पाकिस्तान को अपने आर्थिक संकट से निपटने के लिए बड़ी राहत मिलने वाली है. सऊदी अरब और कतर ने पाकिस्तान को 5 अरब डॉलर (करीब 46.5 हजार करोड़ रुपये)) की आर्थिक मदद देने का भरोसा दिया है. इस मदद से पाकिस्तान को अपने कमजोर विदेशी मुद्रा भंडारपर दबाव कम करने और जून तक बाहरी भुगतान करने में सहूलियत मिलेगी. कई रिपोर्ट्स में ये भी कहा जा रहा है कि सऊदी-कतर ने पाकिस्तान को यह मदद अमेरिका-ईरान के बीच शांति वार्ता कराने के बदले दी है.

यह सहायता ऐसे समय मिल रही है, जब पाकिस्तान को इस महीने के अंत तक यूएई को 3.5 अरब डॉलर (करीब 32.6 हजार करोड़ रुपये)) का कर्ज चुकाना है. मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और महंगे आयात के कारण पाकिस्तान की आर्थिक स्थिति पर दबाव बढ़ता जा रहा है. ईरान जंग के बीच UAE ने पाकिस्तान पर अपना पैसा वापस लौटाने का दबाव बढ़ा दिया है.
यूएई से 8 साल पहले कर्ज लिया था
दरअसल, साल 2018 में UAE ने पाकिस्तान को दो बिलियन डॉलर का लोन दिया था. स्टेट बैंक ऑफ पाकिस्तान के मुताबिक UAE हर साल इस लोन पर 130 मिलियन डॉलर का ब्याज लेता था. बाद में UAE ने ब्याज दर 3 फीसद से बढ़ाकर 6.5 फीसद कर दी. अब ईरान से जंग शुरू होने के बाद UAE ने पाकिस्तान से अपना कर्ज तुरंत लौटाने को कहा है. ने पाकिस्तान को 17 अप्रैल तक दो बिलियन डॉलर की रकम वापस करने की चेतावनी दी है.
सऊदी के वित्त मंत्री का पाकिस्तान दौरा
सऊदी अरब के वित्त मंत्री मोहम्मद बिन ने शुक्रवार इस्लामाबाद में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ से मुलाकात की थी. इस बैठक में विदेश मंत्री इशाक डार और सेना प्रमुख आसिम मुनीर भी शामिल हुए. बैठक में आर्थिक सहयोग और क्षेत्रीय हालात पर चर्चा हुई. साथ ही सऊदी अरब और यूएई के बीच चल रहे तनाव को लेकर भी बात हुई.
पाकिस्तान ने सऊदी अरब से और मदद की भी मांग की है. इसमें पहले से जमा पैसों को बढ़ाने और तेल खरीदने के लिए मिलने वाली वित्तीय सुविधा की अवधि बढ़ाने की बात शामिल है, जो जल्द खत्म होने वाली है. हालांकि इस बैठक में कोई आधिकारिक समझौता नहीं हुआ, लेकिन दोनों देशों के बीच इस पर बातचीत पहले से चल रही है.
पाकिस्तान को इस पैसे से क्या फायदा होगा?
पाकिस्तान के विदेशी मुद्रा भंडार पर लगातार दबाव बना हुआ है, क्योंकि आयात पर खर्च बढ़ रहा है. अधिकारियों का कहना है कि अगर नई आर्थिक मदद नहीं मिली, तो आने वाले हफ्तों में यह भंडार और घट सकता है. सूत्रों के मुताबिक, सऊदी अरब और कतर की यह 5 अरब डॉलर की मदद पाकिस्तान के लिए बहुत अहम साबित होगी. फिलहाल देश के विदेशी मुद्रा भंडार करीब 16.4 अरब डॉलर हैं. यह सहायता पाकिस्तान को कर्ज चुकाने और अपनी आर्थिक स्थिति को संभालने में बड़ी मदद दे सकती है.





