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क्या होर्मुज खुलने में होगी देरी? ईरान को नहीं मिल रहीं अपनी ही बिछाई समुद्री माइंस

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज खोलने में देरी हो रही है और इसकी बड़ी वजह यह बताई जा रही है कि ईरान खुद अपने लगाए सी माइंस ढूंढ नहीं पा रहा है. उन्हें हटाना भी उसके लिए मुश्किल हो रहा है. अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि ईरान के पास इन माइंस को ट्रैक करने और साफ करने की सीमित क्षमता है, इसलिए वह अमेरिका की चेतावनियों के बावजूद इस रास्ते को खोल नहीं पा रहा है.

क्या होर्मुज खुलने में होगी देरी? ईरान को नहीं मिल रहीं अपनी ही बिछाई समुद्री माइंस
क्या होर्मुज खुलने में होगी देरी? ईरान को नहीं मिल रहीं अपनी ही बिछाई समुद्री माइंस

यह मामला ऐसे समय सामने आया है, जब जेडी वेंस शांति वार्ता के लिए इस्लामाबाद पहुंचे हैं. इस बातचीत में होर्मुज स्ट्रेट सबसे बड़ा मुद्दा रहेगा. अमेरिका चाहता है कि ईरान इस समुद्री रास्ते को तुरंत खोल दे. डोनाल्ड ट्रंप ने भी इसे युद्ध खत्म करने की अहम शर्त बताया है. दूसरी तरफ, ईरान इस समुद्री रास्ते पर नियंत्रण चाहता है.

ईरान ने क्यों बिछाई थी माइंस?

न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान ने इस इलाके में जमीन और समुद्र दोनों जगह माइंस बिछाई थीं, ताकि अमेरिका और खाड़ी देशों पर दबाव बनाया जा सके और अपने ऊपर हो रहे हमलों को रोका जा सके. यह जलमार्ग बहुत अहम है, क्योंकि इसी रास्ते से खाड़ी देशों का तेल दुनिया भर में पहुंचता है.

माइंस, ड्रोन और मिसाइल हमलों के खतरे की वजह से यह रास्ता एक महीने से ज्यादा समय से बंद है. जहाज यहां से गुजरने से डर रहे हैं. इसका असर भारत समेत कई देशों पर पड़ा है, जहां ऊर्जा संकट की स्थिति बन गई है.

क्यों माइंस खोजने में आ रही दिक्कत?

रिपोर्ट में कहा गया है कि ने माइंस को ठीक तरीके से नहीं लगाया और हो सकता है कि उसे उनकी सही जगह भी याद न हो. कुछ माइंस पानी में बहकर अपनी जगह बदल चुकी हैं. रिपोर्ट के अनुसार, माइंस हटाना उन्हें लगाने से ज्यादा मुश्किल काम है. यहां तक कि अमेरिकी सेना के पास भी इन्हें हटाने की सीमित क्षमता है.

वह खास जहाजों का इस्तेमाल करती है, जिनमें माइंस हटाने की तकनीक होती है. ईरान के पास भी इतनी क्षमता नहीं है कि वह जल्दी से इन माइंस को हटा सके, चाहे वे उसी ने लगाई हों. मार्च के अंत में ट्रंप ने ईरान के ऊर्जा ठिकानों पर हमले रोक दिए थे और शांति के लिए एक समय सीमा तय की थी. इस प्रस्ताव में होर्मुज को तुरंत खोलना भी शामिल था. बाद में यह समय सीमा बढ़ा दी गई और दो हफ्ते का अस्थायी युद्धविराम हुआ. इसके बावजूद अभी तक यह रास्ता बंद है.

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