
महिलाओं में हार्मोंस इंबैलेंस से कैंसर जैसी बीमारी का रिस्क बढ़ सकता है. महिलाओं के शरीर में Estrogen और progesterone हार्मोन बेहद जरूरी भूमिका निभाते हैं. ये हार्मोन्स ना केवल पीरियड्स को कंट्रोल या नियंत्रित करते हैं. बल्कि ब्रेस्ट गर्भाशय और अंडाशय जैसे अंगों पर भी असर डालता है. आइए अपोलो एथेना महिला कैंसर सेंटर के गाइने-ऑन्कोलॉजी और रोबोटिक सर्जरी के प्रिंसिपल लीड डॉ रुपिंदर सेखोन से जानते हैं कैसे हार्मोनल इंबैलेंस कैंसर का कारण बन सकता है.
हार्मोनल इंबैलेंस बन सकता है कैंसर का कारण
महिलाओं के शरीर में एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोजन हार्मोन्स बेहद जरूरी काम करते हैं. ये हार्मोन्स महिलाओं के पीरियड्स साइकिल को कंट्रोल करते हैं. जब लंबे समय तक हार्मोन इंबैलेंस रहते हैं तो महिलाओं में ब्रेस्ट कैंसर का जोखिम बढ़ जाता है.
पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम
अधिकतर महिलाएं पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम PCOS जैसी समस्या को नजरअंदाज कर देते हैं. डॉक्टर के अनुसार PCOS जैसी समस्या को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. लंबे समय तक PCOS से कैंसर का रिस्क बढ़ जाता है. बहुत कम उम्र में पीरियड्स, बहुत लेट मेनोपॉज, मोटापा, हार्मोनल असंतुलन से कैंसर का रिस्क बढ़ता है.
थकान
नींद पूरी होने के बाद भी थकान महसूस होना, बिना काम किए भी थकान सा लगना, 3 महीन से ज्यादा समय से थकान महसूस हो रही है तो इसे नजरअंदाज ना करें. जल्द से जल्द डॉक्टर के पास जाएं.
डाइजेशन
अगर आप लंबे समय से डाइजेशन की समस्या से परेशान हैं तो आपको इसे बिल्कुल भी नजरअंदाज ना करें.
वजन का कम होना
अगर आपका वजन अचानक कम होना शुरू हो गया, तो इसे नजरअंदाज ना करें. बिना वर्कआउट और डाइटिंग के अगर आपका वजन कम हो रहा है तो इसे नजरअंदाज ना करें. जल्द से जल्द डॉक्टर के पास जाएं.





