Gurudwara Style Kada Prasad: बैसाखी का त्योहार कड़ा प्रसाद की मिठास के बिना अधूरा माना जाता है। गुरुद्वारे में मिलने वाले उस दिव्य और घी से लथपथ प्रसाद का स्वाद हर किसी को मंत्रमुग्ध कर देता है। अगर आप भी इस बैसाखी वही रूहानी स्वाद अपने घर की रसोई में पाना चाहते हैं तो यह खास रेसिपी आपके लिए है।

बैसाखी और कड़ा प्रसाद
खुशियों और नई फसल के स्वागत का प्रतीक है। इस दिन गुरुद्वारों में विशेष अरदास होती है और संगत को कड़ा प्रसाद बांटा जाता है। कड़ा प्रसाद केवल एक मिठाई नहीं बल्कि गुरु की कृपा का प्रतीक है। इसे बनाने की विधि जितनी सरल है इसका महत्व उतना ही गहरा है।
का असली राज इसके सही अनुपात में छिपा है। इसे बनाने के लिए हमेशा 1:1:1:3 का अनुपात याद रखें। यानी जितना आटा, उतनी ही चीनी और उतना ही घी, जबकि पानी की मात्रा आटे से तीन गुना होनी चाहिए।
सामग्री
- 1 कप गेहूं का मोटा आटा
- 1 कप देसी घी
- 1 कप चीनी (या स्वादानुसार)
- 3 कप पानी
बैसाखी (सौ. एआई)
स्टेप-बाय-स्टेप रेसिपी
- सबसे पहले एक बर्तन में 3 कप पानी और 1 कप चीनी डालकर गर्म करें। इसे तब तक उबालें जब तक चीनी पूरी तरह घुल न जाए। ध्यान रहे, हमें तार वाली चाशनी नहीं बनानी है, बस चीनी का घोल तैयार करना है।
- अब एक भारी तले वाली कड़ाही में देसी घी डालें। घी गर्म होने पर इसमें गेहूं का आटा डालें और धीमी आंच पर भूनना शुरू करें।
- आटे को तब तक भूनें जब तक कि वह गहरा सुनहरा (Golden Brown) न हो जाए और घी अलग न होने लगे। इस दौरान पूरे घर में भुने हुए आटे और घी की सोंधी खुशबू आने लगेगी।
- जब आटा अच्छी तरह भून जाए, तो तैयार चीनी वाला पानी धीरे-धीरे कड़ाही में डालें। इस समय कड़छी को लगातार चलाते रहें ताकि गांठें न पड़ें।
- मिश्रण को तब तक चलाएं जब तक वह गाढ़ा न हो जाए और कड़ाही के किनारों को न छोड़ने लगे। जब हलवा पूरी तरह चिकना और चमकदार दिखने लगे, तो समझ लीजिए आपका ‘कड़ा प्रसाद’ तैयार है।
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खास टिप्स
- हमेशा मोटे आटे का प्रयोग करें इससे प्रसाद दानेदार बनता है।
- पूरे प्रोसेस के दौरान आंच को धीमा या मध्यम ही रखें तेज आंच पर आटा जल सकता है और स्वाद कड़वा हो जाएगा।
- लोहे की कड़ाही में बनाने से इसका रंग और स्वाद दोनों ही लाजवाब आते हैं।





