
नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में लंबे समय से जारी अमेरिका-ईरान तनाव के बीच एक बड़ी राहत की खबर सामने आई है। दोनों देशों ने दो हफ्ते के सीजफायर पर सहमति जताई है, जिससे फिलहाल हमले रुकने की उम्मीद है। इस समझौते के तहत स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को खोलने और आगे बातचीत शुरू करने का रास्ता साफ हुआ है। हालांकि, जमीनी हालात अभी भी पूरी तरह सामान्य नहीं हुए हैं।
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने घोषणा की है कि अमेरिका और ईरान ने अपने सहयोगियों के साथ मिलकर तुरंत प्रभाव से दो हफ्ते के युद्धविराम पर सहमति बना ली है। इस फैसले के साथ ही अमेरिकी और इजरायली हमलों पर अस्थायी रोक लगने की उम्मीद है।
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने भी इस सीजफायर को स्वीकार करने की पुष्टि की। उन्होंने कहा कि इस दौरान होर्मुज स्ट्रेट से जहाजों की सुरक्षित आवाजाही संभव होगी, जो ईरानी सेना के समन्वय से संचालित होगी।
इस पूरे समझौते में पाकिस्तान की भी भूमिका रही है। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने बताया कि यह सीजफायर सिर्फ ईरान और अमेरिका तक सीमित नहीं है, बल्कि लेबनान समेत अन्य क्षेत्रों में भी लागू होगा।
इस्लामाबाद में होगी आगे की बातचीत
सीजफायर के साथ ही अब दोनों देशों के बीच बातचीत का रास्ता भी खुल गया है। पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में 10 अप्रैल को दोनों पक्षों के बीच वार्ता शुरू होने की संभावना है।
शहबाज शरीफ ने कहा कि यह बातचीत स्थायी शांति के लिए बेहद जरूरी है और उन्होंने दोनों देशों के नेताओं का धन्यवाद भी किया। उन्होंने उम्मीद जताई कि इस्लामाबाद वार्ता से कोई ठोस समाधान निकल सकता है।
अमेरिका की ओर से भी इस बातचीत की तैयारी शुरू हो गई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिका के कई वरिष्ठ नेता और अधिकारी इस बैठक में शामिल हो सकते हैं। हालांकि व्हाइट हाउस ने साफ किया है कि अंतिम निर्णय राष्ट्रपति स्तर पर ही लिया जाएगा।
सीजफायर के बावजूद जारी तनाव
हालांकि कागजों पर सीजफायर हो गया है, लेकिन जमीन पर हालात अब भी पूरी तरह शांत नहीं हैं। खाड़ी देशों और इजरायल में मिसाइल हमलों के अलर्ट जारी रहे। संयुक्त अरब अमीरात, सऊदी अरब, कुवैत और बहरीन जैसे देशों में एयर डिफेंस सिस्टम सक्रिय रहे। इससे साफ है कि क्षेत्र में खतरा अभी टला नहीं है और स्थिति बेहद नाजुक बनी हुई है।
इजरायल और ईरान के बीच भी हमले पूरी तरह बंद नहीं हुए हैं। दोनों तरफ से जवाबी कार्रवाई जारी रहने की खबरें सामने आई हैं, जिससे यह संकेत मिलता है कि सीजफायर को पूरी तरह लागू होने में समय लग सकता है।
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बना सबसे बड़ा मुद्दा
इस पूरे संघर्ष का सबसे बड़ा केंद्र स्ट्रेट ऑफ होर्मुज रहा है। दुनिया के बड़े हिस्से में तेल और गैस की सप्लाई इसी रास्ते से होती है। ईरान ने इस जलमार्ग पर नियंत्रण कड़ा कर दिया था, जिससे वैश्विक अर्थव्यवस्था पर असर पड़ा।
इसी दबाव के चलते अमेरिका और उसके सहयोगियों ने सीजफायर की दिशा में कदम बढ़ाया। सीजफायर के तहत दो हफ्तों के लिए इस स्ट्रेट को खोलने पर सहमति बनी है। हालांकि यह पूरी तरह खुला रहेगा या सीमित नियंत्रण में, इस पर अभी स्पष्टता नहीं है।
आर्थिक असर और अंतरराष्ट्रीय दबाव
सीजफायर की घोषणा के बाद वैश्विक बाजारों में सकारात्मक असर देखा गया। अमेरिका के तेल की कीमतों में 17 प्रतिशत से ज्यादा की गिरावट आई, जबकि जापान और दक्षिण कोरिया के शेयर बाजारों में तेजी रही।
विशेषज्ञों का मानना है कि युद्ध के कारण बढ़ते आर्थिक दबाव ने अमेरिका को पीछे हटने के लिए मजबूर किया। इससे पहले ट्रंप ने ईरान को कड़े अल्टीमेटम दिए थे, लेकिन अंतिम समय में उन्होंने नरमी दिखाई। दुनिया के कई देशों ने इस सीजफायर का स्वागत किया है। मिस्र और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों ने इसे शांति की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया है और बातचीत को आगे बढ़ाने पर जोर दिया है।
क्या है आगे की राह?
सीजफायर के बावजूद कई बड़े मुद्दे अब भी अनसुलझे हैं। ईरान ने अपनी कुछ शर्तें रखी हैं, जिनमें अमेरिकी सेना की वापसी, प्रतिबंध हटाना और अपने फंसे हुए संसाधनों को वापस लेना शामिल है। ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर भी विवाद बना हुआ है, जो इस पूरे संघर्ष की एक बड़ी वजह रहा है। अमेरिका और इजरायल इस कार्यक्रम को खत्म करने की मांग करते रहे हैं।
हालांकि दोनों देशों ने बातचीत के लिए सहमति जताई है, लेकिन यह देखना होगा कि इस्लामाबाद में होने वाली वार्ता से कोई ठोस समाधान निकलता है या नहीं। फिलहाल, यह सीजफायर एक अस्थायी राहत जरूर है, लेकिन स्थायी शांति अभी दूर नजर आती है।





