पार्किंसंस एक न्यूरोलॉजिकल समस्या है. जो अकसर बुजुर्ग अवस्था में होती है. इसके बारे में जागरूक करने के लिए 11 अप्रैल को World Parkinson’s Day मनाया जाएगा. ये बीमारी शरीर की मूवमेंट पर असर करती है. इससे व्यक्ति को चलने- फिरने तक में परेशानी आने लगती है. ये बीमारी क्यों होती है और क्या इसके मरीज सामान्य जीवन व्यतीत कर सकते हैं इस बारे में एक्सपर्ट से जानते हैं.

शरीर में डोपामिन केमिकल के कम बनने से होती है. इससे दिमाग के उस हिस्से पर असर पड़ता है जो शरीर की मूवमेंट को कंट्रोल करता है. शरीर में डोपामिन की कमी के कारण शरीर के मूवमेंट धीमे हो जाते हैं.
65 साल से अधिक उम्र वालों में ज्यादा आते हैं पार्किंसंस के केस
समस्या आमतौर पर 65 साल के बाद ज्यादा देखने को मिलती है, लेकिन कुछ मामलों में कम उम्र में भी हो सकती है. बीते कुछ सालों में 60 से 65 साल वालों में भी इसके मामले देखे गए हैं. इस बीमारी के कारण लोगों को काफी परेशानी होती है. कोई काम करते समय हाथ कांपने लगते हैं और कई शब्दों को साफ बोलने में भी दिक्कत आती है. इस बीमारी के होने के बाद दवाओं और थेरेपी से इसको कंट्रोल किया जाता है, लेकिन ये इस बात पर निर्भर करता है कि लक्षण कितनी जल्द पहचान में आ रहे हैं और क्या इलाज हो रहा है.
इसके मुख्य लक्षण क्या हैं?
- हाथ या उंगलियों में कंपन
- चलने में धीमापन
- संतुलन बिगड़ना
- चेहरे के भाव कम होना
- लिखने या बोलने में बदलाव
क्या पार्किंसंस बीमारी का कोई परमानेंट इलाज है
दिल्ली के जीबी पंत अस्पताल में न्यूरोसर्जरी विभाग के पूर्व एचओडी डॉ दलजीत सिंह बताते हैं कि पार्किंसस को जड़ से खत्म नहीं किया जा सकता है. लेकिन जितना जल्दी इसके लक्षण पता लग जाएं उतना ही बेहतर होता है. इससे बीमारी का आसानी से कंट्रोल किया जा सकता है.समय पर दवा और लाइफस्टाइल में बदलाव से मरीज अपनी रोजमर्रा की जिंदगी को काफी हद तक सामान्य रख सकते हैं.
क्या मरीज सामान्य जिंदगी जी सकते हैं?
इस बीमारी का अभी तक कोई स्थायी इलाज नहीं है, लेकिन सही समय पर इलाज और देखभाल से मरीज काफी हद तक मरीज सामान्य जीवन जी सकते हैं. दवाओं के जरिए लक्षण कंट्रोल में रहते हैं और मरीज को गंभीर परेशानियां नहीं होती हैं.





