Entertainment

Tribute To Asha Bhosle: मुंबई से 350 KM दूर इस छोटे से गांव से आशा भोसले का क्या था खास कनेक्शन?

Legendary Singer Asha Bhosle Death: संगीत की दुनिया की एक जादुई आवाज आज हमेशा के लिए खामोश हो गई. स्वर कोकिला लता मंगेशकर की छोटी बहन और दिग्गज गायिका आशा भोसले का रविवार को 92 वर्ष की आयु में निधन हो गया. मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्पताल में उन्होंने अंतिम सांस ली. कार्डियक अरेस्ट के बाद उन्हें शनिवार को भर्ती कराया गया था. आशा ताई का जाना भारतीय संगीत के एक सुनहरे युग का अंत है. आशा भोसले का जीवन जितना सुरों से सजा था, उतना ही संघर्षों की आग में तपकर निखरा था. उनका सांगली के एक छोटे से गांव से खास रिश्ता रहा है.

Tribute To Asha Bhosle: मुंबई से 350 KM दूर इस छोटे से गांव से आशा भोसले का क्या था खास कनेक्शन?
Tribute To Asha Bhosle: मुंबई से 350 KM दूर इस छोटे से गांव से आशा भोसले का क्या था खास कनेक्शन?

आशा का जन्म सांगली स्थित गोआर में संगीतज्ञ दीनानाथ मंगेशकर के घर हुआ था. बचपन में वो अपनी बड़ी बहन लता के पीछे साये की तरह चलती थीं. लेकिन जब आशा महज 9 साल की थीं, तब उनके पिता का निधन हो गया. इसके बाद पूरा मंगेशकर परिवार दाने-दाने को मोहताज हो गया. 1945 में परिवार पुणे और कोल्हापुर से होते हुए बॉम्बे (मुंबई) आ गया. जहां 14 साल की लता ने परिवार संभाला, वहीं नन्हीं आशा भी संघर्ष के पथ पर निकल पड़ीं.

लता की परछाई से बाहर निकलने की जिद

आशा भोसले के सामने सबसे बड़ी चुनौती अपनी अलग पहचान बनाना थी. उस दौर में लता मंगेशकर सफलता के शिखर पर थीं. आशा को अक्सर बी-ग्रेड फिल्में या वे गाने मिलते थे जिन्हें बड़ी गायिकाओं ने ठुकरा दिया होता था. उनकी ‘मराठी मिश्रित हिंदी’ को लेकर भी सवाल उठे, लेकिन आशा ने हार नहीं मानी. 16 साल की उम्र में गणपतराव भोसले से शादी कर उन्होंने परिवार से दूरी बना ली थी, जिससे उनकी मुश्किलें और बढ़ गईं. इसके बाद, उन्होंने 1980 में मशहूर संगीतकार आर.डी. बर्मन (पंचम दा) से दूसरी शादी की, जो उनके निधन तक चली.

हर रंग में ढलने वाली आवाज

ओ.पी. नैयर और एस.डी. बर्मन के साथ उनकी जोड़ी ने संगीत जगत में तहलका मचा दिया. नया दौर के चुलबुले गीतों से लेकर उमराव जान की संजीदा गजलों तक, आशा ने साबित किया कि उनकी आवाज का विस्तार असीमित है. जब रंगीला में उन्होंने 60 के दशक के पार तन्हा-तन्हा गाया, तो दुनिया उनकी जादुई ऊर्जा देखकर दंग रह गई.

आज वह आवाज भले ही शांत हो गई हो, लेकिन ‘दिल चीज क्या है’ और ‘दम मारो दम’ जैसे अमर नगमे हमेशा फिजाओं में गूंजते रहेंगे. सुरों की यह जिद और संघर्ष की यह कहानी भारतीय सिनेमा के इतिहास में स्वर्णाक्षरों में दर्ज रहेगी.

khabarmonkey@gmail.com

Leave a Reply