
लखनऊ: उत्तर प्रदेश सरकार ने पूर्वी पाकिस्तान से विस्थापित होकर आए 63 हिंदू परिवारों को बड़ी राहत दी है। कैबिनेट ने इन परिवारों को कानपुर देहात की रसूलाबाद तहसील में पुनर्वासित किए जाने के लिए एक रुपये की लीज रेंट पर जमीन देने के प्रारूप को मंजूरी दे दी है। इस फैसले से इन परिवारों को न सिर्फ कानूनी सुरक्षा मिलेगी बल्कि उनका आर्थिक सशक्तीकरण भी होगा।
कैबिनेट ने इसके अलावा भारत-पाकिस्तान विभाजन के समय विस्थापित होकर आए शरणार्थियों को दी गई जमीन पर उन्हें मालिकाना हक दिए जाने के प्रस्ताव को भी हरी झंडी दिखा दी है। यूपी में ऐसे करीब 12380 शरणार्थी हैं। अब इन लोगों को आसानी से बैंक लोन मिल सकेगा। साथ ही वे अपने उपज को सरकारी खरीद केंद्रों पर बेच सकेंगे।
इन चार जिलों मे बसाए गए शरणार्थी परिवार
योगी कैबिनेट के इस फैसले का लाभ पीलीभीत, लखीमपुर खीरी, रामुर और बिजनौर में बसाए गए शरणार्थी परिवारों को मिलेगा। पिछले 70 सालों में इन लोगों को ना तो बैंक लोन मिलता था और ना ही ये लोग अपनी फसल सरकारी खरीद केंद्रों पर बेच पाते थे। वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने बताया कि लखीमपुर खीरी में शरणार्थी परिवारों की संख्या 2350, पीलीभीत में 4 हजार, बिजनौर में 3856 और रामपुर में 2174 है।
70 साल के बाद मिला स्वामित्व का अधिकार
सरकार ने संशोधित नागरिकता अधिनियम 2019 के तहत भारतीय नागरिकता के लिए पात्र, अनुसूचित जनजाति समुदाय अथवा उपनिवेशन योजना के तहत बसाए गए परिवारों को भूमि पर स्वामित्व के अधिकार प्रदान करने के संबंध में मंत्रिमंडल ने सहमति दे दी है।
1 एकड़ तक जमीन लेने का रहेगा अधिकार
सुरेश खन्ना ने बताया कि इन शरणार्थी परिवारों को एक एकड़ की अधिकृत सीमा तक जमीन लेने का अधिकार होगा, बस वह जमीन सीलिंग में ना आती हो या फिर खलिहान, चारागाह और तालाब की जमीन ना हो। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में राज्य मंत्रिमंडल ने ये फैसले लिए हैं।





