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सिंधु के बाद पाकिस्तान पर एक और चोट! क्या है ‘मोहरा प्रोजेक्ट’, जिसको 120 साल बाद फिर से शुरू करने जा रहा भारत?


पहलगाम हमले के बाद भारत ने सिंधु जल संधि को रद्द कर दिया था. इसके करीब एक साल बाद भारत ने एक ऐसा फैसला लिया है, जिससे पाकिस्तान की टेंशन बढ़ सकती है. जम्मू-कश्मीर सरकार राज्य में बिजली परियोजनाओं के काम में तेजी लाने का काम कर रही है. इसी प्लान के अंतर्गत राज्य सरकार 120 साल पुराने ऐतिहासिक मोहरा पावर प्रोजेक्ट को फिर से शुरू करने की प्लानिंग कर रही है. यह पावर प्रोजेक्ट साल 1990 से बंद है. एक समय पर यह प्लांट जम्मू-कश्मीर में मुख्य बिजली का स्रोत था.

दरअसल, मोहरा हाइड्रोइलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट भारत के सबसे पुराने पन बिजली प्लांट्स में से एक है. इसको साल 1905 में शुरू किया गया था. जानकारी के अनुसार, शुरुआत के समय में इस परियोजना की क्षमता 5 मेगावाट थी और यह झेलम नदी पर बनाया गया था. बता दें कि इस प्रोजेक्ट से लंबे समय तक श्रीनगर और कश्मीर घाटी के कई इलाकों में बिजली पहुंचाई जाती थी. साल 1950 तक यह घाटी का एक प्रमुख बिजली स्रोत था.

रिपोर्ट्स के अनुसार, साल 1992 में आए भयंकर भूकंप में इस प्लांट को काफी नुकसान पहुंचा था. इसके बाद धीरे-धीरे यह बंद हो गया और करीब 120 साल बाद इसके पुनरुद्धार के लिए जम्मू-कश्मीर सरकार आगे आई है. जम्मू-कश्मीर सरकार इसे फिर से जीवित करने का फैसला कर रही है. शुक्रवार (03 अप्रैल) को जम्मू-कश्मीर के सीएम उमर अब्दुला ने विधानसभा में बताया कि पुनरुद्धार की प्रक्रिया शुरू हो गई है. जम्मू-कश्मीर स्टेट पावर डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन के बोर्ड ने एक लिमिटेड टेंडर निकालने की मंजूरी दे दी है.

प्लांट की क्षमता को भी बढ़ाया जाएगा.
सीएम अब्दुल्ला ने बताया कि एक ट्रांजैक्शन एडवाइजर नियुक्त किया जाएगा, जो प्रोजेक्ट के नवीनीकरण, आधुनिकीकरण और क्षमता बढ़ाने में मदद करेगा. सरकार ने बताया कि इस प्रोजेक्ट की क्षमता को बढ़ाकर 10.5 मेगावट भी किया जाना है. इस प्रोजेक्ट के फिर से शुरू होने के बाद राज्य में बिजली की पर्याप्त उपलब्धता हो जाएगी.

पुरानी ऐतिहासिक इमारत को मिलेगी जान
गौरतलब है कि मोहरा प्रोजेक्ट के शुरू होने से सिर्फ बिजली पैदा करना नहीं, बल्कि कश्मीर की इंजीनियरिंग विरासत का भी महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है. इस प्रोजेक्ट के दोबारा शुरू होने के कारण स्थानीय स्तर पर बिजली की उपलब्धता बढ़ेगी और पुरानी ऐतिहासिक इमारत को नई जान मिलने की संभावना है.

ध्यान दिया जाना चाहिए कि जम्मू-कश्मीर सरकार ने यह फैसला ऐसे समय पर लिया है, जब एक साल पहले ही केंद्र सरकार ने अप्रैल 2025 के पहलगाम आतंकी हमले के बाद इंडस वाटर ट्रीटी को निलंबित कर दिया था. इसके बाद से जम्मू-कश्मीर में कई पनबिजली प्रोजेक्ट्स को तेजी से आगे बढ़या जा रहा है.

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