दक्षिण चीन सागर में एक नया विवाद सामने आया है. फिलीपींस ने दावा किया है कि चीनी नावों से जहरीला केमिकल सायनाइड मिला है. यह जांच पिछले साल सेकंड थॉमस शोल के पास की गई थी. इस जगह को फिलीपींस आयुंगिन शोल कहता है. फिलीपींस नौसेना ने वहां कार्रवाई के दौरान कुछ बोतलें जब्त की थीं, जिनकी लैब जांच में अब सायनाइड की पुष्टि हुई है.

फिलीपींस के अधिकारियों ने कहा है कि सायनाइड का इस्तेमाल समुद्री जीवन के लिए बहुत खतरनाक है. इससे मछलियां मर सकती हैं और कोरल रीफ को नुकसान हो सकता है. यह वही रीफ है, जिस पर फिलीपींस ने अपना एक पुराना युद्धपोत खड़ा कर रखा है, ताकि वह इस इलाके पर अपना दावा मजबूत कर सके.
फिलीपींस ने साजिश का आरोप लगाया
फिलीपींस का कहना है कि सायनाइड का इस्तेमाल एक तरह की साजिश हो सकती है, जिसका मकसद मछलियों को खत्म करना और वहां तैनात नौसैनिकों के फूड सोर्स को कमजोर करना है. फिलीपींस के नेवी अधिकारियों का कहना है कि इससे रीफ कमजोर हो सकता है और उस पर खड़े युद्धपोत की स्थिति भी खतरे में पड़ सकती है. हालांकि इस मामले पर फिलीपींस में मौजूद चीनी दूतावास ने अभी तक कोई जवाब नहीं दिया है.
2 साल पहले झड़प हुई थी
दोनों देशों के बीच पहले से ही तनाव बढ़ा हुआ है. फिलीपींस का आरोप है कि चीन उसके सैनिकों तक सामान पहुंचाने में बाधा डालता है. 17 जून 2024 को ऐसी ही एक घटना हिंसक हो गई थी, जिसमें एक फिलीपीन नाविक की उंगली कट गई थी. चीन इन आरोपों से इनकार करता है और कहता है कि फिलीपींस उसके समुद्री क्षेत्र में घुसपैठ कर रहा है. हालांकि बाद में दोनों देशों के बीच एक अस्थायी समझौता हुआ, जिससे उस जहाज तक जरूरी सामान पहुंचाना जारी रखा जा सके.
फिलीपींस-चीन के बीच सहयोग पर बात
हाल ही में दोनों देशों के बीच तेल और गैस सहयोग को लेकर बातचीत भी हुई है. इसमें समुद्र में भरोसा बढ़ाने और कोस्ट गार्ड के बीच बेहतर संपर्क बनाने की बात हुई. फिलीपींस ने साफ कहा है कि यह सहयोग सीमित रहेगा और संवेदनशील इलाकों में नहीं होगा.
दक्षिण चीन सागर पर चीन लगभग पूरा दावा करता है, जबकि ब्रुनेई, मलेशिया, फिलीपींस और वियतनाम भी इस पर अपना अधिकार जताते हैं. 2016 में अंतरराष्ट्रीय अदालत ने चीन के दावे को गलत बताया था, लेकिन चीन इस फैसले को नहीं मानता.





