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इधर गड्ढा उधर खाई…स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में अब दोनों तरफ से आफत आई, अब कौन खोलेगा रास्ता?

इस्लामाबाद में वार्ता फेल होने के बाद अमेरिका ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को पूरी तरह से बंद करने की घोषणा की है. इसके लिए अमेरिका ओमान की खाड़ी में अपने पनडुब्बी और जंगी जहाजों की तैनाती करेगा. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का कहना है कि किसी भी कीमत पर ईरान को होर्मुज से पैसा कमाने नहीं दिया जाएगा. जंग के दौरान अब तक ईरान टोल लेकर मालवाहक जहाजों को इस रास्ते से गुजरने दे रहा था.

इधर गड्ढा उधर खाई…स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में अब दोनों तरफ से आफत आई, अब कौन खोलेगा रास्ता?
इधर गड्ढा उधर खाई…स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में अब दोनों तरफ से आफत आई, अब कौन खोलेगा रास्ता?

अमेरिका के इस एक्शन से हो गई है. एक भी जहाज अब इस रास्ते से नहीं गुजर सकता है. ऐसे में सवाल उठ रहा है कि इस रास्ते को अब कौन खोल सकता है? क्योंकि, पिछले 45 दिन से यह रास्ता बंद है.

इधर गड्ढा, उधर खाई जैसा मामला

एक तरफ ईरान सिर्फ उन्हीं देशों के जहाज को होर्मुज से निकलने दे रहा है, जिस देश से उसकी बातचीत है और वो टोल देने में सक्षम है. इसके कारण होर्मुज में पहले से 650 से ज्यादा मालवाहक जहाज फंसे हुए हैं. अब अमेरिका ने होर्मुज से पार होते ही जहाजों को मार गिराने की घोषणा की है.

यानी मिडिल ईस्ट के इस रास्ते में एक तरफ गड्ढा है और दूसरी तरफ खाई. ऐसे में जब तक ईरान और अमेरिका के बीच पूर्ण रूप से संधि नहीं होता है. तब तक इस रास्ते से जहाज का गुजरना आसान नहीं है.

बड़ा सवाल- दोनों में संधि कराएगा कौन?

इस्लामाबाद में शांति वार्ता के विफल होने के बाद सवाल उठ रहा है कि ईरान और अमेरिका के बीच शांति वार्ता कराएगा कौन? क्योंकि, दोनों के बीच की जो खाई है, वो काफी गहरी है. इस्लामाबाद में अमेरिका के उप राष्ट्रपति जेडी वेंस वार्ता के किसी बिंदु तक नहीं पहुंच सके, जिसके बाद अमेरिका ने इस वार्ता से खुद को अलग कर लिया था. हालांकि, शांति समझौते की नई कवायद फिर से शुरू हुई है. यह कवायद तीन स्तरों पर चल रही है.

1. रूस ने ईरान और अमेरिका के बीच समझौता कराने की पहल की है. राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने ईरान के राष्ट्रपति मसूद पजेशकियन से फोन पर बात की है. अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप से भी पुतिन के अच्छे संबंध हैं. पुतिन अगर इस डील में खुद को शामिल करते हैं तो बात बन सकती है. क्योंकि, ईरान को रूस का करीबी देश माना जाता है.

2. तुर्की ने नए सिरे से बैकडोर चैनल के जरिए बातचीत शुरू की है. तुर्की के विदेश मंत्री हक्कान फिदान ने पाकिस्तान के विदेश मंत्री को फोन पर बात की है. तुर्की चाहता है कि अमेरिका ने जो प्रस्ताव ईरान को दिया है, उसका जवाब ईरान दे, जिससे दूसरे दौर की वार्ता शुरू हो सके.

3. लेबनान ने इजराइल से खुद ही बातचीत शुरू की है. 1983 के बाद यह पहरी बार है जब इजराइल और लेबनान के बीच सीधी बातचीत हुई है. वाशिंगटन में लेबनान की दूत नादा मोआद ने इजराइली राजदूत से फोन पर बात की है. लेबनान और इजराइल में कोई सफल समझौता हो जाता है तो ईरान-अमेरिका के बीच संधि होने की संभावनाएं बढ़ जाएगी.

4. फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने एक बयान में कहा कि फ्रांस में सीजफायर की प्रक्रिया में शामिल हो सकता है. मिडिल ईस्ट में शांति जरूरी है. इसके लिए होर्मुज का खुलना जरूरी है. मैक्रों ने आगे कहा कि हम ब्रिटेन के साथ होर्मुज की नाकाबांदी को लेकर बात करेंगे. इसके बाद और भी देशों को इसमें जोड़ा जाएगा. मैक्रों ने लेबनान की स्वतंत्रता की भी बात कही है.

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