Saturday, April 11, 2026
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15 दिन में निकल गई चीन की हवा, दूसरी बार हुआ मजबूर, 4 साल से टिका है भारत


नई दिल्‍ली. चीन खुद को दुनिया की महाशक्ति की तरह पेश करता है और आज वह अमेरिका के बाद दूसरा सबसे मजबूत देश भी माना जाता है. लेकिन, जब ईरान और इजराइल युद्ध की वजह से मुश्किल बढ़ी तो उसकी हवा भी 15 दिन में ही निकल गई. हम अभी तक पाकिस्‍तान और नेपाल जैसे देशों की बात कर रहे थे, जहां पेट्रोल और डीजल के दाम बेतहाशा बढ़ चुके हैं. लेकिन, इस मामले में चीन भी कुछ अलग नहीं ठहरा. वहां भी पिछले 15 दिन में पेट्रोल और डीजल के दाम दूसरी बार बढ़ चुके हैं. हालांकि, इस तूफान में भी भारत पहाड़ की तरह खड़ा हुआ है और यहां 4 साल से तेल की कीमतों में कोई बदलाव नहीं हुआ है.

पश्चिम एशिया में जारी युद्ध के कारण अंतरराष्ट्रीय तेल कीमतों में तेजी के बीच चीन ने करीब 15 में दूसरी बार पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ाने की घोषणा की है. चीन की शीर्ष आर्थिक योजना संस्था राष्ट्रीय विकास एवं सुधार आयोग (एनडीआरसी) ने मंगलवार को बताया कि कीमतों में यह नई वृद्धि बुधवार से लागू होगी. अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच युद्ध को लेकर संभावित ईंधन संकट की आशंकाओं के बीच चीन ने इससे पहले 23 मार्च को भी पेट्रोल और डीजल की कीमतें बढ़ाई थीं.

कितनी बढ़ गई प्रति लीटर कीमत
एनडीआरसी ने कहा कि मार्च के अंत में घरेलू तेल कीमतों में किए गए समायोजन के बाद अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों में काफी उतार-चढ़ाव देखा गया है. नियंत्रण उपायों के तहत पेट्रोल की कीमत में 420 युआन (61 डॉलर) प्रति टन और डीजल की कीमत में 400 युआन (58 डॉलर) प्रति टन की वृद्धि की जाएगी. एक लीटर के हिसाब से देखा जाए तो पेट्रोल में 4 रुपये की बढ़ोतरी हुई है और डीजल में 4.49 रुपये लीटर की वृद्धि की गई है. पाकिस्‍तान में तो पेट्रोल की कीमत 458 रुपये लीटर और डीजल की 520 लीटर पहुंच गई है. ईरान संकट के बाद इसमें डेढ़ गुना वृद्धि हुई है.

उत्‍पादन बढ़ाने पर जोर
आयोग ने चीन नेशनल पेट्रोलियम कॉरपोरेशन, चाइना पेट्रोकेमिकल कॉरपोरेशन और चाइना नेशनल ऑफशोर ऑयल कॉरपोरेशन सहित अन्य रिफाइनरियों को उत्पादन बनाए रखने और परिवहन सुचारु करने का निर्देश दिया है, ताकि आपूर्ति स्थिर बनी रहे. एनडीआरसी ने संबंधित अधिकारियों से बाजार निगरानी एवं निरीक्षण को और सख्त करने को भी कहा गया है. सरकारी समाचार एजेंसी ‘शिन्हुआ’ के अनुसार, आयोग ने कहा कि राष्ट्रीय मूल्य नीति का उल्लंघन करने वाली गतिविधियों के खिलाफ कड़े कदम उठाए जाने चाहिए ताकि बाजार व्यवस्था बनी रहे. चीन के पास लगभग 4 महीने का आपात तेल भंडार है.

चीन का आयात भारत से कम
चीन अपनी कच्चे तेल की जरूरत का लगभग 70 फीसदी आयात करता है. इनमें से करीब 45 फीसदी आयात होर्मुज जलडमरूमध्य से आने वाले मार्गों से जुड़ा है यानी उसकी कुल तेल आपूर्ति का करीब 30 फीसदी हिस्सा इस मार्ग पर निर्भर है. विश्लेषकों का कहना है कि चीन की ऊर्जा खपत एवं बिजली उत्पादन के मिश्रण को देखते हुए होर्मुज जलडमरूमध्य में व्यवधान से ऊर्जा आपूर्ति पर उसका असर अन्य प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं और एशियाई देशों की तुलना में कम हो सकता है. चीन के पास रूस से जुड़ी गैस पाइपलाइन भी है और उसने मॉस्को के साथ दीर्घकालिक ऊर्जा आपूर्ति समझौते कर रखे हैं.

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