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बिहार में 9-10 अप्रैल को आंधी, बारिश, ओलावृष्टि का अलर्ट! फसलों की एडवाइजरी जारी


समस्तीपुर. समस्तीपुर सहित उत्तर बिहार के किसानों के लिए यह खबर बेहद महत्वपूर्ण है. डॉ. राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय, पूसा के मौसम विज्ञान केंद्र एवं भारत मौसम विभाग द्वारा जारी पूर्वानुमान के अनुसार 9 और 10 अप्रैल को मौसम अचानक बदल सकता है. इस दौरान तेज आंधी, बारिश और कुछ स्थानों पर ओलावृष्टि होने की संभावना जताई गई है. मौसम विभाग ने इसे लेकर अलर्ट जारी किया है और किसानों से अपील की है कि वे अपनी तैयार फसलों, खासकर गेहूं की कटाई जल्द से जल्द सावधानी से कर लें.
जिन किसानों ने पहले ही फसल काट ली है, वे उसे सुरक्षित स्थान पर रखें ताकि बारिश और ओलावृष्टि से नुकसान न हो. इस दौरान किसी भी प्रकार के कीटनाशक का छिड़काव करने से बचने की सलाह दी गई है.

मूंग-उड़द बुआई और गरमा फसलों के लिए वैज्ञानिक सलाह जारी
कृषि विशेषज्ञों ने गरमा फसलों को लेकर भी महत्वपूर्ण सलाह जारी की है. मूंग और उड़द की बुआई को प्राथमिकता देने को कहा गया है. खेत की तैयारी के दौरान प्रति हेक्टेयर 20 किलोग्राम नाइट्रोजन, 45 किलोग्राम फास्फोरस, 20 किलोग्राम पोटाश और 20 किलोग्राम गंधक के उपयोग की सलाह दी गई है. मूंग की पूसा विशाल, सम्राट, एसएमएल-668, एचयूएम-16 और सोना किस्में, जबकि उड़द की पंत उरद-19, पंत उरद-31, नवीन और उत्तरा किस्में उपयुक्त बताई गई हैं.

बीज को बुआई से दो दिन पहले कार्बेन्डाजिम से उपचारित करने और फिर राइजोबियम कल्चर से ट्रीट कर बोने की सलाह दी गई है. इसके साथ ही भिंडी, नेनुआ, करेला, लौकी और खीरा जैसी गरमा सब्जियों की बुआई जल्द पूरी करने को कहा गया है.

कीट नियंत्रण, छिड़काव सावधानी और तापमान को लेकर चेतावनी
प्याज और अन्य सब्जी फसलों में कीट प्रबंधन को लेकर भी सतर्क रहने की जरूरत बताई गई है. प्याज में थ्रिप्स कीट के प्रकोप की निगरानी करने को कहा गया है, जो पत्तियों का रस चूसकर नुकसान पहुंचाता है. अधिक प्रकोप होने पर प्रोफेनोफॉस या इमिडाक्लोप्रिड का छिड़काव करने की सलाह दी गई है, लेकिन 9-10 अप्रैल के आसपास छिड़काव न करने की चेतावनी दी गई है.

मौसम विभाग के अनुसार इस अवधि में अधिकतम तापमान 32 से 35 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम 18 से 20 डिग्री सेल्सियस के बीच रहेगा. तेज हवाओं की रफ्तार 22 से 25 किलोमीटर प्रति घंटा तक जा सकती है, जिससे फसलों को नुकसान का खतरा बढ़ जाता है.

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