
Kanpur News: कानपुर किडनी कांड में आरोपियों की धरपकड़ और छानबीन के लिए कानपुर पुलिस की टीम ने वेस्ट यूपी में डेरा डाल दिया है। मेरठ, गाजियाबाद और मुजफ्फरनगर में छानबीन की जा रही है। मेरठ में स्वाट टीम को मदद के लिए लगाया गया है। टीम डॉ. वैभव और डॉ. अफजाल समेत पांच लोगों की तलाश कर रही है। टीम नोएडा में भी छानबीन करने जाएगी। फिलहाल प्रयास किया जा रहा है कि इस गैंग के पूरे रूटमैप और नेटवर्क को पता किया जाए ताकि जांच में अन्य आरोपियों के नाम शामिल किया जाए।
कानपुर किडनी कांड में छह आरोपियों की धरपकड़ के बाद जांच का दायरा बड़ा किया गया है। मेरठ के रहने वाले डॉ. वैभव और डॉ. अफजाल का इसी गैंग से कनेक्शन सामने आया था, साथ ही गाजियाबाद और नोएडा के कुछ आरोपियों का नाम भी सामने आ चुका है। इसे लेकर कानपुर पुलिस की टीम को वेस्ट यूपी भेजा गया है। टीम गाजियाबाद, मेरठ और मुजफ्फरनगर में कार्रवाई में जुटी है और साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं। ये भी पढ़ें:किडनी कांड: फरार डॉक्टरों के खिलाफ लुकआउट नोटिस, मेरठ के अस्पताल को भी नोटिस
आरोपियों के बैंक खातों की हो रही जांच टीम का मुख्य काम डॉ. वैभव और डॉ. अफजाल के घर का पता लगाना और गिरफ्तारी करना है। इस काम के लिए मेरठ स्वाट टीम को मदद के लिए लगाया गया है, साथ ही आरोपियों के बैंक खातों और सहयोगियों की भी जानकारी की जा रही है। घटना के बाद से ही दोनों आरोपी डॉक्टर फरार हैं, इसलिए इनके परिजनों की भी तलाश की जा रही है, ताकि पूछताछ हो सके। इस मामले में एसपी सिटी मेरठ को कार्रवाई में मदद करने और निगरानी के लिए जिम्मेदारी दी गई है। एसपी सिटी मेरठ लगातार कानपुर पुलिस अधिकारियों के संपर्क में हैं।
हवाला कनेक्शन पर भी हो रही जांच किडनी कांड में करोड़ों की रकम का लेनदेन किया गया। इस काम के लिए सारी रकम कैश में दी गई। अस्पताल में भर्ती कराने के नाम पर मामूली बिल दिए गए। ऐसे में आशंका है कि इस पूरे मामले में हवाला नेटवर्क का भी सहारा लिया गया। भले ही मिलने वाला कैश कई लोगों में बांटा गया, लेकिन नकदी को ठिकाने लगाने के लिए हवाला नेटवर्क का इस्तेमाल किये जाने का खुलासा हो रहा है। ऐसे में इस मामले में बड़ी कार्रवाई की तैयारी की जा रही है।
अल्फा हॉस्पिटल और डॉ. अफजाल का रिकॉर्ड खंगाल रही पुलिस अल्फा हॉस्पिटल, एंबुलेंस चालक तुषार, डॉ. देवेंद्र सैनी, डॉ. राहुल कुमार गोयल, डॉ. अरुण कुमार सिंह के खिलाफ उपमुख्य चिकित्सा अधिकारी महेश चंद्रा ने 26 नवंबर को मेडिकल थाने में मुकदमा अपराध संख्या 507/2025 दर्ज कराया था। बीएनएस की धारा 61(2), 352 और 318(4) के तहत कार्रवाई की गई थी। आरोप था कि गाजियाबाद से हरद्वारी लाल ने अपने बेटे को उपचार के लिए 15 नवंबर को मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया था। 16 नवंबर को एक एंबुलेंस चालक ने झांसा देकर मरीज को अल्फा हॉस्पिटल में भर्ती कराया। बाद में इसी अस्पताल में उपचार के लिए डेढ़ लाख रुपये की मांग की गई थी। ऐसे में मेडिकल कॉलेज के मरीज को निजी अस्पताल को बेचने का खुलासा हुआ था। इस मामले में अस्पताल का लाइसेंस निरस्त हुआ था। एसपी सिटी आयुष विक्रम सिंह ने बताया कि सीएमओ कार्यालय की रिपोर्ट के आधार पर पुलिस ने मुकदमे में एफआर लगा दी। वहीं, सीएमओ कार्यालय इसी आधार पर सीएमओ कार्यालय ने लाइसेंस दोबारा जारी कर दिया।





