वाइल्डलाइफ फोटोग्राफी सुनने में जितनी रोमांचक लगती है, असल में उतनी ही चैलेंजिंग होती है. एक बेहतरीन तस्वीर कैद करने के लिए फोटोग्राफर को प्रकृति के मुश्किल हालातों का सामना करना पड़ता है. हाल ही में इंस्टाग्राम पर एक फोटोग्राफर ने ऐसी ही एक मोटिवेशनल कहानी शेयर की, जो हमें सीधे हिमालय की ऊंची वादियों में ले जाती है. जहां 15,000 फीट की ऊंचाई पर एक दुर्लभ और रहस्यमयी जीव की तलाश चल रही थी.

9 अप्रैल को विजथ भार्गव (@drone_pilot_vb) नाम के फोटोग्राफर ने अपना एक दिलचस्प व्लॉग पोस्ट किया. इस वीडियो में उन्होंने अपने 12 दिनों के संघर्ष और धैर्य को बेहद भावुक अंदाज में बयान किया है. उनके मुताबिक, वे लगातार 12 दिनों तक हर सुबह 8 बजे से शाम 6 बजे तक एक ही पहाड़ी किनारे पर कैमरा लेकर बैठे रहते थे. ये सफर उन्होंने अकेले नहीं किया, बल्कि उनके साथ कई अन्य फोटोग्राफर भी मौजूद थे, जिनमें कई विदेशी भी शामिल थे. अलग-अलग देशों और भाषाओं के बावजूद सबका लक्ष्य एक ही था. एक बार उस दुर्लभ जानवर की झलक पाना.
क्यों खास होता है ये जीव?
विजथ बताते हैं कि जिस जीव की तलाश थी, वह कोई आम जानवर नहीं, बल्कि स्नो लेपर्ड यानी हिम तेंदुआ है. इसे पहाड़ों का भूत यूं ही नहीं कहा जाता. इसकी सबसे खास बात है इसके गायब की क्षमता. जिसकी वजह से यह बर्फीली और पथरीली चट्टानों में इस तरह घुल-मिल जाता है कि आंखों के सामने होते हुए भी नजर नहीं आता. इसे ढूंढना ही नहीं, बल्कि देख पाना भी किस्मत की बात होती है. दिन के समय, खासकर जब धूप होती है, यह ज्यादातर आराम करता है और नजरों से ओझल रहता है.
इतनी ऊंचाई पर रहना खुद में एक बड़ी चुनौती है. 15,000 फीट पर ऑक्सीजन की कमी शरीर को जल्दी थका देती है. हालांकि दिन में धूप रहने तक हालात कुछ हद तक संभल जाते हैं, लेकिन असली मुश्किलें शाम ढलने के बाद शुरू होती हैं. करीब साढ़े चार बजे के बाद तापमान अचानक 7 से 8 डिग्री तक गिर जाता है. ठंडी और तेज हवाएं इतनी तीखी होती हैं कि कैमरा पकड़ना भी मुश्किल हो जाता है. हाथ सुन्न होने लगते हैं और उंगलियों में दर्द होने लगता है. लेकिन एक परफेक्ट शॉट के लिए फोटोग्राफर को यह सब सहना ही पड़ता है.
वीडियो में एक पल ऐसा आता है, जो पूरे इंतजार और मेहनत को सार्थक बना देता है. अचानक किसी हलचल पर नजर जाती है. आवाज आती है देखो, वहां कुछ हिला वो पत्थर नहीं है कैमरा तुरंत उस दिशा में फोकस करता है, और फिर जो नजर आता है, वह किसी जादू से कम नहीं होता. चट्टानों के बीच छिपा हुआ हिम तेंदुआ धीरे-धीरे दिखाई देता है. यह पल इतना खास होता है कि सारी थकान, ठंड और संघर्ष एक झटके में जैसे खत्म हो जाते हैं.
वीडियो के अंत में विजथ कहते हैं कि यह जानवर जंगल का राजा नहीं, बल्कि एक घोस्ट यानी भूत जैसा है जो चुपचाप आता है और बिना कोई आहट दिए गायब हो जाता है. यही वजह है कि इसे घोस्ट ऑफ द माउंटेन्स कहा जाता है. दरअसल, हिम तेंदुए का रंग स्लेटी-सफेद होता है, जिस पर काले धब्बे बने होते हैं. यह रंग-रूप उसे बर्फ और पत्थरों के बीच छिपने में मदद करता है. इसके अलावा यह बेहद शांत और चालाक शिकारी होता है, जो बिना आवाज किए अपने शिकार के करीब पहुंच जाता है. इसकी मौजूदगी का अंदाजा लगाना लगभग नामुमकिन होता है.
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