मिडिल ईस्ट में जारी बारूदी विनाश को रोकने के लिए पाकिस्तान में चर्चा का मंच बनाया गया है. अमेरिकी प्रतिनिधि मंडल समझौते की मेज पर बैठने के लिए तैयार भी है. लेकिन ईरान की तरफ से सस्पेंस बरकरार है. इस सस्पेंस की वजह है ईरान की इजराइल और लेबनान से जुड़ी एक शर्त. इससे अलग वार्ता पर खुद पाकिस्तान ने सस्पेंस खड़ा किया है. क्योंकि ख्वाजा आसिफ के एक सोशल मीडिया पोस्ट ने पाकिस्तान को खुद पक्षकार बना दिया है.

बता दें कि एक तरफ पाकिस्तान की राजधानी में एक-दूसरे के जानी दुश्मन अमेरिका और ईरान, आमने-सामने बैठने वाले हैं. दूसरी तरफ इज़राइल ने ईरान पर ‘अंतिम प्रहार’ की तैयारी शुरू कर दी है. और इस खेल में खुद पाकिस्तान सबसे बड़ा ‘विलेन’ बनकर उभर रहा है. पाकिस्तानी रक्षा मंत्री के एक बयान ने इजराइल को बारूदी तैयारी करने पर मजबूर कर दिया है.
तो क्या समझौता होने से पहले टूट जाएगा?
अमेरिका की तरफ से जेरेड कुशनर, उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने कमान संभाली है. तो वहीं ईरान ने अपने सबसे अनुभवी कूटनीतिज्ञ विदेश मंत्री अब्बास अराघची और संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बाकिर कालीबाफ को भेजा है. इस डेलिगेशन के सुरक्षा चक्र की जिम्मेदारी खुद पाकिस्तानी सेना के प्रमुख असीम मुनीर ने संभाली है. यही वजह है कि पूरे शहर में धारा 144 लागू है. लेकिन इतनी तैयारी के बावजूद भी ये वार्ता इतनी आसान नहीं है. क्योंकि, इस वार्ता को पाकिस्तानी रक्षा मंत्री का ही एक बयान डिरेल करने के लिए काफी है.
मेजबान बना पक्षकार, बातचीत टूटने के आसार?
ऐसा इसलिए क्योंकि, जब शांति की बात हो रही हो, जब मेजबान को तटस्थ रहना चाहिए. तब पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ने ऐसा जहर उगला कि, इजराइल जंग की आग भड़काने पर मजबूर हो गया. ख्वाजा आसिफ ने पोस्ट किया कि, इजराइल दुष्ट और मानवता के लिए अभिशाप है. इस्लामाबाद में शांति वार्ता चल रही है, वहीं वो लेबनान में नरसंहार कर रहा है. इजराइल निर्दोष लोगों की हत्या कर रहा है.
पहले गाजा, फिर ईरान और अब लेबनान में रक्तपात अब भी लगातार जारी है. मेरी यही प्रार्थना है कि जिन लोगों ने यूरोपीय यहूदियों से छुटकारा पाने के लिए फिलिस्तीनी जमीन पर कैंसर जैसे देश की स्थापना की हे, वो नरक में जलें. हालांकि दबाव में उन्होंने अपना पोस्ट डिलीट भी कर दिया. लेकिन तीर कमान से निकल चुका है. तो क्या अब इजराइल उस देश की मध्यस्थता स्वीकार करेगा जो उसे दुनिया का नासूर बता रहा है?
पाकिस्तान ने किया ‘सेल्फ-गोल’
यही वजह है कि पाकिस्तान के ‘सेल्फ-गोल’ ने ट्रंप और नेतन्याहू के गुस्से को सातवें आसमान पर पहुंचा दिया है. और नेतन्याहू ने ईरान पर हमलों की एक नई लहर के लिए तैयारी शुरू कर दी है. इजराइली फाइटर जेट्स में ऑपरेशन के लिए भरे गए ईंधन और हमले के लिए स्टैंडबाय पर रखे गए विमानों से इसकी पुष्टि होती है.
ईरान का 10 सूत्रीय एजेंडे पर रुख साफ
यानी इस युद्ध को इजराइल अब नई दिशा दे सकता है. सिर्फ इंतज़ार है, वार्ता की मेज पर एजेंडा फेल होने का, जिसकी संभावना ज्यादा है. क्योंकि ईरान का 10 सूत्रीय एजेंडे को लेकर रुख साफ है कि, होर्मुज पर ईरान का राज होगा और वो जहाज़ों से टैक्स वसूलेगा. इतना ही नहीं अमेरिका को पश्चिमी एशिया भी छोड़ना पड़ेगा. इससे भी बड़ी शर्त है, जब तक लेबनान पर इजराइल के हमले नहीं रुकेंगे, तब तक समझौता नहीं होगा.
ये ऐसे मुद्दे हैं, जिनका समाधान पाकिस्तान में निकलेगा? इसकी उम्मीद किसी को नहीं है. और उम्मीद को आशंका में ट्रंप का 15 सूत्रीय प्रस्ताव बदलता है. जिसमें पहली शर्त है ईरान से सारा यूरेनियम हटाया जाए. ईरान मिसाइल कार्यक्रम भी बंद करे और अपने मित्रराष्ट्रों से मिल रही मदद को छोड़े.
युद्ध खत्म नहीं होगा और भड़केगा
इसके साथ ट्रंप की एक धमकी भी जुड़ी है. या तो समझौता करो, या फिर पाषाण युग में जाने के लिए तैयार रहो. इसलिए पाकिस्तान का पक्षकार बनना और का होर्मुज जैसी दुनिया की नस को दबाए रखना संकेत दे रहा है कि, युद्ध समाप्त नहीं होगा, बल्कि और भड़केगा. जिसकी पुष्टि ईरान से आ रही खबरें करती हैं. खबर ये है कि, शांति की मेज सजी है लेकिन तेहरान के उत्तर-पूर्वी हिस्सों में धमाकों की आवाज़ सुनी जा रही है. ओजगोल, कनात कौसर और लाविजान में भी विस्फोट हुए हैं. एयर डिफेंस एक्विट न होने की वजह से हमले सटीक जगह पर हुए हैं.
वार्ता की मेज उलटने की तैयारी
मतलब ये है कि, इजराइल इस वार्ता के पक्ष में नहीं है. युद्ध-विराम सिर्फ अमेरिका की तरफ से हुआ है, इजराइल ने नहीं किया. या फिर संभव है कि, लेबनान पर जारी हमलों को देखते हुए ईरान ने ही वार्ता की मेज उलटने की तैयारी कर ली है. यानी ईरान का रुख साफ है, या तो शर्तें मानी जाएं, या फिर युद्ध के लिए तैयारी शुरू की जाए. और तय है कि, अब युद्ध भड़का, तो इसका विस्तार पूरी दुनिया को चौंका देगा.





