अमेरिका और ईरान के बीच क्या फिर से जंग शुरू होगी… ये सवाल इसलिए उठ रहा है क्यों कि दोनों देशों के बीच इस्लामाबाद में चल रही शांति वार्ता बिना किसी नतीजे के फेल हो गई, बातचीत अपने अंजाम तक नहीं पहुंच सकी. अमेरिकी उपराष्ट्रपति ने कहा है कि ईरान ने वाशिंगटन की शर्तों को मानने से इनकार दिया है. आखिर क्या वजह थी, वो कौन सी शर्त थी जो तेहरान को मंजूर नहीं थी, चलिए आपको बताते हैं.

अमेरिका की नजर शुरू से ही ईरान के परमाणु हथियार पर थी, ये बात किसी से छिपी नहीं है. अमेरिका की एक ही चाहत है कि किसी भी तरह ईरान परमाणु हथियार विकसित न कर पाए, और यही एक वजह इस शांति वार्ता के फेल होने की असल वजह बनी है.
बातचीत का मुख्य उद्देश्य
अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने साफ कहा है कि इस बातचीत का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि ईरान भविष्य में परमाणु हथियार विकसित न करे. रविवार (12 अप्रैल) को इस्लामाबाद में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में वेंस ने कहा कि अमेरिका ईरान से एक स्पष्ट और ठोस आश्वासन चाहता है कि वह न तो परमाणु हथियार बनाएगा और न ही ऐसे संसाधन जुटाएगा, जिससे वह तेजी से परमाणु हथियार विकसित कर सके.
#WATCH | US-Iran peace talks | Islamabad, Pakistan: US Vice President JD Vance says, “…The simple fact is that we need to see an affirmative commitment that they (Iran) will not seek a nuclear weapon and they will not seek the tools that would enable them to quickly achieve a pic.twitter.com/elS9Q0xPz4
— ANI (@ANI) April 12, 2026
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‘परमाणु संवर्धन केंद्र नष्ट कर दिए’
उन्होंने आगे कहा कि यही अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का मुख्य लक्ष्य है और इसी दिशा में बातचीत की. उन्होंने कहा यह भी दावा किया कि ईरान के जो परमाणु संवर्धन (एनरिचमेंट) केंद्र पहले मौजूद थे, उन्हें काफी हद तक नष्ट कर दिया गया है. इसके बावजूद अमेरिका की चिंता बनी हुई है कि क्या ईरान लंबे समय के लिए परमाणु हथियार न बनाने की नीति पर कायम रहेगा.
परमाणु हथियार नहीं बनाने की मांग
वेंस ने कहा कि असली सवाल सिर्फ वर्तमान या अगले कुछ वर्षों का नहीं है, बल्कि यह है कि क्या ईरान स्थायी रूप से परमाणु हथियार बनाने की दिशा से दूर रहेगा. उन्होंने माना कि अभी तक अमेरिका को ईरान की ओर से ऐसी कोई ठोस और भरोसेमंद प्रतिबद्धता नजर नहीं आई है. उन्होंने कहा ‘सवाल यह है कि क्या हमें ईरानियों की ओर से परमाणु हथियार विकसित न करने की कोई ठोस प्रतिबद्धता दिख रही है, न सिर्फ अभी के लिए, न सिर्फ दो साल बाद के लिए, बल्कि दीर्घकालिक रूप से? अभी तक हमें यह प्रतिबद्धता नहीं दिखी है, लेकिन हमें उम्मीद है कि दिखेगी’.
अमेरिका और ईरान के बीच हुई इस शांति वार्ता पर दुनिया की नजरें टिकी हुई थीं, क्योंकि इसका असर न सिर्फ पश्चिम एशिया बल्कि वैश्विक सुरक्षा पर भी पड़ेगा. एक तरफ अमेरिका कड़ी शर्तों पर अड़ा है, वहीं ईरान ने वाशिंगटन की शर्तों को न मानकर अपनी मंशा साफ जाहिर कर दी है. ऐसे में अब एक बार फिर से तनाव और भी ज्यादा बढ़ने के आसार हैं.





