मिडिल ईस्ट में तनाव के बीच सऊदी अरब की सुरक्षा को मजबूत करने के लिए पाकिस्तान ने एक बड़ा कदम उठाया है. पाकिस्तान ने सऊदी अरब में करीब 13 हजार से ज्यादा सैनिक तैनात किए हैं. बताया जा रहा है कि पाकिस्तान ने अपनी 25वीं मेकनाइज्ड डिविजन (चार्जिंग बुल डिविजन) के चलते सऊदी अरब के यमन बॉर्डर पर सेना को तैनात किया है.

यह डिविजन कराची के मलिर कैंटोनमेंट में स्थित है और आमतौर पर भारत के खिलाफ रेगिस्तानी इलाकों में ऑपरेशन के लिए तैयार की गई है. अब इसे सऊदी अरब में दक्षिणी सीमा की सुरक्षा के लिए भेजा गया है. सूत्रों के मुताबिक, इस तैनाती का मुख्य उद्देश्य यमन से होने वाले संभावित हमलों, खासकर हूती विद्रोहियों की घुसपैठ को रोकना है. इससे साफ है कि यह कदम ईरान की दिशा में नहीं, बल्कि यमन फ्रंट पर खतरे को ध्यान में रखकर उठाया गया है. वहीं सऊदी में करीब 10 हजार पाकिस्तानी सैनिक पहले से तैनात हैं.
पूरी एक स्पेशलाइज्ड मेकनाइज्ड डिविजन तैनात
हालांकि इस डिविजन के बाहर जाने से पाकिस्तान के कराची कॉर्प्स की ताकत में अस्थायी कमी आ सकती है, लेकिन पाकिस्तान के पास अन्य आर्मर्ड और मेकनाइज्ड यूनिट्स हैं जो इस कमी को पूरा कर सकते हैं. यह तैनाती इसलिए भी खास है क्योंकि अब तक पाकिस्तान सऊदी अरब में एयर फोर्स, ड्रोन और सपोर्ट यूनिट्स भेज चुका था, लेकिन पहली बार पूरी की पूरी एक स्पेशलाइज्ड मेकनाइज्ड डिविजन तैनात की गई है. पाकिस्तान और सऊदी अरब के बीच स्ट्रैटेजिक म्यूचुअल डिफेंस एग्रीमेंट के तहत यह कदम दोनों देशों के बीच सैन्य सहयोग और साझा सुरक्षा को और मजबूत करने की दिशा में बड़ा संकेत माना जा रहा है.
18 फाइटर जेट और सपोर्ट एयरक्राफ्ट भी भेजे
पाकिस्तान ने 10 से 18 फाइटर जेट और सपोर्ट एयरक्राफ्ट भी भेजे हैं. एक पाकिस्तानी अधिकारी ने बताया कि यह दोनों देशों के बीच सैन्य सहयोग बढ़ाने के लिए किया गया है. इसका मकसद है कि दोनों देशों की सेनाएं बेहतर तरीके से साथ काम कर सकें और इलाके में सुरक्षा मजबूत हो. 1991 के गल्फ वॉर में भी पाकिस्तान ने सैनिक भेजे थे.





