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मैं उस कमरे में नहीं जाऊंगी… जब आर डी बर्मन ने छोड़ी थी दुनिया, उन्हें देखने नहीं गई थीं आशा भोसले, क्या थी वजह?

Asha Bhosle R D Burman: जब संगीत की दुनिया में प्यार, दर्द और रिश्तों की बात होती है, तो आशा भोसले और आर डी बर्मन की कहानी सबसे इमोशनल चैप्टर में गिनी जाती है. दोनों ने साथ मिलकर हिंदी फिल्म संगीत को अनगिनत यादगार धुनें दीं, लेकिन उनके रिश्ते की गहराई का अंदाजा उस घटना से लगता है, जब पंचम दा के निधन के बाद आशा ताई ने उनके कमरे में जाने से साफ इनकार कर दिया था. ये सिर्फ एक पल नहीं था, बल्कि उस प्रेम का सबूत था, जिसमें बिछड़ने की सच्चाई को स्वीकार करना उनके लिए बेहद मुश्किल हो गया था.

मैं उस कमरे में नहीं जाऊंगी… जब आर डी बर्मन ने छोड़ी थी दुनिया, उन्हें देखने नहीं गई थीं आशा भोसले, क्या थी वजह?
मैं उस कमरे में नहीं जाऊंगी… जब आर डी बर्मन ने छोड़ी थी दुनिया, उन्हें देखने नहीं गई थीं आशा भोसले, क्या थी वजह?

12 अप्रैल को सुरों की धनी ने दुनिया को अलविदा कह दिया. देशभर के लोग अभी भी इस खबर को सच नहीं मान पा रहे हैं कि संगीत का एक युग अब यादों में सिमट के रह गया है. आशा भोसले के निधन के बाद से उनकी पर्सनल लाइफ से लेकर प्रोफेशनल लाइफ तक के कई खुलासे सामने आ रहे हैं. जिसमें से एक वो भी किस्सा है, जब आर डी बर्मन का निधन हुआ था और ताई ने उनके कमरे में ही जाने से मना कर दिया था.

कमरे में न जाने की क्या था वजह?

दरअसल, साल 1994 में जब आर डी बर्मन ने दुनिया को अलविदा कहा, तो आशा भोसले पूरी तरह टूट गई थीं. उस वक्त उनके करीबी लोगों ने उन्हें अंतिम बार देखने के लिए कमरे में चलने को कहा, लेकिन उन्होंने कदम पीछे खींच लिए. बताया जाता है कि उन्होंने इमोशनल होकर कहा था, ‘मैं उस कमरे में नहीं जाऊंगी, मैं उसे मरा हुआ नहीं देख सकती, मैं उसे जिंदा देखना चाहती हूं.’ यही वजह थी कि उन्होंने उस कमरे में जाने से मना कर दिया, जहां पंचम दा ने आखिरी सांस ली थी.

1980 में हुई थी दोनों की शादी

आशा भोसले और आर डी बर्मन की शादी साल 1980 में हुई थी और इसके बाद दोनों का साथ सिर्फ निजी जीवन तक सीमित नहीं रहा, बल्कि संगीत में भी ये जोड़ी कमाल करती रही. कहा जाता है कि पंचम दा के करियर के मुश्किल दौर में भी आशा ताई उनके साथ मजबूती से खड़ी रहीं और उन्हें लगातार इंस्पायर करती रहीं. ऐसे में अचानक उनका जाना आशा भोसले के लिए एक ऐसा झटका था, जिसे स्वीकार करना उनके लिए आसान नहीं था.

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