ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान ने संकेत दिया है कि तेहरान अमेरिका के साथ किसी समझौते पर पहुंचने के लिए तैयार है. उन्होंने कहा कि समाधान के लिए वाशिंगटन को अपनी तानाशाही छोड़नी होगी और ईरानी लोगों के अधिकारों का सम्मान करना होगा. राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, अगर अमेरिकी सरकार अपनी तानाशाही छोड़ दे और ईरानी राष्ट्र के अधिकारों का सम्मान करे, तो समझौते तक पहुंचने के रास्ते जरूर मिल जाएंगे. इसके साथ ही, राष्ट्रपति ने ईरानी संसद के स्पीकर गालिबाफ की प्रशंसा की.

पेजेशकियान ने ‘एक्स’ पोस्ट में लिखा कि मैं बातचीत करने वाली टीम के सदस्यों, खासकर अपने भाई डॉ. गालिबाफ की सराहना करता हूं और कहता हूं कि ईश्वर आपको शक्ति दे. ये टिप्पणी इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच घंटों चली वार्ता के बेनतीजा रहने के बाद आई. अमेरिका और ईरान की यह वार्ता रविवार को हुई. अमेरिकी डेलीगेशन का नेतृत्व उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने किया, जबकि ईरान की ओर से गालिबाफ ने डेलीगेशन की कमान संभाली. कई घंटों तक चली बातचीत बाद में बिना किसी निष्कर्ष के समाप्त हुई.
अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने कहा कि विस्तृत चर्चा के बावजूद कोई समझौता नहीं हो सका. उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल बिना किसी समझौते के वापस लौटेगा, लेकिन यह स्थिति अमेरिका की तुलना में ईरान के लिए अधिक नुकसानदेह है. वहीं, गालिबाफ ने दावा किया कि इस बेनतीजा वार्ता में अमेरिका नाकाम रहा है.
गालिबाफ ने ‘एक्स’ पर बताया कि बातचीत शुरू होने से पहले ही उन्होंने स्पष्ट कर दिया था कि ईरान की ओर से नीयत और इच्छा दोनों मौजूद हैं, लेकिन पिछले दो युद्धों के अनुभवों की वजह से उन्हें भरोसा नहीं है. उन्होंने कहा, विरोधी पक्ष इस दौर की बातचीत में ईरानी प्रतिनिधिमंडल मिनाब 168 का भरोसा जीतने में आखिरकार नाकाम रहा.





