
राजस्थान में सक्रिय हुए नए पश्चिमी विक्षोभ ने मौसम का मिजाज पूरी तरह बदल दिया है. पिछले 24 घंटों के दौरान प्रदेश के कई हिस्सों में तेज अंधड़, मूसलाधार बारिश और भारी ओलावृष्टि ने जनजीवन अस्त-व्यस्त कर दिया है. जहां एक ओर तापमान में गिरावट से गर्मी से राहत मिली है, वहीं दूसरी ओर खेतों में खड़ी और मंडियों में पड़ी फसलों पर कुदरत का कहर बनकर टूटा है.
बता दें कि शनिवार को कोटा, गंगापुर सिटी, बीकानेर और श्रीगंगानगर सहित कई जिलों में प्रकृति का रौद्र रूप देखने को मिला. कोटा और गंगापुर सिटी इतनी भीषण ओलावृष्टि हुई कि सड़कें और खेत कश्मीर की तरह सफेद नजर आने लगे.श्रीगंगानगर के पदमपुर में सर्वाधिक 11.5 मिमी बारिश दर्ज की गई.चूरू के सरदारशहर में आए धूल भरे बवंडर ने दृश्यता शून्य कर दी, जिससे वाहन चालकों को भारी परेशानी हुई.
मौसम केंद्र जयपुर ने आज (5 अप्रैल) के लिए विशेष चेतावनी जारी की है. बता दें कि भरतपुर और आसपास के जिलों में मेघगर्जन के साथ मध्यम बारिश और ओलावृष्टि की प्रबल संभावना है. इन क्षेत्रों में 40 से 50 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से अंधड़ चल सकता है.विभाग ने आकाशीय बिजली चमकने के दौरान पेड़ों और बिजली के खंभों से दूर सुरक्षित स्थान पर रहने की सलाह दी है.
मौसम विभाग के अनुसार, अभी राहत मिलने के आसार नहीं हैं.6 अप्रैल को जोधपुर और बीकानेर संभाग में एक और मजबूत विक्षोभ दस्तक देगा.7 अप्रैल (पीक डे) को विक्षोभ का सर्वाधिक असर रहेगा. अजमेर, जयपुर, भरतपुर और कोटा संभाग में 50-60 किमी की रफ्तार से आंधी और ओले गिरने की संभावना है. और वहीं 8 अप्रैल को उत्तर-पूर्वी राजस्थान में हल्की बारिश के बाद मौसम धीरे-धीरे शुष्क होने लगेगा.
विक्षोभ के बावजूद प्रदेश के कुछ हिस्सों में सूरज के तेवर तीखे बने हुए हैं. रविवार की रिपोर्ट के अनुसार राज्य के टॉप-5 गर्म शहर इस प्रकार रहे. बता दें कि अधिकतम तापमान के आधार पर चित्तौड़गढ़ 35.2°C,कोटा 34.4°C, जवाई डैम (पाली) 33.8°C, बाड़मेर 33.6°C और भीलवाड़ा में 33.4°C दर्ज किया गया है.
मंडियों में खुले आसमान के नीचे पड़े अनाज (जैसे अंता और अन्य जिलों में) को लेकर प्रशासन और किसानों को सतर्क किया गया है. पककर तैयार रबी की फसलों और मंडियों में रखे जींसों को तिरपाल से ढंकने या सुरक्षित स्थानों पर ले जाने के निर्देश दिए गए हैं.





