स्थापना की थी. भारत में कई आतंकी हमलों में अमीर हमजा की भूमिका रही है. साल 2018 में हमजा ने खुद का संगठन भी बनाया था. इस संगठन का नाम जैश-ए-मनकाफा रखा गया था.

कौन है आतंकी अमीर हमजा?

66 साल के हमजा का जन्म पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के शेखपुरा में हुआ था. हमजा ने मदरसे से आलिम की डिग्री हासिल की. इसके बाद वो आतंक की राह पर चला गया.

आतंकी अमीर हमजा लश्कर में एक वक्त में नंबर 2 की हैसियत रखता था. हमजा का मूल काम अपनी तकरीरों से आतंकियों को तैयार करना था. अमेरिका वित्त विभाग ने साल 2012 में हमजा को आतंकी घोषित किया था. हमजा को अमेरिका के लिए खतरा बताया गया था.

हमजा के बारे में ज्यादा जानकारी तो नहीं है, लेकिन कहा जाता है कि 1979 में हमजा ने आतंक की राह पकड़ी थी. उस वक्त अफगान लड़ाकों के साथ हमजा सोवियत यूनियन के खिलाफ लड़ाई में शामिल हुआ. सोवियत की लड़ाई खत्म होने के बाद हमजा को जम्मू कश्मीर में आतंक फैलान का काम मिला.

2018 में पैसों को लेकर हमजा का रिश्ता हाफिज सईद से खराब हो गया. इसके बाद से ही वो अलग-थलग चल रहा है. हमजा आतंक और उग्रवाद पर कम से कम 8 किताब लिख चुका है. अधिकांश किताबों को लश्कर ए तैयबा के प्रकाशन से पब्लिश्ड किया गया है.

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